जीएसटी काउंसिल सुधारों का हिमाचल प्रदेश ने किया स्वागत, राजस्व सुरक्षा और एपीआई टैक्स कटौती पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 को जीएसटी काउंसिल द्वारा प्रस्तावित सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि इन उपायों से टैक्स प्रणाली करदाताओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनेगी और अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी। साथ ही राज्य ने राजस्व सुरक्षा और फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण माँगें भी काउंसिल के समक्ष रखीं।
मुख्य घटनाक्रम
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, आकलन, निर्णय और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित सुधार प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने छोटे करदाताओं को राहत देने वाले प्रस्तावों के साथ-साथ डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट और सीएसडी कैंटीन से जुड़े उपायों का भी समर्थन किया। राज्य-विशेष मुद्दे के रूप में टोल वसूली अधिकारों की लीज पर भी विचार-विमर्श हुआ और राज्य के टोल संग्रह प्रणाली से संबंधित प्रस्तावित जीएसटी छूट का स्वागत किया गया।
राजस्व सुरक्षा पर राज्य का रुख
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जीएसटी लागू होने से राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव के बदले पूर्ण मुआवजे की माँग फिर से दोहराई। राज्य का तर्क है कि पाँच वर्षों तक प्रतिवर्ष 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी सुनिश्चित कर राज्य राजस्व की रक्षा होनी चाहिए।
इसके साथ ही सरकार ने माँग की कि राजस्व सुरक्षा तब तक जारी रहे जब तक राज्य का वास्तविक राजस्व पाँचवें वर्ष के लिए निर्धारित संरक्षित राजस्व स्तर तक न पहुँच जाए। गौरतलब है कि पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक स्थिति और सीमित राजस्व आधार को देखते हुए यह माँग दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन के लिहाज़ से अहम मानी जाती है।
पहाड़ी राज्यों के लिए मंत्री समूह का प्रस्ताव
हिमाचल प्रदेश ने पहाड़ी राज्यों पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) के गठन का प्रस्ताव पुनः प्रस्तुत किया, ताकि इन राज्यों की विशेष चिंताओं और आवश्यकताओं को जीएसटी ढाँचे में उचित स्थान मिल सके। यह ऐसे समय में आया है जब कई पर्वतीय राज्य लंबे समय से जीएसटी परिषद में अपने विशिष्ट आर्थिक परिदृश्य को मान्यता दिलाने की कोशिश करते रहे हैं।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र की माँग
राज्य ने एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) पर कर दर घटाकर फार्मास्युटिकल क्षेत्र में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को दुरुस्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार के अनुसार इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट के संचय और उससे जुड़े रिफंड दावों में कमी आएगी, साथ ही घरेलू एपीआई विनिर्माण और फार्मास्युटिकल उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा।
अनुपालन और प्रवर्तन में संतुलन पर जोर
हिमाचल प्रदेश सरकार ने ईमानदार करदाताओं के लिए अनुपालन सरल बनाने वाले उपायों का समर्थन करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे प्रस्तावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा होनी चाहिए जिनसे कर प्रवर्तन में शिथिलता, धोखाधड़ी को प्रोत्साहन या वैध राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो। सरकार का मानना है कि करदाता सुविधा और राजस्व सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। जीएसटी सुधारों की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और राज्य सरकारों की प्रतिक्रियाएँ अंतिम नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।