3 अक्टूबर 2026
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हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद 41वीं सबसे कम मानसून वर्षा, 652.3 मिमी बारिश दर्ज

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हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद 41वीं सबसे कम मानसून वर्षा, 652.3 मिमी बारिश दर्ज

सारांश

हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून सामान्य से 7 दिन देर से आया और 10 दिन देर से गया — और पीछे छोड़ गया 125 साल के इतिहास में 41वीं सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड। 652.3 मिमी वर्षा, सामान्य से 11% कम। लाहौल-स्पीति में तो 76% का नकारात्मक विचलन।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश में मानसून सीज़न 2026 में 652.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज — सामान्य 734.4 मिमी से 11% कम ।
यह 1901 से 2026 की अवधि में राज्य की 41वीं सबसे कम मानसून वर्षा है।
मानसून का आगमन 30 जून को — सामान्य तारीख 25 जून से 7 दिन देर से ; विदाई भी 25 सितंबर की सामान्य तारीख से देर से।
लाहौल-स्पीति में सबसे कम 27.8 मिमी बारिश, सामान्य से 76% कम ; कांगड़ा में सर्वाधिक 658.0 मिमी ।
हमीरपुर में कम और लाहौल-स्पीति में बहुत कम वर्षा; शेष 10 जिलों में सामान्य वर्षा।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड: सर्वाधिक वर्षा 1922 में 1,314.6 मिमी दर्ज की गई थी।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के शिमला केंद्र के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सीज़न (जून से सितंबर) के दौरान 652.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य 734.4 मिलीमीटर से 11 प्रतिशत कम है। यह आँकड़ा 1901 से 2026 की अवधि में राज्य की 41वीं सबसे कम मानसून वर्षा है। इसके साथ ही, दक्षिण-पश्चिम मानसून शनिवार, 4 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश से विदा हो गया, जबकि इसके लौटने की सामान्य तारीख 25 सितंबर होती है।

मानसून का आगमन और विदाई

इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 30 जून को हिमाचल प्रदेश में प्रवेश कर गया और 1 जुलाई तक पूरे राज्य में फैल गया। यह सामान्य आगमन तारीख 25 जून से सात दिन की देरी थी। मानसून की विदाई भी 25 सितंबर की सामान्य तारीख से करीब एक सप्ताह बाद हुई। IMD के अनुसार, देरी से आगमन और देरी से विदाई दोनों ने मिलकर मौसमी वर्षा के वितरण को प्रभावित किया।

जिलावार वर्षा का विवरण

किन्नौर, ऊना, बिलासपुर, कुल्लू, चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में मानसून की बारिश सामान्य श्रेणी में रही। वहीं, हमीरपुर जिले में कम वर्षा और सुदूर लाहौल-स्पीति जिले में बहुत कम वर्षा दर्ज की गई।

अगस्त माह में सर्वाधिक वर्षा कांगड़ा जिले में 658.0 मिलीमीटर दर्ज हुई, जबकि लाहौल-स्पीति में केवल 27.8 मिलीमीटर बारिश हुई — जो राज्य में सबसे कम रही। सिरमौर जिले में सामान्य से 17 प्रतिशत अधिक का सकारात्मक अंतर दर्ज किया गया, जबकि लाहौल-स्पीति में सामान्य से 76 प्रतिशत कम बारिश हुई — राज्य में सर्वाधिक नकारात्मक विचलन।

अगस्त माह में मानसून की स्थिति

IMD के अनुसार, अगस्त में राज्य में सामान्य 256.8 मिलीमीटर के मुकाबले 212.5 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 17 प्रतिशत कम है। अगस्त में 5, 7, 11, 19 और 31 तारीख को मानसून की गतिविधि तेज़ रही। इसके विपरीत, 2, 3, 9, 13, 14, 21, 25, 27, 28, 29 और 30 अगस्त को मानसून कमज़ोर बना रहा।

राज्य में 4 अगस्त को सिरमौर और बिलासपुर, 5 अगस्त को सिरमौर और ऊना, 15 अगस्त को कांगड़ा तथा 19 अगस्त को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में भारी वर्षा के एपिसोड दर्ज किए गए।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि 1901 से 2026 की अवधि में हिमाचल प्रदेश में सर्वाधिक मानसून वर्षा 1922 में 1,314.6 मिलीमीटर दर्ज की गई थी। इस वर्ष की 652.3 मिलीमीटर की वर्षा उस रिकॉर्ड की लगभग आधी है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु विशेषज्ञ हिमालयी क्षेत्र में मानसून के बदलते पैटर्न पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, जो कृषि, पेयजल और पनबिजली उत्पादन को सीधे प्रभावित करता है।

आगे की संभावनाएँ

मानसून की विदाई के साथ अब हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ आधारित शीतकालीन वर्षा और हिमपात का मौसम शुरू होगा। IMD ने अभी तक इस वर्ष के शीतकालीन पूर्वानुमान का विस्तृत ब्यौरा जारी नहीं किया है। कृषि और बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य से कम मानसून वर्षा का असर रबी फसलों की बुवाई और सेब जैसी बागवानी फसलों की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार और केंद्र के पास इस बदलते पैटर्न से निपटने की दीर्घकालिक योजना है। लाहौल-स्पीति में 76% का नकारात्मक विचलन सिर्फ मौसमी घटना नहीं, बल्कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जल संकट की आहट है। हिमाचल की पनबिजली परियोजनाएँ और सेब-केंद्रित बागवानी अर्थव्यवस्था दोनों मानसून की नियमितता पर निर्भर हैं — और यह निर्भरता अब जोखिम में है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश में 2026 मानसून सीज़न में कितनी बारिश हुई?
IMD के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 2026 के मानसून सीज़न (जून-सितंबर) में 652.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य 734.4 मिलीमीटर से 11 प्रतिशत कम है। यह 1901 के बाद से राज्य की 41वीं सबसे कम मानसून वर्षा है।
हिमाचल प्रदेश में 2026 में मानसून कब आया और कब गया?
मानसून 30 जून 2026 को हिमाचल प्रदेश में पहुँचा और 1 जुलाई तक पूरे राज्य में फैल गया, जो सामान्य आगमन तारीख 25 जून से 7 दिन देर से था। मानसून की विदाई भी सामान्य तारीख 25 सितंबर के बाद हुई।
हिमाचल के किस जिले में सबसे कम और सबसे ज़्यादा बारिश हुई?
लाहौल-स्पीति जिले में सबसे कम 27.8 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 76 प्रतिशत कम है। कांगड़ा जिले में सर्वाधिक 658.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
हिमाचल प्रदेश में अब तक की सबसे अधिक मानसून वर्षा कब दर्ज हुई थी?
1901 से 2026 की अवधि में हिमाचल प्रदेश में सर्वाधिक मानसून वर्षा 1922 में 1,314.6 मिलीमीटर दर्ज की गई थी। इस वर्ष की 652.3 मिलीमीटर वर्षा उस रिकॉर्ड की लगभग आधी है।
हिमाचल के किन जिलों में 2026 में सामान्य बारिश हुई?
किन्नौर, ऊना, बिलासपुर, कुल्लू, चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में मानसून वर्षा सामान्य श्रेणी में रही। हमीरपुर में कम और लाहौल-स्पीति में बहुत कम वर्षा दर्ज हुई।
राष्ट्र प्रेस
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