17 अक्टूबर 2026
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गुजरात में शिक्षकों का गैर-शैक्षणिक बोझ घटाने की पहल, शिक्षा मंत्री वाजा ने बनाई समीक्षा समिति

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गुजरात में शिक्षकों का गैर-शैक्षणिक बोझ घटाने की पहल, शिक्षा मंत्री वाजा ने बनाई समीक्षा समिति

सारांश

गुजरात सरकार ने शिक्षकों के ऑनलाइन डेटा एंट्री और गैर-शैक्षणिक बोझ की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई है। शिक्षा मंत्री वाजा का कहना है — 'कक्षा ही शिक्षक का असली कार्यस्थल है।' समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

मुख्य बातें

गुजरात शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा ने 17 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक कर समीक्षा समिति गठित की।
समिति में GCERT , समग्र शिक्षा अभियान , स्कूल आयुक्त कार्यालय और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
समीक्षा में ऑनलाइन रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारियों का विश्लेषण होगा।
वाजा ने कहा — 'कक्षा ही शिक्षक का वास्तविक कार्यस्थल है' और काम सरल बनाने को मिशन मोड में बताया।
समिति की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल शिक्षकों के कर्तव्यों पर अंतिम निर्णय लेगी।

गुजरात सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को राज्य के स्कूल शिक्षकों पर थोपे गए गैर-शैक्षणिक कार्यों — विशेषकर ऑनलाइन पोर्टलों पर डेटा एंट्री — की व्यापक समीक्षा की घोषणा की। शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा ने गांधीनगर में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति को निर्देश दिया कि वह शिक्षकों का कार्यभार कम करने और उन्हें कक्षा-शिक्षण पर अधिक समय देने योग्य बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत करे।

समिति का गठन और दायरा

समीक्षा समिति में शिक्षा विभाग, गुजरात शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (GCERT), समग्र शिक्षा अभियान और स्कूल आयुक्त कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। समिति ऑनलाइन रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री, विभिन्न विभागों द्वारा सौंपी गई अतिरिक्त ज़िम्मेदारियों और शिक्षक प्रशिक्षण से उत्पन्न कार्यभार का विस्तृत विश्लेषण करेगी। अपने निष्कर्ष राज्य सरकार को एक रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बैठक में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव मिलिंद तोरावणे, प्राथमिक शिक्षा निदेशक प्रकाश त्रिवेदी और GCERT तथा समग्र शिक्षा अभियान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री वाजा का रुख

मंत्री वाजा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कक्षा ही शिक्षक का वास्तविक कार्यस्थल है।' उन्होंने अनावश्यक ऑनलाइन डेटा एंट्री और गैर-शैक्षणिक कार्यों को कम करने पर बल देते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों की चिंताओं को दूर करने के लिए 'मिशन मोड' में काम कर रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को छात्रों की पढ़ाई पर अधिकतम ध्यान केंद्रित करने देना है, जिससे शिक्षा की समग्र गुणवत्ता में सुधार हो सके।

विकसित भारत 2047 से जुड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए वाजा ने कहा, 'इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा की अहम भूमिका होगी और शिक्षकों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।' उन्होंने सरकार, शिक्षकों और छात्रों से राष्ट्र-निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया। गौरतलब है कि देशभर में शिक्षकों पर प्रशासनिक और डिजिटल रिपोर्टिंग का बोझ पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है, और कई राज्यों में शिक्षक संगठन इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।

आम शिक्षकों पर असर

प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अभी तक कई विभागों — जैसे स्वास्थ्य, जनगणना, चुनाव और सामाजिक कल्याण — की ओर से सौंपे गए कार्य भी करने पड़ते थे, जो सीधे तौर पर उनके शिक्षण घंटों में कटौती करते थे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार के अपने आँकड़े स्कूलों में सीखने के स्तर को सुधारने की ज़रूरत को रेखांकित करते हैं। समिति के सुझाव यदि लागू होते हैं, तो लाखों सरकारी स्कूल शिक्षकों को प्रत्यक्ष राहत मिल सकती है।

आगे क्या होगा

समिति के निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार अंतिम फ़ैसला करेगी। सरकार ने समय-सीमा का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन मंत्री ने 'मिशन मोड' की भाषा का उपयोग करके प्राथमिकता स्पष्ट की है। शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षक संगठनों की नज़र इस रिपोर्ट पर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि समिति की सिफारिशें महज़ कागज़ पर रहेंगी या ज़मीन पर उतरेंगी। देश के कई राज्यों में शिक्षक संगठन वर्षों से यही माँग उठाते रहे हैं, पर नीतिगत घोषणाओं के बावजूद विभागीय माँगें कम नहीं हुईं। असली परीक्षा यह है कि समिति केवल डेटा एंट्री तक सीमित रहती है या सभी विभागीय 'अतिरिक्त ड्यूटी' के ढाँचे को भी पुनर्परिभाषित करती है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ना राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए समिति की रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई की समय-सीमा सार्वजनिक होना ज़रूरी है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्यभार की समीक्षा क्यों की जा रही है?
स्कूल शिक्षकों पर ऑनलाइन डेटा एंट्री और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण कक्षा-शिक्षण का समय कम हो रहा था, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा ने 17 अक्टूबर 2026 को समीक्षा समिति गठित की।
गुजरात की समीक्षा समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
समिति में शिक्षा विभाग, GCERT, समग्र शिक्षा अभियान और स्कूल आयुक्त कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। प्रधान सचिव मिलिंद तोरावणे और प्राथमिक शिक्षा निदेशक प्रकाश त्रिवेदी उच्चस्तरीय बैठक में उपस्थित थे।
समिति किन मुद्दों की जाँच करेगी?
समिति ऑनलाइन रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री, विभिन्न विभागों द्वारा सौंपी गई अतिरिक्त जिम्मेदारियों और शिक्षक प्रशिक्षण से उत्पन्न कार्यभार का विस्तृत विश्लेषण करेगी। निष्कर्षों के आधार पर एक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी।
इस पहल से गुजरात के शिक्षकों को क्या फायदा होगा?
यदि सिफारिशें लागू होती हैं, तो प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत मिलेगी और वे कक्षा-शिक्षण पर अधिक समय दे सकेंगे। इससे छात्रों की सीखने की गुणवत्ता में सुधार का लक्ष्य है।
गुजरात सरकार का अंतिम फैसला कब तक आएगा?
सरकार ने अभी कोई निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की है। समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी। मंत्री वाजा ने इसे 'मिशन मोड' में बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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