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एनसीईआरटी पुस्तक विवाद: न्यायपालिका से जुड़े अध्याय के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई समाप्त

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एनसीईआरटी पुस्तक विवाद: न्यायपालिका से जुड़े अध्याय के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई समाप्त

सारांश

एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका से संबंधित अध्याय को दोबारा लिखने के लिए एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। इस समिति में प्रमुख कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं।

मुख्य बातें

एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में विवादित अध्याय को पुनः लिखा जाएगा।
तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
समिति में प्रमुख कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई समाप्त की।
पुस्तक अब उपलब्ध नहीं होगी।

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएमएस)। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की पुस्तक में न्यायपालिका से संबंधित अध्याय को पुनः लिखने हेतु एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इस बात की जानकारी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को दी।

केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस समिति में पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस अनिरुद्ध बोस शामिल हैं।

सरकार ने यह कदम एनसीईआरटी की किताब के उस भाग पर उठाया है, जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' का उल्लेख था। समिति के गठन के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी सुनवाई समाप्त कर दी है।

उल्लेखनीय है कि एनसीईआरटी ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए सामाजिक विज्ञान की पुस्तक "एक्सप्लोरिंग सोसाइटीः इंडिया एंड बियॉन्ड" (भाग-2) प्रकाशित की थी। इस पुस्तक में "हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका" शीर्षक का एक पाठ शामिल था, जिसमें न्याय व्यवस्था पर विवादित जानकारी थी। इसी कारण इस अध्याय पर विभिन्न पक्षों से आपत्तियां आई थीं। स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर आपत्ति दर्ज की थी।

जब सुप्रीम कोर्ट ने मामला उठाया, तब एनसीईआरटी ने अपनी गलती मानते हुए इस अध्याय को वापस ले लिया था। एनसीईआरटी के निदेशक और परिषद के सदस्यों ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि वे इस अध्याय के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए बिना किसी शर्त और स्पष्टीकरण के माफी मांगते हैं। एनसीईआरटी ने यह स्पष्ट किया कि विवादित अध्याय वाली पूरी पुस्तक को वापस ले लिया गया है और यह कहीं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। परिषद ने इस अध्याय के कारण उत्पन्न असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया और सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना की।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुनः लिखित अध्याय तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा, जब तक कि डोमेन विशेषज्ञ समिति इसकी समीक्षा नहीं कर लेती। इसके बाद, कोर्ट ने केंद्र सरकार को डोमेन विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश दिया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस विवाद ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि हमारी पाठ्यपुस्तकों में क्या सामग्री होनी चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीईआरटी ने विवादित अध्याय क्यों वापस लिया?
एनसीईआरटी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर विवादित अध्याय को वापस लिया।
विशेषज्ञ समिति में कौन-कौन सदस्य हैं?
विशेषज्ञ समिति में पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस अनिरुद्ध बोस शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुनः लिखा गया अध्याय तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा जब तक कि डोमेन विशेषज्ञ समिति इसकी समीक्षा नहीं कर लेती।
क्या एनसीईआरटी ने माफी मांगी थी?
हाँ, एनसीईआरटी ने इस अध्याय के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
कब की सुनवाई में समिति का गठन हुआ?
विशेषज्ञ समिति का गठन शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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