कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जनगणना ड्यूटी पर लगाए जाएँ तो शिक्षक 'ऑन-ड्यूटी' माने जाएँ, पढ़ाई बाधित न हो
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल-जज बेंच ने 21 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर नियुक्त करने के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण शर्तें निर्धारित कीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को उस पूरी अवधि के लिए 'ऑन-ड्यूटी' दर्ज किया जाए और स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक सत्र बाधित न हो।
मुख्य निर्देश और शर्तें
जस्टिस कृष्णा राव ने आदेश में कहा कि संबंधित स्कूलों को जनगणना ड्यूटी के लिए शिक्षकों की आवश्यकता की सूचना पहले से दी जाए। साथ ही, जब भी किसी शिक्षक को जनगणना कार्य पर भेजा जाए, तो स्कूल प्रशासन को उसके स्थान पर वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था करनी होगी ताकि कक्षाएँ प्रभावित न हों। एक बार ड्यूटी सौंपे जाने के बाद, संबंधित शिक्षक को जनगणना से जुड़े सभी आवश्यक कार्य करने होंगे।
एक साथ दो ड्यूटी नहीं
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी शिक्षक एक ही समय में शिक्षण और जनगणना — दोनों ड्यूटी नहीं निभा सकता। जस्टिस राव ने कहा कि शिक्षक या तो पढ़ाने की ड्यूटी पर होगा या जनगणना की ड्यूटी पर — दोनों एक साथ संभव नहीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने रोटेशनल आधार पर और यदि संभव हो तो वैकल्पिक दिनों में शिक्षकों की नियुक्ति का सुझाव दिया।
बड़े पैमाने पर नियुक्ति पर सवाल
अदालत ने सरकारी स्कूलों से बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक साथ जनगणना ड्यूटी पर लगाने की प्रवृत्ति पर भी आपत्ति जताई। जस्टिस राव ने राज्य सरकार को सलाह दी कि जनगणना के लिए चुनिंदा शिक्षकों की ही नियुक्ति की जाए, न कि सामूहिक रूप से। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या इस निर्णय से पहले जनगणना अधिकारियों ने राज्य सरकार से विधिवत परामर्श किया था।
याचिकाकर्ता शिक्षकों का पक्ष
जिन शिक्षकों ने अपनी सामूहिक नियुक्ति के विरुद्ध कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जनगणना कार्य में भाग लेने के विरुद्ध नहीं हैं। उनकी मुख्य माँग यह थी कि इस अवधि को प्रशासनिक रूप से 'ऑन-ड्यूटी' के रूप में मान्यता मिले। सिंगल-जज बेंच ने इस माँग को स्वीकार करते हुए शुक्रवार को फैसला सुनाया।
आगे की राह
इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल सरकार को जनगणना ड्यूटी के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव करने होंगे। गौरतलब है कि यह मामला गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार दोपहर फैसले के रूप में सामने आया। अदालत के इस निर्देश से राज्य में शिक्षा और जनगणना प्रशासन के बीच समन्वय की नई रूपरेखा तय होगी।