दुर्गा पूजा 2026: पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में षष्ठी से विजया दशमी तक शुष्क मौसम का अनुमान — IMD
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 16 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों — असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा — में षष्ठी (बोधन) से लेकर विजया दशमी (21 अक्टूबर) तक दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान मौसम शुष्क और बारिश रहित रहने की प्रबल संभावना है। IMD के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह पूर्वानुमान करोड़ों श्रद्धालुओं और उत्सव-प्रेमियों के लिए बड़ी राहत की खबर है।
तापमान और मौसम का पूर्वानुमान
IMD के अनुसार अगले पाँच दिनों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान इसी अवधि में सामान्य के आसपास बने रहने का अनुमान है। हालाँकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
उत्सव पर असर
पाँच दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव शुक्रवार, 17 अक्टूबर से विधिवत रूप से आरंभ हो चुका है। गुवाहाटी, अगरतला समेत पूर्वोत्तर के तमाम शहरों में रंगारंग सजावट और भव्य पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मौसम के शुष्क रहने के अनुमान से पंडालों में आने वाले दर्शकों और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों को खासी राहत मिलेगी, क्योंकि बारिश अक्सर इस क्षेत्र के उत्सवों में व्यवधान डालती रही है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी
IMD के अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 अक्टूबर 2026 तक पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों से पूरी तरह वापस लौट चुका है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2025 में मानसून 14 अक्टूबर को इस क्षेत्र से विदा हुआ था — यानी इस बार वापसी एक दिन विलंबित रही।
इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून 7 जून को पूर्वोत्तर क्षेत्र के बड़े हिस्से में प्रवेश कर गया था, जो इसकी सामान्य शुरुआत की तारीख से दो दिन बाद था। 10 जून तक मानसून ने पूरे पूर्वोत्तर को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे चार माह की वर्षा ऋतु का आरंभ हुआ।
मानसून सीजन में वर्षा की कमी
IMD के आँकड़ों के अनुसार, जून से सितंबर तक चलने वाली मानसून अवधि के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र में औसत वर्षा में 26 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। यह कमी तब आई जबकि मानसून ने समय पर पूरे क्षेत्र को कवर किया था — जो दर्शाता है कि कवरेज की समयसीमा और वास्तविक वर्षा की मात्रा के बीच हमेशा सीधा संबंध नहीं होता।
आगे क्या
IMD के अनुसार नवंबर के उत्तरार्ध में शीत ऋतु का असर महसूस होने लगेगा। तब तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की उम्मीद है। मानसून की विदाई के साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र अब सर्दियों की ओर क्रमिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है।