14 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हिमाचल में नए जिलों के लिए आयोग गठित, रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी करेंगे अध्यक्षता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हिमाचल में नए जिलों के लिए आयोग गठित, रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी करेंगे अध्यक्षता

सारांश

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 14 अक्टूबर को प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय आयोग गठित किया। देहरा गोपीपुर, नूरपुर, पालमपुर समेत कई क्षेत्रों की जिला दर्जे की पुरानी माँग पर आयोग 6 महीने में रिपोर्ट देगा।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग गठित किया।
आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी (पूर्व न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट) करेंगे।
आयोग में एडवोकेट विशाल पंवार , सेवानिवृत्त आईएफएस राजेश शर्मा सदस्य और निदेशक भू-अभिलेख सदस्य सचिव हैं।
आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा और अंतिम रिपोर्ट 6 महीने के भीतर सौंपनी होगी।
देहरा गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और अनी समेत कई क्षेत्रों से जिला दर्जे की माँग लंबे समय से उठ रही है।
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 12 जिले हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह आयोग प्रदेश के 12 मौजूदा जिलों सहित उप-मंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की व्यापक समीक्षा करेगा। लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में उठ रही नए जिले बनाने की मांग के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है।

आयोग की संरचना और मुख्यालय

जारी अधिसूचना के अनुसार आयोग में एडवोकेट विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। निदेशक भू-अभिलेख को आयोग का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। आयोग का मुख्यालय शिमला में रहेगा।

आयोग के सुचारु संचालन के लिए राजस्व विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आवश्यक अभिलेख, मानचित्र, आँकड़े और कर्मचारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि आयोग को साक्ष्य-आधारित सिफारिशें तैयार करने में कोई बाधा न आए।

समीक्षा के मुख्य बिंदु

आयोग को यह आकलन करना होगा कि कहाँ नए जिले, उप-मंडल या तहसीलें बनाना आवश्यक है और कहाँ मौजूदा इकाइयों को विभाजित या विलय करने की ज़रूरत है। अधिसूचना में उल्लेख है कि सिफारिशें तैयार करते समय जनसंख्या घनत्व, कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, आम जनता की प्रशासन तक पहुँच और प्रशासनिक सुविधा को प्रमुखता दी जाएगी।

इसके अतिरिक्त, आयोग को नई प्रशासनिक इकाइयाँ बनाने से उत्पन्न होने वाले वित्तीय बोझ का भी मूल्यांकन करना होगा और यह सुझाव देना होगा कि न्यूनतम व्यय में प्रशासनिक तंत्र को अधिक प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है।

किन क्षेत्रों से उठ रही है माँग

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 12 जिले हैं। देहरा गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और अनी जैसे क्षेत्रों से लंबे समय से जिला दर्जे की माँग उठती रही है। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि पहाड़ी भूगोल के कारण जिला मुख्यालय तक पहुँचना अत्यंत कठिन और समयसाध्य है, जिससे सरकारी कामकाज में अनावश्यक विलंब होता है।

यह ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी राज्यों में भी प्रशासनिक पुनर्गठन की बहस तेज हुई है और छोटे जिलों को बेहतर शासन का माध्यम माना जाने लगा है।

आयोग के लिए तय समय-सीमा

राज्य सरकार ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का समय निर्धारित किया है। इस अवधि के भीतर आयोग को विस्तृत समीक्षा पूरी कर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी होंगी।

आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी कि कौन-से नए जिले या प्रशासनिक इकाइयाँ गठित की जाएंगी — यह फैसला हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक संरचना को दशकों बाद नया आकार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार उस पर कार्रवाई करती है या नहीं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि नए जिले बनाने की वित्तीय लागत और प्रशासनिक क्षमता का मूल्यांकन आयोग के जनादेश में शामिल है — यानी सरकार ने 'हाँ' कहने से पहले खुद के लिए 'बचने का रास्ता' भी रखा है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के लिए गठित आयोग क्या है?
यह हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 14 अक्टूबर 2026 को गठित चार सदस्यीय आयोग है, जो प्रदेश की मौजूदा प्रशासनिक इकाइयों — जिलों, उप-मंडलों, तहसीलों और विकास खंडों — की समीक्षा कर नए जिले या इकाइयाँ बनाने की सिफारिश करेगा। इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी करेंगे।
आयोग अपनी रिपोर्ट कब तक सौंपेगा?
सरकार ने आयोग को अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने की समय-सीमा निर्धारित की है। इस अवधि के भीतर आयोग को अपनी समीक्षा पूरी कर सिफारिशें राज्य सरकार को देनी होंगी।
हिमाचल में किन क्षेत्रों से नए जिले बनाने की माँग है?
देहरा गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और अनी प्रमुख क्षेत्र हैं जहाँ से जिला दर्जे की माँग लंबे समय से उठ रही है। इन क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि पहाड़ी भूगोल के कारण जिला मुख्यालय तक पहुँचना कठिन और समयसाध्य है।
आयोग सिफारिशें देते समय किन बातों का ध्यान रखेगा?
आयोग जनसंख्या, कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, आम जनता की प्रशासन तक पहुँच, प्रशासनिक सुविधा और नई इकाइयाँ बनाने से सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को ध्यान में रखेगा। लक्ष्य न्यूनतम खर्च में अधिकतम प्रशासनिक प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है।
हिमाचल प्रदेश में अभी कितने जिले हैं?
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 12 जिले हैं। आयोग की सिफारिशों के आधार पर यह संख्या बढ़ सकती है, हालाँकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार का होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले