गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2025: अमित शाह और जय शाह ने परिवार संग बूथ नंबर 38 पर डाला वोट
सारांश
Key Takeaways
- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 26 अप्रैल 2025 को अहमदाबाद के बूथ नंबर 38 पर ICC अध्यक्ष बेटे जय शाह और परिवार के साथ मतदान किया।
- गुजरात में 10,005 में से 9,263 सीटों पर मतदान हो रहा है; 4.18 करोड़ मतदाता और 50,000 बूथ स्थापित।
- 393 स्वशासनिक संस्थाओं के लिए 9,992 प्रतिनिधि चुने जाएंगे; 20,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में।
- पहली बार OBC को 27%25 आरक्षण के साथ यह चुनाव हो रहा है; इसके लिए व्यापक परिसीमन और वार्ड पुनर्गठन किया गया।
- सूरत में जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने 89 वर्षीय माता के साथ मतदान किया; बरवाला में स्वामीनारायण मंदिर के संतों ने भी वोट डाला।
- भाजपा, कांग्रेस और AAP के बीच बहुकोणीय मुकाबला; परिणाम 2027 विधानसभा चुनाव की दिशा तय करेंगे।
अहमदाबाद, 26 अप्रैल 2025 (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2025 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को अहमदाबाद के नारायणपुरा स्थित उपक्षेत्रीय कार्यालय के बूथ नंबर 38 पर अपना मताधिकार प्रयोग किया। उनके साथ ICC अध्यक्ष और बेटे जय शाह समेत परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। राज्य की 10,005 में से 9,263 सीटों पर सुबह 7 बजे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण मतदान जारी है।
अमित शाह का मतदान और सोशल मीडिया संदेश
गृहमंत्री अमित शाह ने मतदान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि गुजरात में चल रहे नगर निकाय चुनावों के तहत अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में अपना वोट डाला और सभी क्षेत्रवासियों से लोकतंत्र के इस पर्व में अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की। उनका यह संदेश मतदाताओं को प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि जय शाह हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अध्यक्ष बने हैं, जिससे उनकी सार्वजनिक उपस्थिति और भी चर्चा में रहती है। पिता-पुत्र का एक साथ मतदान केंद्र पर पहुंचना इस चुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व दे रहा है।
अन्य केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं ने भी किया मतदान
सूरत में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने अपनी 89 वर्षीय माता और परिवार के साथ भातर स्थित उत्तर गुजरात विद्यालय में वोट डाला। मतदान के बाद उन्होंने कहा कि मतदान करना एक अधिकार और कर्तव्य दोनों है। उनकी बुजुर्ग माता का मतदान में भाग लेना सोशल मीडिया पर खासा चर्चित रहा।
राज्य मंत्रिमंडल मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने पोरबंदर जिले के अपने पैतृक गांव मोढवाडा में परिवार के साथ मतदान किया। उन्होंने कहा कि गांवों और शहरों के विकास में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और नागरिकों को बड़ी संख्या में मतदान करना चाहिए।
राजकोट नगर आयुक्त तुषार सुमेरा ने भी परिवार के साथ अपने शहर के मतदान केंद्र पर वोट डाला। मोरबी में भाजपा विधायक दुर्लभजीभाई देथरिया ने मतदान किया, जबकि बरवाला में स्वामीनारायण मंदिर के संतों ने भी लोकतंत्र के इस पर्व में सहभागिता निभाई।
चुनाव का दायरा और ऐतिहासिक महत्व
यह चुनाव गुजरात की 393 स्वशासनिक संस्थाओं के लिए हो रहा है जिसमें 15 नगर निगम, 84 नगरपालिकाएं, 34 जिला पंचायतें और 260 तालुका पंचायतें शामिल हैं। 4.18 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं और इसके लिए लगभग 50,000 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं।
कुल 9,992 स्थानीय प्रतिनिधियों का चुनाव हो रहा है। नाम वापसी के बाद 20,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि कई उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।
ओबीसी आरक्षण और नई व्यवस्था
यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए संशोधित 27 प्रतिशत आरक्षण नियमों के तहत पहली बार हो रहा है। इन बदलावों के लिए कई जिलों में व्यापक परिसीमन और वार्ड पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए पहले से मौजूद आरक्षण के साथ इन नए सुधारों से गुजरात भर में स्थानीय प्रशासन निकायों की संरचना नया रूप लेने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओबीसी आरक्षण लागू होने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का समीकरण बदल सकता है।
राजनीतिक परिदृश्य और भाजपा की स्थिति
यह चुनाव भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच बहुकोणीय मुकाबले का रूप ले चुका है। भाजपा वर्तमान में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट के नगर निगमों पर नियंत्रण रखती है।
यह चुनाव परिणाम राज्य में भाजपा की जमीनी पकड़ का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाएगा। 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले यह स्थानीय निकाय चुनाव सभी दलों के लिए एक अग्निपरीक्षा की तरह है। मतदान के नतीजे आने के बाद गुजरात के स्थानीय शासन की दिशा स्पष्ट होगी और यह तय होगा कि नई ओबीसी आरक्षण नीति किस दल को कितना राजनीतिक लाभ देती है।