धर्मेंद्र प्रधान ने एनसीईआरटी विवाद पर कहा, न्यायपालिका का अपमान करना नहीं था उद्देश्य
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जमशेदपुर, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कक्षा 8 की एनसीईआरटी पुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक के संदर्भ में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की और इस सामग्री पर रोक लगाने का आदेश दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पर कहा कि न्यायपालिका के आदेशों का पूर्ण पालन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का अपमान करना सरकार का मकसद नहीं था।
धर्मेंद्र प्रधान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जैसे ही यह मामला उनके ध्यान में आया, उन्होंने तुरंत एनसीईआरटी को आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया ताकि इस मुद्दे की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि हम इस मामले को गंभीरता से लेते हैं और इसकी जांच की जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी त्रुटि फिर से न हो। हमें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और मेरा मानना है कि भारत जैसे महान देश में न्यायपालिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सम्मानित स्थान है। इसके निर्देशों का पालन करना हमारी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। धर्मेंद्र प्रधान ने देश के 140 करोड़ नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान करने और उनका पालन करने के लिए संकल्पबद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के संदर्भों को लेकर एनसीईआरटी पर कड़ी फटकार लगाई और कहा कि यह विवाद एक सुनियोजित प्रयास का परिणाम प्रतीत होता है, जिससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा है।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कक्षा-8 (भाग-2) की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक और संबंधित शीर्षक का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक मामले की सुनवाई करते हुए व्यापक निर्देश जारी किए, जिसमें पाठ्यपुस्तक की तत्काल राष्ट्रव्यापी जब्ती, डिजिटल प्रतियों को हटाना और इसके प्रकाशन या वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है।
पीठ ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली के साथ मिलकर यह टिप्पणी की कि यह "न्यायपालिका के संस्थागत अधिकार को कमजोर करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का एक सुनियोजित प्रयास" दर्शाता है और चेतावनी दी कि इस तरह की बातें बिना रोक-टोक के जारी रहने से जनता का विश्वास कमजोर होगा।