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क्या उत्तर प्रदेश भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है?

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क्या उत्तर प्रदेश भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है?

सारांश

उत्तर प्रदेश को देश का हृदय प्रदेश बताते हुए हरिवंश ने इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि न केवल भारत की आत्मा को प्रदर्शित करती है, बल्कि इसे समझे बिना भारत की यात्रा अधूरी है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर का महत्व काशी, प्रयागराज, अयोध्या जैसे स्थलों का योगदान महिला जनप्रतिनिधियों के लिए आदर्श संविधानिक संवाद का मंच भारतीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता

लखनऊ, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने उत्तर प्रदेश को देश का हृदय प्रदेश बताते हुए कहा कि यह भूमि इतिहास, सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म की पावन धरोहर से समृद्ध रही है। काशी, प्रयागराज, अयोध्या, नैमिषारण्य, चित्रकूट और सारनाथ जैसे पवित्र स्थलों ने युगों से भारत की सांस्कृतिक चेतना को दिशा दी है और राष्ट्रीय अस्मिता को सुदृढ़ किया है।

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपसभापति ने कहा कि उत्तर प्रदेश की गौरवशाली पहचान को दर्शाने वाला संदेश “यूपी नहीं देखा तो इंडिया नहीं देखा” प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रतिबिंबित करता है। यह स्लोगन न केवल उत्तर प्रदेश के वैभव को रेखांकित करता है, बल्कि भारत की आत्मा से उसके गहरे संबंध को भी दर्शाता है।

उपसभापति ने राज्यपाल के सार्वजनिक जीवन की सराहना करते हुए कहा कि उनका दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, शांत स्वभाव और दृढ़ विश्वास हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। विशेष रूप से जमीनी स्तर पर कार्य कर रही महिला जनप्रतिनिधियों के लिए वह एक आदर्श और प्रभावी रोल मॉडल के रूप में स्थापित हैं।

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन पीठासीन अधिकारियों के बीच जीवंत संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान का सशक्त मंच है। यद्यपि यह आयोजन वर्ष में एक बार होता है, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से हाल के वर्षों में संसदीय विषयों पर निर्णय, संवाद और विचार-विमर्श के निरंतर एवं व्यापक अवसर सृजित हुए हैं।

सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत और समग्र विकास पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। साथ ही “उत्तर प्रदेश विधान सभा की संसदीय पद्धति और प्रक्रिया” पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसे संसदीय मर्यादाओं और विधायी प्रक्रियाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बताया गया।

उपसभापति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन भारतीय संसदीय लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़, संवेदनशील और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा राज्यों के बीच समन्वय और लोकतांत्रिक मूल्यों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भूमि अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का गहना है, जो हमारी पहचान को गहराई प्रदान करते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
उत्तर प्रदेश का सांस्कृतिक महत्व इसके ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक धरोहरों में निहित है।
हरिवंश ने उत्तर प्रदेश के बारे में क्या कहा?
हरिवंश ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का हृदय प्रदेश है और इसकी पहचान भारत की आत्मा से जुड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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