गुजरात में 5 साल में 6.54 लाख नौकरियाँ: 7,403 भर्ती मेलों से युवाओं को सीधा रोज़गार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के रोज़गार एवं प्रशिक्षण विभाग के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2021-22 से 2025-26 के बीच राज्यभर में आयोजित भर्ती मेलों के ज़रिये 6.54 लाख से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोज़गार मिला है। इस अवधि में कुल 7,403 भर्ती मेले आयोजित हुए, जिनमें 28,000 से अधिक निजी नियोक्ताओं ने भाग लिया।
मुख्य घटनाक्रम
विभाग के अनुसार, इस पहल की मूल अवधारणा सरल है — नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों को कंपनियों से सीधे जोड़ना और मौके पर ही साक्षात्कार आयोजित करना। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले 1,333 भर्ती मेले आयोजित किए गए, जिनके परिणामस्वरूप 1,15,774 से अधिक उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुए।
अधिकारियों ने इस मॉडल को सरकारी रोज़गार कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और निजी नियोक्ताओं के बीच एक समन्वित प्रयास बताया, जो उम्मीदवारों की योग्यता और उद्योग की माँग को एक मंच पर लाता है।
किन कंपनियों ने लिया भाग
इन मेलों में देश की प्रमुख औद्योगिक कंपनियों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। टाटा मोटर्स, सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन, होंडा मोटर कंपनी, रिलायंस जियो, आर्सेलरमित्तल, टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स और अरविंद लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों ने भर्ती अभियान में हिस्सा लिया। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अडानी सोलर सहित अन्य कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर भर्तियाँ कीं।
रोज़गार कार्यालयों का नेटवर्क
रोज़गार विभाग गुजरात भर में फैले 46 रोज़गार कार्यालयों के नेटवर्क के माध्यम से कार्य करता है। ये कार्यालय नियोक्ताओं की कार्यबल आवश्यकताओं का आकलन करते हैं और उपयुक्त उम्मीदवारों की पहचान के लिए स्कूलों, कॉलेजों तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के साथ समन्वय करते हैं।
मेलों से पहले रिक्तियों की जानकारी संस्थागत प्रचार, ईमेल और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये प्रसारित की जाती है, ताकि अधिकतम उम्मीदवार भाग ले सकें।
आम जनता पर असर
यह पहल विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो सीधे कंपनियों तक पहुँचने में असमर्थ हैं या जिनके पास नेटवर्क की कमी है। गौरतलब है कि भर्ती मेलों का यह मॉडल मध्यस्थों की भूमिका को कम करता है और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।
क्या होगा आगे
विभाग के आँकड़े बताते हैं कि 2025-26 में भर्ती मेलों की संख्या और नियुक्तियों का आँकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रहा है। निजी क्षेत्र की निरंतर भागीदारी यह संकेत देती है कि यह मॉडल आने वाले वर्षों में और विस्तारित हो सकता है।