1 अक्टूबर 2026
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पूर्वोत्तर भारत में 1901 के बाद सबसे कमज़ोर मानसून, 125 साल का रिकॉर्ड टूटा: IMD

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पूर्वोत्तर भारत में 1901 के बाद सबसे कमज़ोर मानसून, 125 साल का रिकॉर्ड टूटा: IMD

सारांश

पूर्वोत्तर भारत के लिए 2026 का मानसून 125 साल की सबसे बड़ी विफलता बनकर आया — जून से सितंबर के बीच मात्र 1,017.1 मिमी वर्षा, और सितंबर सामान्य से 0.74 डिग्री अधिक गर्म। देश के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र में इस असाधारण शुष्कता ने कृषि और जल संसाधनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

IMD के अनुसार 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर भारत में 1901 के बाद से सबसे कमज़ोर रहा — 125 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा।
जून-सितंबर में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कुल 1,017.1 मिमी वर्षा दर्ज, जो ऐतिहासिक औसत से काफी कम है।
असम , मेघालय और अरुणाचल प्रदेश — तीनों सब-डिवीजन में मानसून के सभी चार महीने सामान्य से कम बारिश वाले रहे।
राष्ट्रीय स्तर पर 759.4 मिमी वर्षा, जिससे 2026 का मानसून 1901 के बाद 13वाँ और 2001 के बाद चौथा सबसे सूखा सीज़न बना।
सितंबर में पूर्वी-पूर्वोत्तर भारत का औसत तापमान 27.95°C रहा — सामान्य से 0.74 डिग्री अधिक , 1901 के बाद छठा सबसे गर्म सितंबर ।
IMD का अक्टूबर 2026 पूर्वानुमान: देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा; पूर्वोत्तर में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रहने की संभावना।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 अक्टूबर 2026 को घोषित किया कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सीज़न पूर्वोत्तर भारत में 1901 के बाद से सबसे कमज़ोर रहा — यानी पूरे 125 वर्षों के आधिकारिक रिकॉर्ड में पहली बार इतनी कम बारिश दर्ज की गई। जून से सितंबर के बीच पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कुल मिलाकर मात्र 1,017.1 मिमी वर्षा हुई, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक औसत से गंभीर रूप से कम है।

मुख्य घटनाक्रम

असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश — तीनों मौसम संबंधी सब-डिवीजन में मानसून के चारों महीनों — जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर — में लगातार कम वर्षा दर्ज की गई। IMD के आकलन के अनुसार, सितंबर के अंतिम सप्ताह में असम में भारी से अति-भारी वर्षा के कुछ दौर आए, लेकिन वे पूरे सीज़न की संचित कमी को पाटने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत परंपरागत रूप से देश के सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। चेरापूंजी और मासिनराम जैसे स्थान विश्व में सर्वाधिक वर्षा के लिए जाने जाते हैं — ऐसे में इस असामान्य शुष्कता ने मौसम विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है।

राष्ट्रीय परिदृश्य

राष्ट्रीय स्तर पर भी मानसून सीज़न निराशाजनक रहा। देशभर में जून से सितंबर के बीच 759.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। IMD के अनुसार, 2026 का मानसून सीज़न 1901 के बाद से 13वाँ सबसे कम वर्षा वाला और 2001 के बाद से चौथा सबसे कम वर्षा वाला सीज़न बन गया। हालाँकि, पूर्वोत्तर की स्थिति राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक गंभीर रही।

तापमान पर असर

बारिश की कमी के साथ-साथ सितंबर 2026 में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में असामान्य गर्मी भी दर्ज की गई। इस क्षेत्र का औसत तापमान 27.95 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.74 डिग्री अधिक था। IMD के आँकड़ों के अनुसार, यह 1901 के बाद से इस क्षेत्र के लिए सितंबर का छठा सबसे गर्म महीना था।

आम जनता और कृषि पर असर

पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था कृषि, जल संसाधनों और वन-आधारित गतिविधियों पर गहराई से निर्भर है — ये सभी दक्षिण-पश्चिम मानसून की पर्याप्त वर्षा पर टिकी हैं। लंबे समय तक वर्षा की कमी से खरीफ फसलों, खासकर धान की बुआई और उत्पादन, पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। जल भंडारण स्तर में गिरावट आने वाले सर्दियों और गर्मी के महीनों में जलापूर्ति को प्रभावित कर सकती है।

यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के मानसून पैटर्न में अनिश्चितता पहले से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक रूप से अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में इस तरह की चरम शुष्कता जलवायु विज्ञान के लिए गंभीर चेतावनी है।

अक्टूबर का पूर्वानुमान

IMD ने अक्टूबर 2026 के लिए मिला-जुला पूर्वानुमान जारी किया है। देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना है, हालाँकि पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहने और न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। मानसून के बाद के दौर में मौसमी उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में पूर्वोत्तर भारत का मानसून इतना कमज़ोर क्यों माना जा रहा है?
IMD के आँकड़ों के अनुसार, 2026 में जून-सितंबर के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में केवल 1,017.1 मिमी वर्षा दर्ज हुई — जो 1901 में आधिकारिक रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में किसी भी मानसून सीज़न में दर्ज की गई सबसे कम बारिश है। यह क्षेत्र परंपरागत रूप से देश में सर्वाधिक वर्षा वाला माना जाता है, इसलिए यह कमी असाधारण रूप से गंभीर है।
असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में बारिश की कमी कितने समय तक रही?
IMD के अनुसार, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश — तीनों मौसम संबंधी सब-डिवीजन में मानसून के चारों महीनों — जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर — में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। सितंबर के अंत में कुछ भारी वर्षा के दौर आए, लेकिन वे पूरे सीज़न की कमी को पूरा नहीं कर सके।
राष्ट्रीय स्तर पर 2026 का मानसून कैसा रहा?
देशभर में 2026 के मानसून सीज़न में 759.4 मिमी वर्षा हुई, जिससे यह 1901 के बाद से 13वाँ सबसे कम और 2001 के बाद से चौथा सबसे कम वर्षा वाला सीज़न बन गया। हालाँकि पूर्वोत्तर की स्थिति राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक गंभीर रही।
सितंबर 2026 में पूर्वोत्तर के तापमान में क्या बदलाव आया?
IMD के अनुसार, सितंबर 2026 में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का औसत तापमान 27.95 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.74 डिग्री अधिक था। यह 1901 के बाद से इस क्षेत्र के लिए सितंबर का छठा सबसे गर्म महीना था।
अक्टूबर 2026 में पूर्वोत्तर के मौसम का क्या पूर्वानुमान है?
IMD ने अक्टूबर 2026 के लिए पूर्वोत्तर के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास और न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान लगाया है। देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना है, जबकि पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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