क्या ज्ञानेश कुमार ने जर्मन राजदूत से महत्वपूर्ण मुलाकात की? ईसीआई ने अंतर्राष्ट्रीय लोगो जारी किया
सारांश
Key Takeaways
- ज्ञानेश कुमार और डॉ. फिलिप एकरमैन की मुलाकात ने चुनावी सहयोग को बढ़ावा दिया।
- अंतर्राष्ट्रीय लोगो लोकतंत्र के मूल्यों को दर्शाता है।
- भारत की भूमिका वैश्विक लोकतंत्र में महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, ७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और इंटरनेशनल आईडीईए के चेयरपर्सन ज्ञानेश कुमार ने भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह मुलाकात बुधवार को नई दिल्ली में निर्वाचन सदन में संपन्न हुई। साथ ही, चुनाव आयोग ने एक अंतर्राष्ट्रीय लोगो भी जारी किया है।
चुनाव आयोग ने लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर भारत अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईआईसीडीईएम) का आयोजन किया। इस सम्मेलन में चुनाव आयोग ने अंतर्राष्ट्रीय लोगो को प्रस्तुत किया है। आईआईसीडीईएम की ओर से इस संबंध में एक प्रेस रिलीज भी जारी की गई है।
रिलीज में कहा गया, "आईआईसीडीईएम २०२६ का लोगो इंडिया इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट की आधिकारिक विजुअल पहचान के तौर पर डिजाइन किया गया है, जो लोकतंत्र, भागीदारी, संस्थागत अखंडता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के गहरे मूल्यों को दर्शाता है।"
लोगो में स्टाइलिश इंसानी रूप हैं, जो सुरक्षा देने वाले हाथों जैसे दिखते हैं, जो नागरिकों को लोकतंत्र की नींव और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। इस रचना के केंद्र में ग्लोब है, जो सम्मेलन के वैश्विक स्वरूप और देशों के बीच साझा ज्ञान को दर्शाता है।
भारत को केंद्र में विशेष रूप से दिखाया गया है, जो होस्ट देश, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं में एक महत्वपूर्ण योगदान देने वाले के रूप में इसकी भूमिका को दर्शाता है। सबसे ऊपर, ग्लोब का खुलापन और स्वागत करने वाला नजरिया है, जो संवाद, नवाचार और साझा ज्ञान के माध्यम से लोकतंत्र के सतत विकास को प्रदर्शित करता है।
लोगो और सभी सम्मेलन संवाद के लिए पॉपिन्स टाइपफेस को मंजूरी दी गई है, जिसे इसकी स्पष्टता, आधुनिक रूप और औपचारिक एवं संस्थागत उपयोग के लिए उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए चुना गया है।
कुल मिलाकर, आईआईसीडीईएम-२०२६ लोगो का संदेश स्पष्ट है कि लोकतंत्र लोगों से प्रेरित है, संस्थानों के सहारे मजबूत होता है और वैश्विक स्तर पर आपस में जुड़ा हुआ है। इसमें भारत केंद्र में रहते हुए एक रचनात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाता है।