ग्रेटर नोएडा: आदर्श विहार सोसायटी में कार ने स्कूल जा रही बच्ची को रौंदा, पैर में फ्रैक्चर; सीसीटीवी में कैद लापरवाही
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर चाई-4 स्थित आदर्श विहार सोसायटी में 19 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जब स्कूल जाने के लिए निकली एक मासूम बच्ची को तेज़ रफ़्तार कार ने टक्कर मार दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने बच्ची के पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि की है। पूरी घटना सोसायटी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि बच्ची सुबह सोसायटी परिसर से गुज़रते हुए स्कूल जाने की तैयारी में थी। इसी दौरान एक कार तेज़ गति से परिसर के भीतर से गुज़री और बच्ची उसकी चपेट में आ गई। टक्कर लगते ही बच्ची सड़क पर गिर गई और उसके पैर में गंभीर चोट आई। सीसीटीवी फुटेज में वाहन की अत्यधिक गति और चालक का लापरवाह रवैया स्पष्ट रूप से दिखता है।
मौके पर राहत और अस्पताल पहुँचाई गई बच्ची
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद सोसायटी निवासी और राहगीर घटनास्थल पर जुट गए। लोगों ने बच्ची को उठाया और उसे तत्काल उपचार के लिए नज़दीकी अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची के पैर में फ्रैक्चर हुआ है। उसकी स्थिति के बारे में आगे की जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है।
पुलिस की जाँच और सीसीटीवी फुटेज की भूमिका
घटना की जानकारी मिलते ही थाना बीटा-2 पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। पुलिस अधिकारी सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जाँच कर रहे हैं। जाँच में यह पता लगाया जा रहा है कि हादसे के समय कार की रफ़्तार कितनी थी और वाहन किसने चलाया था। रिपोर्टों के अनुसार बच्ची के परिजनों ने भी कार चालक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
सोसायटी निवासियों में आक्रोश
आदर्श विहार सोसायटी के निवासियों ने इस घटना पर गहरा रोष जताया है। उनका कहना है कि आवासीय परिसर में वाहन चालकों को अनिवार्य रूप से धीमी गति से वाहन चलाना चाहिए, क्योंकि यहाँ बच्चे और बुज़ुर्ग नियमित रूप से पैदल आते-जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब आवासीय सोसायटियों में वाहन-संबंधी लापरवाही की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस जाँच पूरी होने के बाद कार चालक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अपेक्षित है। गौरतलब है कि आवासीय परिसरों में तेज़ रफ़्तार वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। सोसायटी प्रबंधन और स्थानीय पुलिस से परिसर में गति-नियंत्रण उपाय लागू करने की माँग भी तेज़ हो सकती है।