26 अगस्त 2026
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केरल तट पर 'कल्लाक्कडल' का खतरा: 27 अगस्त को 1.5 मीटर ऊंची लहरें, तिरुवनंतपुरम-कोल्लम-अलाप्पुझा में अलर्ट

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केरल तट पर 'कल्लाक्कडल' का खतरा: 27 अगस्त को 1.5 मीटर ऊंची लहरें, तिरुवनंतपुरम-कोल्लम-अलाप्पुझा में अलर्ट

सारांश

केरल के दक्षिणी तट पर 'कल्लाक्कडल' का खतरा मंडरा रहा है। INCOIS ने 27 अगस्त को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलाप्पुझा और कन्याकुमारी तटों पर 1.5 मीटर तक ऊंची लहरों की चेतावनी दी है। मछुआरों को समुद्र में न जाने और तटवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य बातें

INCOIS ने 27 अगस्त 2026 को केरल के दक्षिणी तट पर 'कल्लाक्कडल' घटना के चलते उच्च लहर चेतावनी जारी की।
तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और अलाप्पुझा तटों पर 0.9 से 1.2 मीटर ऊंची लहरें सुबह 8:30 बजे से रात 11:30 बजे IST के बीच अनुमानित।
कन्याकुमारी तट पर स्थिति सबसे गंभीर — 1.1 से 1.5 मीटर ऊंची लहरें तड़के 2:30 बजे से रात 11:30 बजे तक।
मछुआरों को समुद्र में नाव उतारने और किनारे लाने दोनों से मना किया गया; नावें बंदरगाहों पर सुरक्षित खड़ी करने के निर्देश।
तटीय निवासियों को स्थानीय अधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षित स्थानों पर जाने और समुद्र तट पर सभी गतिविधियाँ बंद रखने की सलाह।

केरल के दक्षिणी समुद्री तट पर 26 अगस्त 2026 को अधिकारियों ने 'कल्लाक्कडल' घटना के चलते मछुआरों और तटवासियों के लिए सतर्कता अलर्ट जारी किया है। नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) के अनुमान के अनुसार 27 अगस्त को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और अलाप्पुझा के तटों पर 0.9 से 1.2 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, जबकि कन्याकुमारी तट पर स्थिति और गंभीर होने की आशंका है जहाँ लहरें 1.1 से 1.5 मीटर तक पहुँच सकती हैं।

कल्लाक्कडल क्या है और यह क्यों खतरनाक है

कल्लाक्कडल एक मलयालम शब्द है, जिसका अर्थ है समुद्र में अचानक उठने वाली लहरें या तटीय इलाकों में अचानक पानी भर जाना। यह घटना दूर के मौसम तंत्रों से उत्पन्न शक्तिशाली महासागरीय लहरों (ओशन स्वेल) के कारण होती है, जो हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके तट तक पहुँचती हैं।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्थानीय स्तर पर कोई तूफान या चक्रवात न होने के बावजूद समुद्र का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और निचले तटीय इलाकों में पानी भर जाता है। यही कारण है कि यह घटना अक्सर बिना किसी पूर्व दृश्य चेतावनी के लोगों को अचानक चपेट में ले लेती है।

प्रभावित क्षेत्र और समय-सीमा

INCOIS की चेतावनी के अनुसार 27 अगस्त को सुबह 8:30 बजे से रात 11:30 बजे IST के बीच निम्नलिखित क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हो सकते हैं:

तिरुवनंतपुरम में कप्पिल से पोझियूर तक, कोल्लम में अलाप्पाड से एडवा तक, और अलाप्पुझा में चेलानम से अझिक्कल जेटी तक के तटीय क्षेत्रों में 0.9 से 1.2 मीटर ऊंची लहरें अनुमानित हैं।

कन्याकुमारी तट पर स्थिति अधिक गंभीर रहने की संभावना है, जहाँ गुरुवार तड़के 2:30 बजे से रात 11:30 बजे के बीच 1.1 से 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं। तटीय कटाव और जलभराव की आशंका को देखते हुए जोखिम वाले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

मछुआरों के लिए विशेष निर्देश

अधिकारियों ने मछुआरों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक लहरें तेज हों, वे छोटी नावें और मछली पकड़ने वाली नावें न तो समुद्र में उतारें और न ही उन्हें किनारे पर लाएं, क्योंकि दोनों परिस्थितियों में गंभीर जोखिम है।

मछली पकड़ने वाली नावों को बंदरगाहों पर सुरक्षित रूप से खड़ा किया जाना चाहिए और नावों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखी जाए, ताकि आपसी टकराव और मछली पकड़ने के उपकरणों को नुकसान से बचाया जा सके।

आम जनता और पर्यटकों के लिए सलाह

अधिकारियों ने आम नागरिकों और पर्यटकों को समुद्र तटों से दूर रहने और INCOIS की चेतावनी वापस लिए जाने तक समुद्र से जुड़ी सभी मनोरंजक गतिविधियों से बचने की सलाह दी है। चेतावनी की अवधि के दौरान बीच पर्यटन और किनारे के पास अन्य गतिविधियाँ रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से आग्रह किया गया है कि वे समुद्री जलस्तर के अचानक बढ़ने और तटीय कटाव को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहें। स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए ज़रूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाएं।

आगे क्या

INCOIS की चेतावनी 27 अगस्त की रात 11:30 बजे तक प्रभावी है। अधिकारियों ने स्थिति पर निगरानी जारी रखी है और समुद्री परिस्थितियों में बदलाव के अनुसार अपडेट जारी किए जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब केरल का दक्षिणी तट मानसून के सक्रिय चरण में है और समुद्री गतिविधियाँ पहले से ही सतर्कता की माँग करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केरल के मछुआरा समुदायों में इसके प्रति जागरूकता अभी भी असमान है — जबकि यह घटना बिना किसी स्थानीय तूफान के अचानक जानलेवा हो सकती है। INCOIS की पूर्व-चेतावनी प्रणाली तकनीकी रूप से सक्षम है, पर असली सवाल यह है कि यह जानकारी अंतिम मछुआरे तक कितनी तेज़ी से और किस भाषा में पहुँचती है। तटीय कटाव की दीर्घकालिक समस्या इन घटनाओं को और विकराल बनाती जा रही है, जिस पर नीतिगत ध्यान अभी भी पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'कल्लाक्कडल' क्या होता है और यह केरल को क्यों प्रभावित करता है?
'कल्लाक्कडल' एक मलयालम शब्द है जिसका अर्थ है समुद्र में अचानक उठने वाली लहरें जो दूर के मौसम तंत्रों से उत्पन्न महासागरीय स्वेल के कारण तट पर पानी भर देती हैं। स्थानीय तूफान न होने के बावजूद यह घटना निचले तटीय इलाकों को अचानक जलमग्न कर सकती है, इसीलिए केरल का दक्षिणी तट इसके प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है।
27 अगस्त को केरल के किन इलाकों में सबसे ज़्यादा खतरा है?
कन्याकुमारी तट पर सबसे गंभीर स्थिति रहने की आशंका है जहाँ 1.1 से 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं। इसके अलावा तिरुवनंतपुरम में कप्पिल से पोझियूर, कोल्लम में अलाप्पाड से एडवा और अलाप्पुझा में चेलानम से अझिक्कल जेटी तक के क्षेत्र भी प्रभावित होंगे।
मछुआरों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
मछुआरों को 27 अगस्त को चेतावनी अवधि के दौरान छोटी नावें और मछली पकड़ने वाली नावें न तो समुद्र में उतारनी चाहिए और न ही किनारे पर लानी चाहिए। सभी नावों को बंदरगाहों पर सुरक्षित रूप से खड़ा करना चाहिए और नावों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखनी चाहिए।
INCOIS की चेतावनी कब तक प्रभावी है?
INCOIS की चेतावनी 27 अगस्त की रात 11:30 बजे IST तक प्रभावी है। अधिकारियों ने कहा है कि समुद्री परिस्थितियों के अनुसार अपडेट जारी किए जाते रहेंगे और चेतावनी वापस लिए जाने तक सभी सावधानियाँ बरती जानी चाहिए।
तटीय निवासी और पर्यटक क्या सावधानियाँ बरतें?
तटीय निवासियों को स्थानीय अधिकारियों के निर्देश पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाना चाहिए और समुद्री जलस्तर के अचानक बढ़ने पर सतर्क रहना चाहिए। पर्यटकों को समुद्र तट पर जाने, तैराकी और अन्य सभी मनोरंजक गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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