दिल्ली हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को नसीहत: SIR ड्यूटी में शिक्षकों का तनाव समझें, 11 घंटे काम की अपेक्षा अनुचित
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्यूटी में स्कूली शिक्षकों की तैनाती को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को शिक्षकों की स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील रहने की कड़ी नसीहत दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव संबंधी जिम्मेदारियाँ तय करते समय शिक्षकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक बोझ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुख्य घटनाक्रम
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि एक शिक्षक पहले से ही स्कूल में 6 से 8 घंटे तक अध्यापन कार्य करता है। इसके ऊपर चुनाव ड्यूटी लाद देने से उस पर दोहरा बोझ पड़ता है। अदालत ने कहा कि किसी शिक्षक से 11 घंटे तक लगातार काम करने की अपेक्षा रखना न्यायसंगत नहीं है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग के आदेशों में प्रयुक्त भाषा पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि उन आदेशों का लहजा धमकी भरा प्रतीत होता है, जो किसी सरकारी निर्देश के लिए उचित नहीं है।
महिला शिक्षकों की विशेष चिंता
अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके ऊपर पारिवारिक और घरेलू जिम्मेदारियाँ भी होती हैं। ऐसे में उनसे दिन भर के अध्यापन के बाद चुनाव ड्यूटी की माँग करना उनके लिए असहनीय स्थिति उत्पन्न कर सकता है। अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि इस समस्या के समाधान के लिए वह क्या ठोस कदम उठा रहा है।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि शिक्षकों के सामने एक विचित्र असमंजस की स्थिति है — एक तरफ चुनाव आयोग ने SIR ड्यूटी का सर्कुलर जारी किया है, तो दूसरी तरफ स्कूलों के प्रधानाचार्य शिक्षकों से नियमित कक्षाएँ संचालित करने के लिए कह रहे हैं। इससे शिक्षक अपने शैक्षणिक दायित्व भी ठीक से नहीं निभा पा रहे।
वकील ने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) से यह जानकारी माँगी जाए कि शिक्षण समय के दौरान कितने शिक्षकों को SIR चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है।
अदालत का निर्देश
हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि चुनाव संबंधी कार्य सौंपते समय शिक्षकों के कार्यभार के इस पहलू को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाए और ड्यूटी का बोझ इतना अधिक न हो कि वह असहनीय बन जाए। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की गई है।
आगे क्या
यह मामला दिल्ली में चुनाव प्रक्रियाओं और शिक्षा व्यवस्था के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करता है। 20 अगस्त की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि चुनाव आयोग ने शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं। इस फैसले का असर भविष्य में देशभर में चुनाव ड्यूटी के लिए शिक्षकों की तैनाती की नीति पर भी पड़ सकता है।