हजारी प्रसाद द्विवेदी पुण्यतिथि: योगी, भजन लाल, सुक्खू समेत कई नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी साहित्य के महान आलोक-स्तंभ, पद्म भूषण से सम्मानित आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की पुण्यतिथि पर 19 मई 2026 को देशभर के नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों सहित अनेक राजनेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर द्विवेदी के साहित्यिक अवदान और भारतीय संस्कृति को नई दृष्टि देने वाले चिंतन को अविस्मरणीय बताया।
मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, 'हिंदी साहित्य के आलोक-स्तंभ, प्रख्यात साहित्यकार, 'पद्म भूषण' आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय परंपरा, इतिहास और दर्शन को आधुनिक दृष्टि से प्रस्तुत कर जनमानस को जागृत किया। उनका सृजन कार्य हमें बौद्धिकता, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ता है। ऐसे युगद्रष्टा मनीषी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।'
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने लिखा, 'हिंदी साहित्य के प्रख्यात साहित्यकार, पद्म भूषण से अलंकृत हजारी प्रसाद द्विवेदी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! हिंदी साहित्य को समृद्ध करने और भारतीय संस्कृति, इतिहास और चिंतन को नई दृष्टि प्रदान करने में उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।'
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लिखा, 'हिंदी साहित्य को अपनी गहन दृष्टि और कालजयी रचनाओं से समृद्ध करने वाले साहित्यकार पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन। हिंदी भाषा और साहित्य के विकास तथा उत्कर्ष में उनका योगदान सदैव प्रेरणादायक एवं अविस्मरणीय रहेगा।'
संसद और दलीय नेताओं की आवाज़
राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि द्विवेदी ने अपने साहित्य और चिंतन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, इतिहास और दर्शन को नई दृष्टि प्रदान कर समाज को जागृत किया। उनका अद्वितीय योगदान सदैव साहित्य जगत एवं जनमानस को प्रेरित करता रहेगा।
बिहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष संजय सरावगी ने लिखा कि द्विवेदी का साहित्य-सृजन न केवल संस्कृति और इतिहास की समझ को गहरा करता है, बल्कि राष्ट्र और समाज को सशक्त बनाने का प्रेरक मार्ग भी देता है।
आचार्य द्विवेदी का साहित्यिक योगदान
गौरतलब है कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के उन विरल मनीषियों में से थे जिन्होंने उपन्यास, निबंध, आलोचना और शोध — सभी विधाओं में अपनी अमिट छाप छोड़ी। 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'अनामदास का पोथा' और 'कबीर' जैसी रचनाएँ आज भी हिंदी साहित्य की धरोहर मानी जाती हैं। भारत सरकार ने उनकी साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में उन्हें प्रतिष्ठित पद्म भूषण से अलंकृत किया था।
यह ऐसे समय में उनकी स्मृति को राष्ट्रीय स्तर पर याद किया जा रहा है जब हिंदी भाषा और साहित्य के संरक्षण की चर्चा नीतिगत मंचों पर भी तेज़ हो रही है। विभिन्न दलों के नेताओं का एक साथ श्रद्धांजलि देना इस बात का संकेत है कि साहित्यिक विरासत आज भी राजनीतिक सीमाओं से परे सम्मान पाती है।
आगे की दिशा
द्विवेदी के साहित्य और चिंतन को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाने की परंपरा रही है। उनकी पुण्यतिथि पर इस वर्ष भी देशभर में स्मरण-सभाएँ और साहित्यिक गोष्ठियाँ आयोजित की गईं।