दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर में दाखिल, अगले 2-3 दिनों में सभी राज्यों को कवर करने की संभावना
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पश्चिम मानसून 7 जून 2026 (रविवार) को पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्से में प्रवेश कर गया — अपनी सामान्य आगमन तिथि से दो दिन की देरी के साथ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में मानसून के शेष पूर्वोत्तर राज्यों को भी कवर कर लेने की पूरी संभावना है।
किन राज्यों में हुआ प्रवेश
गुवाहाटी और अगरतला स्थित IMD के मौसम विज्ञान केंद्रों के अधिकारियों ने बताया कि रविवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर तथा असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में दाखिल हो गया। इन क्षेत्रों में मानसून के आगमन के साथ व्यापक वर्षा दर्ज की गई है।
पिछले वर्ष से तुलना
अगरतला स्थित IMD के एक अधिकारी ने बताया कि 2025 में दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को ही पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में पहुँच गया था। इस वर्ष उसकी तुलना में आगमन अपेक्षाकृत विलंबित रहा है, जो सामान्य तिथि से दो दिन पीछे है। गौरतलब है कि मानसून की समय-सारिणी में मामूली बदलाव क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों पर निर्भर करता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ और आगे का पूर्वानुमान
IMD के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अनुकूल मौसम परिस्थितियाँ बनी हुई हैं, जिससे मानसून के आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। मौसम एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वोत्तर राज्यों के शेष हिस्सों के साथ-साथ उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ क्षेत्रों में भी पहुँचने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं।
इसके अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, कर्नाटक, कोंकण और गोवा, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी अगले कुछ दिनों में वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
अल नीनो का असर और सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद
IMD अधिकारी के अनुसार, यद्यपि इस वर्ष भारत के कुछ हिस्सों में मजबूत अल नीनो की स्थिति का पूर्वानुमान लगाया गया है, परंतु इस घटना का पहाड़ी पूर्वोत्तर क्षेत्र पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसका कारण यहाँ का व्यापक वन क्षेत्र, विविध स्थलाकृति और अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ हैं।
अधिकारी ने आगे बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में पूर्वोत्तर राज्यों में वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है — जो किसानों और जल संसाधन प्रबंधन के नज़रिए से एक सकारात्मक संकेत है।