मांजलपुर उपचुनाव 2025: कांग्रेस ने भीखा रबारी को उतारा, 30 जुलाई को BJP के सतीश पटेल से होगी टक्कर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 12 जुलाई को वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव के लिए वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य मंत्री भीखा रबारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद यह ऐलान हुआ, और अब रबारी का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सतीश पटेल से होगा।
भीखा रबारी: चार दशकों का राजनीतिक अनुभव
79 वर्षीय भीखा रबारी वर्तमान में गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) के उपाध्यक्ष हैं और चार दशकों से अधिक समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। पार्टी नेताओं के अनुसार, वे 1985 से 1990 तक विधानसभा सदस्य रहे और 1988-89 के दौरान गुजरात के उद्योग, खान एवं ऊर्जा राज्य मंत्री के पद पर रहे।
महाराजा सयाजीराव बड़ौदा विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक रबारी, वडोदरा में दो बार नगर पार्षद रह चुके हैं और विश्वविद्यालय के पूर्व सीनेट सदस्य भी हैं। संगठनात्मक स्तर पर वे वडोदरा नगर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, AICC प्रतिनिधि और GPCC उपाध्यक्ष जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
उन्होंने दाहोद, पंचमहल, वडोदरा, छोटा उदयपुर, आनंद और खेड़ा सहित कई जिलों में कांग्रेस प्रभारी की भूमिका निभाई है। हाल ही में उन्हें मध्य गुजरात के आठ जिलों के लिए ओबीसी विभाग के संयोजक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पुरस्कार और सामाजिक योगदान
समाज के कमजोर वर्गों और सामाजिक कल्याणकारी पहलों में योगदान के लिए रबारी को इंडिया इंटरनेशनल फ्रेंडशिप सोसाइटी द्वारा 'भारत ज्योति पुरस्कार' से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, 2010 में गुजरात के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान स्टेट्स एक्स-विधायक काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार से नवाजा था।
BJP का दांव: सतीश पटेल
भाजपा ने गुजरात के सहकारिता क्षेत्र से जुड़े अनुभवी नेता सतीश पटेल को उपचुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के भीतर हुई पैरवी के बाद उनका चयन हुआ, और यह BJP का उस निर्वाचन क्षेत्र को बरकरार रखने का प्रयास है जो लंबे समय से उसका गढ़ रहा है।
उपचुनाव की पृष्ठभूमि
मांजलपुर विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव BJP के आठ बार के विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री योगेश पटेल के 2 जून को लंबी बीमारी के बाद निधन के कारण आवश्यक हो गया। यह सीट ऐतिहासिक रूप से BJP का मजबूत गढ़ रही है, जिससे कांग्रेस के लिए यह मुकाबला कड़ी चुनौती साबित होगा। गौरतलब है कि गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से BJP के वर्चस्व को तोड़ने की कोशिश कर रही है, और रबारी जैसे अनुभवी चेहरे को उतारना इसी रणनीति का हिस्सा है। 30 जुलाई को मतदान के परिणाम न केवल इस सीट का, बल्कि गुजरात में कांग्रेस की पुनर्वापसी की संभावनाओं का भी संकेत देंगे।