28 जुलाई 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को नसीहत: SIR ड्यूटी में शिक्षकों का तनाव समझें, 11 घंटे काम की अपेक्षा अनुचित

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दिल्ली हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को नसीहत: SIR ड्यूटी में शिक्षकों का तनाव समझें, 11 घंटे काम की अपेक्षा अनुचित

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने SIR ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती पर चुनाव आयोग को सीधी नसीहत दी — जो पहले से 6-8 घंटे पढ़ाते हैं, उनसे 11 घंटे काम की अपेक्षा अनुचित है। आदेशों की धमकी भरी भाषा पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को SIR ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।
अदालत ने कहा — शिक्षक पहले से 6 से 8 घंटे पढ़ाते हैं; उनसे 11 घंटे काम की अपेक्षा अनुचित है।
प्राथमिक और जूनियर स्कूलों की महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का विशेष उल्लेख किया।
कोर्ट ने चुनाव आयोग के आदेशों की धमकी भरी भाषा पर नाराजगी जताई।
याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार और MCD से शिक्षण समय के दौरान ड्यूटी पर लगाए गए शिक्षकों का डेटा माँगने का सुझाव दिया।
मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्यूटी में स्कूली शिक्षकों की तैनाती को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को शिक्षकों की स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील रहने की कड़ी नसीहत दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव संबंधी जिम्मेदारियाँ तय करते समय शिक्षकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक बोझ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि एक शिक्षक पहले से ही स्कूल में 6 से 8 घंटे तक अध्यापन कार्य करता है। इसके ऊपर चुनाव ड्यूटी लाद देने से उस पर दोहरा बोझ पड़ता है। अदालत ने कहा कि किसी शिक्षक से 11 घंटे तक लगातार काम करने की अपेक्षा रखना न्यायसंगत नहीं है।

कोर्ट ने चुनाव आयोग के आदेशों में प्रयुक्त भाषा पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि उन आदेशों का लहजा धमकी भरा प्रतीत होता है, जो किसी सरकारी निर्देश के लिए उचित नहीं है।

महिला शिक्षकों की विशेष चिंता

अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके ऊपर पारिवारिक और घरेलू जिम्मेदारियाँ भी होती हैं। ऐसे में उनसे दिन भर के अध्यापन के बाद चुनाव ड्यूटी की माँग करना उनके लिए असहनीय स्थिति उत्पन्न कर सकता है। अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि इस समस्या के समाधान के लिए वह क्या ठोस कदम उठा रहा है।

याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि शिक्षकों के सामने एक विचित्र असमंजस की स्थिति है — एक तरफ चुनाव आयोग ने SIR ड्यूटी का सर्कुलर जारी किया है, तो दूसरी तरफ स्कूलों के प्रधानाचार्य शिक्षकों से नियमित कक्षाएँ संचालित करने के लिए कह रहे हैं। इससे शिक्षक अपने शैक्षणिक दायित्व भी ठीक से नहीं निभा पा रहे।

वकील ने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) से यह जानकारी माँगी जाए कि शिक्षण समय के दौरान कितने शिक्षकों को SIR चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है।

अदालत का निर्देश

हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि चुनाव संबंधी कार्य सौंपते समय शिक्षकों के कार्यभार के इस पहलू को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाए और ड्यूटी का बोझ इतना अधिक न हो कि वह असहनीय बन जाए। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की गई है।

आगे क्या

यह मामला दिल्ली में चुनाव प्रक्रियाओं और शिक्षा व्यवस्था के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करता है। 20 अगस्त की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि चुनाव आयोग ने शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं। इस फैसले का असर भविष्य में देशभर में चुनाव ड्यूटी के लिए शिक्षकों की तैनाती की नीति पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी — बच्चों की पढ़ाई — पर पड़ने वाले असर की कोई जवाबदेही नहीं होती। चुनाव आयोग के आदेशों में 'धमकी भरी भाषा' पर कोर्ट की नाराजगी यह भी बताती है कि संस्थागत संवाद का लहजा कितना असंवेदनशील हो सकता है। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग शिक्षकों के विकल्प के रूप में किसी स्थायी कैडर की व्यवस्था करेगा, या हर बार अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने SIR ड्यूटी मामले में क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी सौंपते समय उनके कार्यभार का ध्यान रखा जाए। अदालत ने कहा कि जो शिक्षक पहले से 6 से 8 घंटे पढ़ाते हैं, उनसे 11 घंटे काम की अपेक्षा अनुचित है।
SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) ड्यूटी क्या होती है?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसके लिए स्कूली शिक्षकों को बूथ लेवल अधिकारी के रूप में तैनात किया जाता है। इस दौरान शिक्षकों को उनके नियमित अध्यापन कार्य के साथ-साथ चुनाव संबंधी जिम्मेदारियाँ भी निभानी पड़ती हैं।
याचिकाकर्ता ने अदालत में क्या माँग रखी?
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि दिल्ली सरकार और MCD से यह डेटा माँगा जाए कि शिक्षण समय के दौरान कितने शिक्षक SIR ड्यूटी में लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग के सर्कुलर और प्रधानाचार्यों के निर्देशों के बीच शिक्षक असमंजस में हैं।
महिला शिक्षकों के बारे में अदालत ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक कार्यरत हैं, जिनकी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ भी होती हैं। ऐसे में उनसे लंबे समय तक लगातार काम की अपेक्षा करना उनके लिए असहनीय बन सकता है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की है। उस सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि चुनाव आयोग ने शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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