क्या जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने 'द अनबीकमिंग' का विमोचन किया?
सारांश
Key Takeaways
- आत्म-खोज की यात्रा पर आधारित है 'द अनबीकमिंग'
- पुस्तक का नायक एक क्रिकेटर है
- सच्ची उत्कृष्टता का संगम स्थिरता और कर्म में है
- जटिल विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है
- आंतरिक शक्ति का अहसास इंद्रियों से परे देखने में है
जयपुर, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) में शिरकत की, जहां उन्होंने अपने दामाद वकील कार्तिकेय वाजपेयी द्वारा लिखित पुस्तक 'द अनबीकमिंग' का औपचारिक विमोचन किया।
यह समारोह होटल क्लार्क्स अमेर में जेएलएफ के निर्माता संजय के. रॉय और वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
सत्र में कार्तिकेय वाजपेयी ने 'द अनबीकमिंग' को आत्म-खोज की एक आंतरिक यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अपने भीतर झांकने की प्रेरणा देती है। प्रत्येक व्यक्ति में अपार शक्ति और अनगिनत क्षमताएं होती हैं।
इस उपन्यास का नायक एक क्रिकेटर है, जो अपनी ब्रह्मांडीय ऊर्जा की खोज में व्यस्त है।
कार्तिकेय ने बताया कि सच्ची उत्कृष्टता तब प्रकट होती है जब स्थिरता और कर्म का संगम होता है। उन्होंने कहा कि जब ये दोनों एक साथ आते हैं, तो परिणाम असाधारण होता है।
अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि 11 वर्ष की आयु से ही वे जीवन के दबावों के बीच खुद को सृजित करने के तरीकों पर विचार करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम अक्सर अपने अस्तित्व को बनाए रखने की चिंता में बड़े होते हैं, बिना यह समझे कि हम असल में कौन हैं।
उन्होंने बताया कि आंतरिक शक्ति का अहसास तभी होता है जब व्यक्ति अपनी इंद्रियों से परे देखता है। ध्यान को लेकर उन्होंने कहा कि यह कोई क्रिया नहीं है, बल्कि तब होता है जब इंद्रियां शांत और स्थिर होती हैं। उन्होंने 'रेस्ट इन एक्शन' नामक पुस्तक के एक अध्याय का उल्लेख किया, जो स्थिरता और गति की एकता की खोज करता है।
वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया ने इस पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि जटिल विषयों के बावजूद, 'द अनबीकमिंग' को सरल और सहज भाषा में लिखा गया है।
उन्होंने आगे कहा कि जेनजी दृष्टिकोण से जीवन भ्रम से एकांत की ओर एक यात्रा है। उन्होंने यह भी कहा कि अहंकार ही मानवता की सबसे बड़ी बाधा है। उनके अनुसार, क्रिकेट की पृष्ठभूमि ईमानदारी, आत्म-श्रवण, और आंतरिक संवाद जैसे गहन विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।
जेएलएफ में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की महत्ता को और भी बढ़ा दिया।