गुजरात में शिक्षकों का गैर-शैक्षणिक बोझ घटाने की पहल, शिक्षा मंत्री वाजा ने बनाई समीक्षा समिति
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को राज्य के स्कूल शिक्षकों पर थोपे गए गैर-शैक्षणिक कार्यों — विशेषकर ऑनलाइन पोर्टलों पर डेटा एंट्री — की व्यापक समीक्षा की घोषणा की। शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा ने गांधीनगर में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति को निर्देश दिया कि वह शिक्षकों का कार्यभार कम करने और उन्हें कक्षा-शिक्षण पर अधिक समय देने योग्य बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत करे।
समिति का गठन और दायरा
समीक्षा समिति में शिक्षा विभाग, गुजरात शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (GCERT), समग्र शिक्षा अभियान और स्कूल आयुक्त कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। समिति ऑनलाइन रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री, विभिन्न विभागों द्वारा सौंपी गई अतिरिक्त ज़िम्मेदारियों और शिक्षक प्रशिक्षण से उत्पन्न कार्यभार का विस्तृत विश्लेषण करेगी। अपने निष्कर्ष राज्य सरकार को एक रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव मिलिंद तोरावणे, प्राथमिक शिक्षा निदेशक प्रकाश त्रिवेदी और GCERT तथा समग्र शिक्षा अभियान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री वाजा का रुख
मंत्री वाजा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कक्षा ही शिक्षक का वास्तविक कार्यस्थल है।' उन्होंने अनावश्यक ऑनलाइन डेटा एंट्री और गैर-शैक्षणिक कार्यों को कम करने पर बल देते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों की चिंताओं को दूर करने के लिए 'मिशन मोड' में काम कर रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को छात्रों की पढ़ाई पर अधिकतम ध्यान केंद्रित करने देना है, जिससे शिक्षा की समग्र गुणवत्ता में सुधार हो सके।
विकसित भारत 2047 से जुड़ाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए वाजा ने कहा, 'इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा की अहम भूमिका होगी और शिक्षकों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।' उन्होंने सरकार, शिक्षकों और छात्रों से राष्ट्र-निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया। गौरतलब है कि देशभर में शिक्षकों पर प्रशासनिक और डिजिटल रिपोर्टिंग का बोझ पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है, और कई राज्यों में शिक्षक संगठन इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।
आम शिक्षकों पर असर
प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अभी तक कई विभागों — जैसे स्वास्थ्य, जनगणना, चुनाव और सामाजिक कल्याण — की ओर से सौंपे गए कार्य भी करने पड़ते थे, जो सीधे तौर पर उनके शिक्षण घंटों में कटौती करते थे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार के अपने आँकड़े स्कूलों में सीखने के स्तर को सुधारने की ज़रूरत को रेखांकित करते हैं। समिति के सुझाव यदि लागू होते हैं, तो लाखों सरकारी स्कूल शिक्षकों को प्रत्यक्ष राहत मिल सकती है।
आगे क्या होगा
समिति के निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार अंतिम फ़ैसला करेगी। सरकार ने समय-सीमा का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन मंत्री ने 'मिशन मोड' की भाषा का उपयोग करके प्राथमिकता स्पष्ट की है। शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षक संगठनों की नज़र इस रिपोर्ट पर रहेगी।