सरदार हरभजन सिंह के निधन पर डिप्टी सीएम चौधरी बोले — जम्मू-कश्मीर और सिख समुदाय को अपूरणीय क्षति
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सरदार हरभजन सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से नेशनल कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर और सिख समुदाय — तीनों को अपूरणीय क्षति हुई है। 12 अक्टूबर 2026 को जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए चौधरी ने एक साथ कई अहम मुद्दों पर अपना पक्ष रखा — बारिश से हुई तबाही, दिल्ली में युवाओं का विरोध-प्रदर्शन, और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री के बयान।
हरभजन सिंह: एक कद्दावर नेता को श्रद्धांजलि
चौधरी ने बताया कि सरदार हरभजन सिंह नेशनल कॉन्फ्रेंस के मज़बूत स्तंभ थे और उन्होंने डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ दशकों तक कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। सिख समुदाय में उनकी विशिष्ट पहचान और सम्मान था। उन्होंने कहा, 'मैं 1996 और 2002 के चुनावों के दौरान उनके साथ रहा था — कुछ दिन पहले ही हमारी मुलाकात हुई थी। उनके निधन की खबर से मुझे गहरा दुख पहुँचा।' चौधरी के अनुसार हरभजन सिंह की सियासी विरासत और सामाजिक योगदान को आसानी से भुलाया नहीं जा सकता।
बारिश से तबाही: सड़कें, पुल, मकान — व्यापक नुकसान
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अक्टूबर में इस स्तर की वर्षा अप्रत्याशित थी। भारी बारिश के कारण जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में सड़कें, गलियाँ और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा मकानों और घरेलू सामान को भी नुकसान पहुँचा है। एक मर्मांतक घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक नवविवाहित महिला बाढ़ के पानी में बह गई और तलाश के बावजूद उसका शव नहीं मिला है।
चौधरी ने ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को इस अनियमित मौसम का कारण बताया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग नुकसान का सर्वे कर रहे हैं और सरकार क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता से दुरुस्त करने का प्रयास करेगी। इसके अलावा उन्होंने पिछली बाढ़ से प्रभावित राजौरी-पुंछ के लोगों के पुनर्वास और मुआवज़े में हो रही देरी पर भी चिंता जताई।
दिल्ली प्रदर्शन: युवाओं की मांगें सुनें, दमन नहीं
दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन और इंडिया ब्लॉक के समर्थन के संदर्भ में चौधरी ने स्पष्ट कहा कि सरकार को युवाओं की बात सुनकर संवाद के ज़रिए हल निकालना चाहिए। उन्होंने रोज़गार की कमी से जूझ रहे नौजवानों की पीड़ा को रेखांकित किया और कथित पुलिस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई।
चौधरी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को नाम देने, हिरासत में लेने या लाठीचार्ज से उनकी समस्याएँ हल नहीं होंगी। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की ज़रूरत बताई और युवाओं के साथ कथित ज़्यादती करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की।
राज्य का दर्जा: आश्वासन बाकी, अमल कब?
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की उम्मीद जताई थी — चौधरी ने संयमित लेकिन सीधी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री इस संबंध में पहले भी आश्वासन दे चुके हैं, परंतु अब तक वह वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दिल्ली की सरकार अन्य मंत्रियों के बयानों को कितनी गंभीरता से लेती है, यह उन्हें ज्ञात नहीं।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन के बाद से राज्य के दर्जे की माँग एक बार फिर तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि 2019 में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य के दर्जे से वंचित कर केंद्रशासित प्रदेश में बदला गया था, और तब से राज्य की पुनर्बहाली की माँग लगातार उठती रही है।