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गोपालगंज मुठभेड़: ₹50,000 इनामी कुख्यात आकाश कुमार के पैरों में गोली, 5 साल बाद STF का शिकंजा

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गोपालगंज मुठभेड़: ₹50,000 इनामी कुख्यात आकाश कुमार के पैरों में गोली, 5 साल बाद STF का शिकंजा

सारांश

5 साल से STF को चकमा देने वाला ₹50,000 इनामी कुख्यात अपराधी आकाश कुमार आखिरकार गोपालगंज मुठभेड़ में ढेर हो गया — पैरों में गोली लगी, भागने की कोशिश नाकाम। हत्या, रंगदारी समेत 12 मामलों के आरोपी पर सदर अस्पताल में इलाज जारी है।

मुख्य बातें

गोपालगंज के बंजारी बायपास क्षेत्र में शनिवार तड़के पुलिस-STF मुठभेड़ में ₹50,000 इनामी आकाश कुमार के दोनों पैरों में गोली लगी।
आकाश पर थावे के पूर्व मुखिया कुरैश मियां की हत्या , लूट, रंगदारी समेत करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
उसने स्टील व्यवसायी मृत्युंजय कुमार को रंगदारी न देने पर 60 दिनों में हत्या की धमकी दी थी।
बिहार STF पिछले 5 वर्षों से आकाश की गिरफ्तारी के प्रयास में थी; घटनास्थल से एक हथियार बरामद।
घायल आकाश को गोपालगंज सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गोपालगंज जिले के नगर थाना क्षेत्र में शनिवार तड़के हुई पुलिस मुठभेड़ में ₹50,000 के इनामी कुख्यात अपराधी आकाश कुमार के दोनों पैरों में गोली लगी और उसे गोपालगंज सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। बिहार पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मिलकर उस बदमाश को दबोचा, जो पिछले 5 वर्षों से सुरक्षा बलों को चकमा देता आ रहा था।

मुठभेड़ का पूरा घटनाक्रम

शुक्रवार की देर रात गोपालगंज पुलिस और STF की संयुक्त टीम ने आकाश कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने छिपाए गए हथियारों की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस उसे बंजारी बायपास क्षेत्र में हथियार बरामदगी के लिए ले गई।

हथियार का ठिकाना बताने के बहाने आकाश ने अचानक पुलिस दल पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें दो गोलियाँ आकाश के पैरों में लगीं। भागने की उसकी कोशिश नाकाम रही और घटनास्थल से एक हथियार भी बरामद किया गया।

आकाश कुमार: आपराधिक पृष्ठभूमि

आकाश कुमार, थावे थाना क्षेत्र के बरईहाता निवासी मनोज सिंह का पुत्र है। उस पर थावे के पूर्व मुखिया कुरैश मियां की हत्या, लूट और रंगदारी सहित करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

हाल ही में उसने थावे के स्टील व्यवसायी मृत्युंजय कुमार से रंगदारी माँगी थी। रकम न मिलने पर उसने 60 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए हत्या की धमकी दी थी। इसी के बाद पुलिस ने उस पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया था।

STF की पाँच साल की मशक्कत

बिहार STF आकाश कुमार की गिरफ्तारी के लिए पिछले 5 वर्षों से प्रयासरत थी। हर बार वह सुरक्षाबलों को चकमा देकर फरार हो जाता था। यह गिरफ्तारी STF और जिला पुलिस की संयुक्त रणनीति की बड़ी सफलता मानी जा रही है।

सरकार की नीति और पुलिस कार्रवाई

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पदभार संभालने के बाद राज्य पुलिस को अपराधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की खुली छूट दी गई है। बिहार में वांछित अपराधियों के मुठभेड़ में घायल होने की यह ताज़ा घटना उसी नीति की कड़ी मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

फिलहाल आकाश कुमार गोपालगंज सदर अस्पताल में उपचाराधीन है। स्वास्थ्य लाभ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है। पुलिस उससे पूछताछ कर उसके आपराधिक नेटवर्क और अन्य छिपे हथियारों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाती है कि 12 दर्ज मामलों और सक्रिय रंगदारी अल्टीमेटम के बावजूद वह 5 साल तक फरार क्यों रहा। मुठभेड़ की परिस्थितियाँ — जहाँ आरोपी ने हिरासत में ही पुलिस पर फायरिंग की — न्यायिक जाँच की माँग करती हैं, भले ही पुलिस का जवाबी कदम उचित प्रतीत हो। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की 'खुली छूट' नीति परिणाम दे रही है, पर बिना जवाबदेही ढाँचे के यह नीति दीर्घकाल में कानून के शासन को कमज़ोर भी कर सकती है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपालगंज मुठभेड़ में कौन घायल हुआ और क्यों वह वांछित था?
₹50,000 इनामी कुख्यात अपराधी आकाश कुमार गोपालगंज मुठभेड़ में घायल हुआ। उस पर थावे के पूर्व मुखिया कुरैश मियां की हत्या, लूट और रंगदारी समेत करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
आकाश कुमार पर सबसे हालिया आरोप क्या था?
आकाश ने थावे के स्टील व्यवसायी मृत्युंजय कुमार से रंगदारी माँगी थी और रकम न मिलने पर 60 दिनों के भीतर हत्या करने का अल्टीमेटम दिया था। इसी के बाद पुलिस ने उस पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया था।
बिहार STF को आकाश को पकड़ने में इतना समय क्यों लगा?
बिहार STF पिछले 5 वर्षों से आकाश कुमार की तलाश में थी, लेकिन हर बार वह सुरक्षाबलों को चकमा देकर फरार हो जाता था। अंततः पुलिस और STF की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार किया जा सका।
बिहार में अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मौजूदा नीति क्या है?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पदभार संभालने के बाद बिहार पुलिस को अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की खुली छूट दी गई है। इसी नीति के तहत राज्य में वांछित अपराधियों के खिलाफ मुठभेड़ और गिरफ्तारी की घटनाएँ बढ़ी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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