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हिंद-प्रशांत क्षेत्र: वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई दिशा - जोसेल इग्नासियो

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हिंद-प्रशांत क्षेत्र: वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई दिशा - जोसेल इग्नासियो

सारांश

इस गोलमेज सम्मेलन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और आसियान के बीच सहयोग को सशक्त बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। यह क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जानें इस सम्मेलन की मुख्य बातें और नेताओं के विचार।

मुख्य बातें

हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है।
भारत और आसियान के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
संवाद को प्रतिस्पर्धा पर प्राथमिकता दी जा रही है।
आसियान की केंद्रीय भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया।
प्रधानमंत्री मोदी के विचारों का महत्व।

नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। "इंडो-पैसिफिक महासागरीय पहल (आईपीओआई) और इंडो-पैसिफिक पर आसियान का दृष्टिकोण (एओआईपी) का समन्वय: एक परिचालन ढांचा स्थापित करना" विषय पर एक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया।

यह गोलमेज सम्मेलन विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली में आसियान-भारत केंद्र द्वारा आयोजित किया गया। इसमें आईपीओआई और एओआईपी के बीच सहयोग पर चर्चा की जाएगी और भारत-आसियान के समुद्री सहयोग को सशक्त बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा।

उद्घाटन सत्र में प्रमुख वक्ताओं में महानिदेशक (आरआईएस) प्रो. सचिन कुमार शर्मा, आसियान-भारत केंद्र के समन्वयक डॉ. पंकज वशिष्ठ, जोसेल एफ. इग्नासियो, भारत में फिलीपींस के राजदूत और संयुक्त सचिव (इंडो-पैसिफिक) विश्वेश नेगी शामिल थे। प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक प्रमुख संगठन) और भारत के सहयोग पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

जोसेल एफ. इग्नासियो ने कहा, "आसियान और भारत के बीच सहयोग हमेशा से एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रेरक शक्ति है। यहाँ का समुद्र समुद्री सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र की प्रतिक्रिया भू-राजनीतिक स्थिति के लिए निर्णायक होगी। हम तनाव के बीच संवाद को बढ़ावा देंगे, जिसमें आसियान की केंद्रीय भूमिका महत्वपूर्ण है। एओआईपी और आईपीओआई के बीच कई समानताएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर में कहा था कि राष्ट्रों को एकजुट होना चाहिए, जो अत्यंत आवश्यक है। हमने एमएसएमई में वृद्धि और डिजिटलीकरण व एआई में भी प्रगति देखी है।"

विश्वेश नेगी ने अपने भाषण में कहा, "भारत सरकार आसियान और इंडो-पैसिफिक देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने समुद्री सुरक्षा और सहयोग पर काम किया है। वर्तमान वैश्विक स्थिति के बीच, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की अपनी चुनौतियां हैं। वे 'सागर' और 'महासागर' की अवधारणाओं पर बात कर रहे हैं। एक्ट ईस्ट नीति सबसे महत्वपूर्ण नीति रही है। आईपीओआई और एओआईपी के बीच गहरे संबंध हैं। अगर आसियान मजबूत रहेगा तो इंडो-पैसिफिक भी मजबूती से आगे बढ़ेगा। यहाँ प्रतिस्पर्धा की तुलना में संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडो-पैसिफिक महासागरीय पहल का उद्देश्य क्या है?
इंडो-पैसिफिक महासागरीय पहल का उद्देश्य भारत और आसियान के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करना है।
यह गोलमेज सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित हुआ?
यह गोलमेज सम्मेलन 14 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख व्यक्ति शामिल हुए?
इस सम्मेलन में प्रो. सचिन कुमार शर्मा, डॉ. पंकज वशिष्ठ, जोसेल एफ. इग्नासियो और विश्वेश नेगी जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल हुए।
आसियान और भारत के बीच सहयोग का महत्व क्या है?
आसियान और भारत के बीच सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण है।
इस सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
सम्मेलन में आईपीओआई और एओआईपी के बीच तालमेल और समुद्री सहयोग को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की गई।
राष्ट्र प्रेस
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