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गुजरात: एसएसआईपी योजना के तहत योगेश का बैंबू स्टार्टअप, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

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गुजरात: एसएसआईपी योजना के तहत योगेश का बैंबू स्टार्टअप, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

सारांश

गुजरात के नवसारी जिले के योगेश यादव ने बांस पर आधारित स्टार्टअप शुरू कर ग्रामीण उद्यमिता का नया उदाहरण पेश किया है। उनका उद्देश्य प्लास्टिक के विकल्प के रूप में प्राकृतिक उत्पादों का प्रचार करना है।

मुख्य बातें

योगेश यादव का बैंबू स्टार्टअप ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है।
एसएसआईपी योजना से मिले फंड ने स्टार्टअप की शुरुआत में मदद की।
उद्यम का लक्ष्य प्लास्टिक के उपयोग को कम करना है।
बांस से बने उत्पाद इको-फ्रेंडली हैं।
योगेश की कहानी पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करती है।

नवसारी, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के नवसारी जिले के योगेश अब ग्रामीण उद्यमिता और नवाचार का एक नया चेहरा बन चुके हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्राप्त करके गाँव का युवा भी सफल स्टार्टअप स्थापित कर सकता है।

नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री से प्रशिक्षण के बाद, आदिवासी युवा योगेश यादव ने बांस को अपनी आय का स्रोत बनाया। उनका स्टार्टअप बांस से १२० से अधिक विभिन्न उत्पादों का निर्माण कर रहा है। इन उत्पादों की विशेषता यह है कि ये प्राकृतिक, टिकाऊ और पूरी तरह से इको-फ्रेंडली हैं। योगेश का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं है, बल्कि लोगों को प्लास्टिक से दूर करके प्रकृति के करीब लाना है।

बैंबू स्टार्टअप के संस्थापक योगेश यादव ने बताया कि तीसरे वर्ष में एक कोर्स था, ईएलपी, जिसमें उन्होंने बांस पर गहराई से काम किया। इसके बाद, उन्होंने सोचा कि इस विचार को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इसलिए स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया। उनका मुख्य उद्देश्य बांस और लकड़ी के उत्पादों को पौधों की तरह इस्तेमाल करके लोगों को प्लास्टिक से दूर करना और प्रकृति के करीब लाना है।

योगेश यादव ने अपने उद्यम की शुरुआत के बारे में बताया कि उनके पाठ्यक्रम में ईएलपी नामक एक कोर्स था, जिसके तहत उन्हें बांस पर गहन अध्ययन का अवसर मिला। इस दौरान, उन्होंने यह महसूस किया कि बांस केवल पारंपरिक उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कोर्स के दौरान किए गए अनुसंधान और प्रयोगों ने उन्हें नई दिशा दी। इसके बाद, उन्होंने विचार किया कि इस सोच को कैसे आगे बढ़ाया जाए और इसे व्यावसायिक रूप दिया जाए। इसी सोच के साथ, उन्होंने बैंबू आधारित स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया।

उनका स्टार्टअप बांस और लकड़ी से बने उत्पादों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिन्हें पौधों और पेंट आधारित विकल्पों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका लक्ष्य है लोगों को प्लास्टिक के उपयोग से दूर करना और उन्हें प्रकृति के करीब लाना। उनका मानना है कि यदि रोजमर्रा की ज़िंदगी में प्लास्टिक की जगह बांस जैसे टिकाऊ और बायोडिग्रेडेबल संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जाए, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव आ सकता है।

योगेश ने इस स्टार्टअप को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे एसएसआईपी योजना यानी स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के जरिए मिले फंड से शुरू किया। योगेश बताते हैं कि उनका इस स्टार्टअप को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय के उत्पादों का प्रचार करना है।

योगेश यादव ने कहा कि इस स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए हमें कॉलेज से एसएसआईपी फंड मिला था, जिससे हमें आगे बढ़ने का अवसर मिला।

आदिवासी युवा योगेश की सफलता की कहानी पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका यह स्टार्टअप राज्य के युवाओं को प्रेरित करता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने सपनों को कैसे साकार किया जा सकता है और विकसित गुजरात, विकसित भारत में योगदान दिया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि योगेश यादव की कहानी न केवल उद्यमिता के क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन से सीमित संसाधनों में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगेश यादव का स्टार्टअप कैसे शुरू हुआ?
योगेश यादव ने एसएसआईपी योजना के तहत मिले फंड से अपने बैंबू स्टार्टअप की शुरुआत की।
योगेश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को प्लास्टिक से दूर करना और बांस जैसे प्राकृतिक उत्पादों का प्रचार करना है।
बैंबू स्टार्टअप में कौन-कौन से उत्पाद शामिल हैं?
योगेश का स्टार्टअप बांस से १२० से अधिक विभिन्न उत्पादों का निर्माण करता है।
योगेश यादव ने किस विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण लिया?
योगेश ने नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री से प्रशिक्षण लिया।
क्या यह स्टार्टअप आदिवासी समुदाय के लिए लाभकारी है?
हाँ, योगेश का स्टार्टअप आदिवासी समुदाय के उत्पादों का प्रमोशन करता है।
राष्ट्र प्रेस
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