भाजपा ने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को सुधारने के लिए आयोग को दिए सुझाव
सारांश
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कोलकाता, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल शाखा ने राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ के समक्ष एक विस्तृत प्रस्तुति दी। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए।
भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दीर्घकालिक चुनाव प्रक्रिया से हिंसा और प्रशासनिक दखल की संभावनाएं बढ़ती हैं। पार्टी ने आयोग से आग्रह किया कि छह सप्ताह तक 7-8 चरणों में मतदान कराने के बजाय कम समय में अधिकतम एक या दो चरणों में मतदान कराया जाए। इसके साथ ही, पिछले तीन चुनावों 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव एवं 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग के आदेश से स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को फिर से ट्रांसफर करने की भी मांग की।
भाजपा ने “संवेदनशील बूथ” के बारे में भी जानकारी दी, जहां पिछले तीन चुनावों के दौरान मतदान के समय या उसके बाद हिंसा हुई हो, या जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ हो और अशांति फैलने की आशंका हो।
सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में भाजपा ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर निर्भरता कम करने का सुझाव दिया। पार्टी ने मांग की कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की पर्याप्त संख्या में अग्रिम तैनाती की जाए और उनके लिए क्षेत्र से परिचित होने के लिए हैंडबुक उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, सीएपीएफ के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं कि बल की तैनाती व आवाजाही पूरी तरह से पारदर्शी हो और जवान स्थानीय लोगों से किसी भी प्रकार की मेहमाननवाजी स्वीकार न करें।
भाजपा ने यह भी सुझाव दिया कि सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों को पर्याप्त समय पहले तैनात किया जाए ताकि वे स्वतंत्र आकलन कर सकें। वहीं, सीएपीएफ की ओर से क्षेत्रीय डोमिनेशन, मार्ग मार्च और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग उपाय स्थानीय पुलिस के बजाय पर्यवेक्षकों की पहचान के आधार पर किए जाएं।
भाजपा ने मतदाताओं की पहचान के लिए दो चरणों की व्यवस्था, प्रत्येक मतदान केंद्र पर वेबकैम और राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों की 50-50 फीसदी भागीदारी की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि इन उपायों से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगी।