न्यायपालिका का सम्मान लोकतंत्र की बुनियाद, घुसपैठियों को देश से निकालना ज़रूरी: NCM चेयरमैन हरजीत ग्रेवाल
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के चेयरमैन हरजीत सिंह ग्रेवाल ने 26 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठ-विरोधी बयान और पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर खुलकर बात की। ग्रेवाल ने न्यायपालिका के सम्मान को लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त बताते हुए पंजाब की भगवंत मान सरकार के दावों पर भी गंभीर सवाल उठाए।
न्यायपालिका की गरिमा पर ग्रेवाल का रुख
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर ओवैसी की सार्वजनिक टिप्पणी को लेकर हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि देश के हर नागरिक की यह अपेक्षा है कि अदालतों का सम्मान बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी फैसले से असहमति होने पर कानून में अपील का स्पष्ट रास्ता उपलब्ध है और उसी मार्ग से आगे बढ़ना उचित है। उनके अनुसार, न्यायपालिका की गरिमा को सार्वजनिक रूप से चुनौती देना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
घुसपैठ पर अमित शाह के बयान का समर्थन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अवैध घुसपैठ पर दिए गए कड़े बयान का समर्थन करते हुए ग्रेवाल ने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और अवैध घुसपैठियों को किसी भी स्थिति में देश में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री की ओर से इस विषय पर सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है, तो उस पर गंभीरता से अमल होना चाहिए। ग्रेवाल के मुताबिक, घुसपैठ को रोकना सीधे तौर पर राष्ट्रहित से जुड़ा मामला है।
पंजाब के सरकारी स्कूलों पर सवाल
पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर ग्रेवाल ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पुरानी इमारतों की केवल मरम्मत या रंग-रोगन कर उन्हें बेहतर स्कूलों के रूप में पेश करना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों और ज़मीनी वास्तविकता के बीच की खाई को पाटना सरकार की असली जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि स्कूलों में वास्तविक सुधार हो रहा है, तो यह स्वागतयोग्य है, लेकिन सरकार को इसे आँकड़ों और पारदर्शिता के साथ साबित करना होगा।
भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर तीखे सवाल
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के भ्रष्टाचार-मुक्त पंजाब के दावों पर ग्रेवाल ने कहा कि जमीनी स्थिति का आकलन जनता खुद कर सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य में गैंगस्टरों और कथित वसूली की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं, जो सरकार के शांतिपूर्ण माहौल के दावों से मेल नहीं खातीं। उनके अनुसार, केवल बयानबाजी से कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी से जुड़े कथित ₹5 करोड़ के आरोपों पर ग्रेवाल ने कहा कि ये आरोप किसी सामान्य व्यक्ति ने नहीं, बल्कि एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता प्यारे लाल गर्ग और अन्य लोगों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। ऐसे गंभीर आरोपों के मद्देनज़र मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वे सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करें।
सरकार को रचनात्मक आलोचना स्वीकार करनी चाहिए
ग्रेवाल ने पंजाब सरकार को सलाह दी कि आलोचना को केवल राजनीतिक विरोध के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार, रचनात्मक आलोचना का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना होता है और सरकार को कमियाँ बताने वालों का जवाब देने के बजाय उन कमियों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं — शीर्ष स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि पंजाब सरकार इन सवालों का जवाब कार्रवाई से देती है या केवल बयानों से।