23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर में दाखिल, अगले 2-3 दिनों में सभी राज्यों को कवर करने की संभावना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर में दाखिल, अगले 2-3 दिनों में सभी राज्यों को कवर करने की संभावना

सारांश

दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य तिथि से दो दिन देरी से 7 जून को पूर्वोत्तर के कई राज्यों में दाखिल हो गया। IMD का कहना है कि अल नीनो के बावजूद इस क्षेत्र में इस मौसम सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।

मुख्य बातें

दक्षिण-पश्चिम मानसून 7 जून 2026 को त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर और असम-अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में पहुँचा।
यह आगमन सामान्य तिथि से दो दिन विलंबित है; 2025 में मानसून 26 मई को ही पहुँच गया था।
IMD के अनुसार अगले 2-3 दिनों में मानसून के सभी पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने की संभावना है।
इस मौसम में पूर्वोत्तर में वर्षा सामान्य से अधिक रहने का पूर्वानुमान।
मजबूत अल नीनो की स्थिति के बावजूद पहाड़ी पूर्वोत्तर पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने की उम्मीद।

दक्षिण-पश्चिम मानसून 7 जून 2026 (रविवार) को पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्से में प्रवेश कर गया — अपनी सामान्य आगमन तिथि से दो दिन की देरी के साथ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में मानसून के शेष पूर्वोत्तर राज्यों को भी कवर कर लेने की पूरी संभावना है।

किन राज्यों में हुआ प्रवेश

गुवाहाटी और अगरतला स्थित IMD के मौसम विज्ञान केंद्रों के अधिकारियों ने बताया कि रविवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर तथा असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में दाखिल हो गया। इन क्षेत्रों में मानसून के आगमन के साथ व्यापक वर्षा दर्ज की गई है।

पिछले वर्ष से तुलना

अगरतला स्थित IMD के एक अधिकारी ने बताया कि 2025 में दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को ही पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में पहुँच गया था। इस वर्ष उसकी तुलना में आगमन अपेक्षाकृत विलंबित रहा है, जो सामान्य तिथि से दो दिन पीछे है। गौरतलब है कि मानसून की समय-सारिणी में मामूली बदलाव क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों पर निर्भर करता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ और आगे का पूर्वानुमान

IMD के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अनुकूल मौसम परिस्थितियाँ बनी हुई हैं, जिससे मानसून के आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। मौसम एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वोत्तर राज्यों के शेष हिस्सों के साथ-साथ उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ क्षेत्रों में भी पहुँचने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं।

इसके अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, कर्नाटक, कोंकण और गोवा, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी अगले कुछ दिनों में वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

अल नीनो का असर और सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद

IMD अधिकारी के अनुसार, यद्यपि इस वर्ष भारत के कुछ हिस्सों में मजबूत अल नीनो की स्थिति का पूर्वानुमान लगाया गया है, परंतु इस घटना का पहाड़ी पूर्वोत्तर क्षेत्र पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसका कारण यहाँ का व्यापक वन क्षेत्र, विविध स्थलाकृति और अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ हैं।

अधिकारी ने आगे बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में पूर्वोत्तर राज्यों में वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है — जो किसानों और जल संसाधन प्रबंधन के नज़रिए से एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है जिसमें मानसून की समय-सारिणी तेज़ी से अनिश्चित होती जा रही है — 2025 में 26 मई को आगमन और 2026 में 7 जून को, यह अंतर उल्लेखनीय है। IMD का यह दावा कि अल नीनो का पूर्वोत्तर पर सीमित असर होगा, आश्वस्त करने वाला है, लेकिन इसे वन क्षेत्र और स्थलाकृति के आधार पर दिया गया क्षेत्रीय अनुमान मानना चाहिए — राष्ट्रीय स्तर पर अल नीनो के प्रभाव अभी भी अनिश्चित हैं। सामान्य से अधिक वर्षा की उम्मीद किसानों के लिए राहत की खबर है, लेकिन बाढ़ प्रबंधन की तैयारी पर भी ध्यान देना उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 पूर्वोत्तर में कब पहुँचा?
दक्षिण-पश्चिम मानसून 7 जून 2026 (रविवार) को पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्से में पहुँचा, जो सामान्य आगमन तिथि से दो दिन देरी से है। इसमें त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर और असम-अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्से शामिल हैं।
क्या पूर्वोत्तर में मानसून का आगमन इस वर्ष देरी से हुआ?
हाँ, इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि से दो दिन देरी से पहुँचा। तुलना के लिए, 2025 में दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को ही पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में आ गया था।
पूर्वोत्तर में इस मानसून सीज़न में बारिश कैसी रहेगी?
IMD अधिकारियों के अनुसार, इस मौसम में पूर्वोत्तर राज्यों में वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। अनुकूल मौसम परिस्थितियाँ मानसून के आगे बढ़ने में सहायक हैं।
अल नीनो का पूर्वोत्तर भारत के मानसून पर क्या असर होगा?
IMD के अनुसार, इस वर्ष मजबूत अल नीनो का पूर्वानुमान है, लेकिन पहाड़ी पूर्वोत्तर क्षेत्र पर इसका महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसका कारण यहाँ का व्यापक वन क्षेत्र, विविध स्थलाकृति और अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ हैं।
अगले कुछ दिनों में भारत के किन अन्य राज्यों में बारिश की संभावना है?
IMD के अनुसार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, कर्नाटक, कोंकण और गोवा, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी अगले कुछ दिनों में वर्षा होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले