हिमाचल प्रदेश में अगस्त 2026: 1901 के बाद 29वीं सबसे कम बारिश, सामान्य से 17% कमी दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में अगस्त 2026 के दौरान 212.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई — जो 1901 के बाद से राज्य में अगस्त माह की 29वीं सबसे कम बारिश है। सामान्य वर्षा 256.8 मिमी के मुकाबले यह आँकड़ा 17 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
ऐतिहासिक संदर्भ
आँकड़ों के अनुसार, अगस्त 1927 में हिमाचल प्रदेश में सर्वाधिक 542.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी — जो इस वर्ष की तुलना में ढाई गुना से भी अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में मानसून की असमान गतिविधियाँ देखी जा रही हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर बहस तेज़ हो रही है।
मानसून की सक्रियता और कमज़ोरी
IMD के अनुसार, 5, 7, 11, 19 और 31 अगस्त को राज्य में मानसून की गतिविधियाँ सक्रिय रहीं। इसके विपरीत, 2, 3, 9, 13, 14, 21, 25, 27, 28, 29 और 30 अगस्त को मानसून कमज़ोर रहा, जिससे अधिकांश दिनों में वर्षा अपेक्षा से कम रही।
भारी वर्षा की घटनाएँ छिटपुट रहीं। 4 अगस्त को सिरमौर और बिलासपुर, 5 अगस्त को सिरमौर और ऊना, 15 अगस्त को कांगड़ा तथा 19 अगस्त को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा में कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा दर्ज की गई।
जिलेवार वर्षा का चित्र
जिलों के स्तर पर विषमता स्पष्ट रही। कांगड़ा जिले में सर्वाधिक 658 मिमी वर्षा हुई, जबकि लाहौल-स्पीति में सबसे कम 27.8 मिमी — यानी सामान्य से 76 प्रतिशत कम — बारिश रिकॉर्ड की गई। सिरमौर जिले में सामान्य से 17 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई, जो राज्य में एकमात्र उल्लेखनीय अधिशेष रहा।
बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और ऊना जिलों में सामान्य वर्षा दर्ज की गई। वहीं चंबा, हमीरपुर और सोलन में सामान्य से कम बारिश हुई, और शेष जिलों में काफी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
आम जनता और कृषि पर असर
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था बागवानी और कृषि पर बड़े पैमाने पर निर्भर है। मानसून की कमज़ोरी का सीधा असर सेब, मक्का और सब्ज़ियों की फसलों पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि राज्य के पहाड़ी ज़िलों में सिंचाई के वैकल्पिक स्रोत सीमित हैं, जिससे वर्षा पर निर्भरता और अधिक हो जाती है।
आगे क्या
IMD की यह रिपोर्ट 1 सितंबर 2026 को जारी की गई। सितंबर माह में मानसून की वापसी से पहले राज्य के कुछ हिस्सों में वर्षा की संभावना बनी रहती है। मौसम विशेषज्ञों की नज़र अब इस बात पर है कि क्या सितंबर में होने वाली बारिश अगस्त की कमी की कुछ भरपाई कर पाएगी।