18 अगस्त 2026
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कलकत्ता हाई कोर्ट की जनगणना में शिक्षकों की नियुक्ति पर कड़ी नाराजगी, RTE प्रभावित होने की चिंता

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कलकत्ता हाई कोर्ट की जनगणना में शिक्षकों की नियुक्ति पर कड़ी नाराजगी, RTE प्रभावित होने की चिंता

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने जनगणना में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर तैनाती पर फिर सवाल उठाए — यह दूसरी बार है जब अदालत ने RTE और नियमित पढ़ाई पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई है। SIR विवाद के बाद यह मामला शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी के व्यापक सवाल को फिर केंद्र में ले आया है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को पश्चिम बंगाल में जनगणना कार्य हेतु स्कूली शिक्षकों की नियुक्ति पर कड़ी नाराजगी जताई।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने निर्णय से पहले राज्य सरकार से परामर्श किया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) और छात्रों की नियमित कक्षाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता शिक्षकों ने लंबी दूरी और केवल रविवार की साप्ताहिक छुट्टी का हवाला देते हुए दोहरे बोझ को असंभव बताया।
इस वर्ष की शुरुआत में SIR कार्य के दौरान भी शिक्षकों की बड़े पैमाने पर तैनाती पर व्यापक विरोध हो चुका है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार, 18 अगस्त को पश्चिम बंगाल में जनगणना कार्य के लिए स्कूली शिक्षकों की बड़े पैमाने पर नियुक्ति पर कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया से शिक्षा का अधिकार (RTE) और छात्रों की नियमित कक्षाएं किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की सिंगल-जज बेंच ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाने का निर्णय लेने से पहले राज्य सरकार से विधिवत परामर्श किया था।

मुख्य घटनाक्रम

जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राव ने शिक्षकों को दिए गए कार्य-समय का विवरण माँगा। उन्होंने कहा कि यदि जनगणना का काम नियमित शिक्षण घंटों के बाद और साप्ताहिक अवकाश के दिनों में कराया जाता है, तो शिक्षकों पर दोहरा और असहनीय बोझ पड़ेगा। बेंच ने सुझाव दिया कि जनगणना अधिकारी शिक्षकों के लिए कार्य-समय में उचित बदलाव करें।

याचिकाकर्ताओं के तर्क

याचिकाकर्ताओं में मुख्य रूप से सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक शामिल हैं। उनका कहना है कि स्कूल तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और साप्ताहिक अवकाश में केवल रविवार मिलता है, ऐसे में जनगणना कार्य का अतिरिक्त दबाव झेलना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

पूर्व में भी उठे थे सवाल

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई हो। इससे पहले भी अदालत ने बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि राज्य सरकार एक साथ इतने अधिक शिक्षकों को लगाने के बजाय सीमित संख्या में शिक्षकों से काम चला सकती थी। यह ऐसे समय में आया है जब इस वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनावों से पहले 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) कार्य के लिए भी बड़ी संख्या में शिक्षकों को लगाया गया था, जिस पर शिक्षा जगत में व्यापक विरोध हुआ था।

अदालत का निर्देश

बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक संतुलित प्रशासनिक योजना तैयार करे, जिससे जनगणना प्रक्रिया भी सुचारु रूप से चले और शिक्षकों की नियमित शिक्षण जिम्मेदारी भी प्रभावित न हो। मामले में अगली सुनवाई में राज्य और केंद्र दोनों पक्षों से स्पष्टीकरण अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे वह चुनाव ड्यूटी हो, SIR हो या जनगणना। अदालत की बार-बार की आपत्तियों के बावजूद यह प्रवृत्ति जारी है, जो बताती है कि नीतिगत स्तर पर शिक्षकों की प्राथमिक भूमिका को लेकर स्पष्टता का अभाव है। RTE के तहत बच्चों के सीखने के अधिकार और राज्य की प्रशासनिक जरूरतों के बीच यह टकराव तब तक नहीं सुलझेगा जब तक केंद्र और राज्य दोनों मिलकर वैकल्पिक जनगणना कार्यबल की व्यवस्था नहीं करते।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने जनगणना में शिक्षकों की नियुक्ति पर क्यों नाराजगी जताई?
अदालत ने चिंता जताई कि बड़े पैमाने पर शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी से शिक्षा का अधिकार (RTE) और छात्रों की नियमित कक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने यह भी पूछा कि केंद्र ने यह निर्णय राज्य से परामर्श किए बिना लिया या नहीं।
याचिकाकर्ता शिक्षकों की क्या मुख्य शिकायत है?
सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि स्कूल तक लंबी दूरी और केवल रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण नियमित शिक्षण के साथ जनगणना कार्य का अतिरिक्त बोझ उठाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
अदालत ने इस मामले में क्या निर्देश दिए हैं?
न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने जनगणना अधिकारियों को शिक्षकों के कार्य-समय में बदलाव करने का सुझाव दिया और राज्य सरकार को एक संतुलित प्रशासनिक योजना बनाने का निर्देश दिया, जिससे शिक्षण कार्य बाधित न हो।
क्या इससे पहले भी इस मुद्दे पर विरोध हुआ है?
हाँ, इस वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनावों से पहले 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) कार्य के लिए शिक्षकों की तैनाती पर शिक्षा जगत में व्यापक विरोध हो चुका है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी पहले इसी मुद्दे पर सवाल उठाए थे।
इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार की क्या भूमिका है?
जनगणना केंद्र सरकार का विषय है, लेकिन शिक्षकों की तैनाती राज्य स्तर पर होती है। अदालत ने सवाल उठाया है कि क्या केंद्र ने यह निर्णय लेने से पहले पश्चिम बंगाल सरकार से परामर्श किया था, जो प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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