इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: 'बधाई' वसूली को कानूनी मान्यता नहीं, किन्नर समुदाय की याचिका खारिज
सारांश
Key Takeaways
- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 28 अप्रैल 2026 को किन्नर सदस्य रेखा देवी की रिट याचिका खारिज की।
- याचिका में गोंडा जिले के जरवल और कर्नलगंज क्षेत्र में 'बधाई' वसूली के लिए विशेष क्षेत्रीय अधिकार की माँग थी।
- जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा— कानून की अनुमति के बिना किसी से भी धन वसूली का कोई अधिकार नहीं।
- ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 या कोई अन्य कानून ऐसे 'जजमानी' दावों को मान्यता नहीं देता।
- कोर्ट ने चेताया कि ऐसी राहत देना भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध मानी जाने वाली अवैध वसूली को वैधता देने जैसा होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 28 अप्रैल 2026 को ट्रांसजेंडर (किन्नर) समुदाय की एक सदस्य द्वारा दायर रिट याचिका खारिज कर दी, जिसमें उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पारंपरिक 'बधाई' या 'जजमानी' अधिकारों के लिए न्यायिक सुरक्षा और क्षेत्रीय सीमांकन की माँग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या समूह कानून की अनुमति के बिना नागरिकों से धन वसूलने का कोई कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं रखता।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता रेखा देवी ने अदालत से माँग की थी कि जरवल कस्बे में 'काटी का पुल' से 'घाघरा घाट' तक और कर्नलगंज में 'सरयू पुल' तक के इलाके में 'बधाई' (शुभ अवसरों पर दिया जाने वाला दान) संग्रह के लिए उनके पक्ष में एक विशेष क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र घोषित किया जाए। याचिका में तर्क दिया गया था कि समुदाय के विभिन्न गुटों के बीच क्षेत्रीय दावों के टकराव के कारण जानलेवा हमले और गंभीर चोटों सहित हिंसक झड़पें हो चुकी हैं।
अदालत का निर्णय
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीजन बेंच ने राहत देने से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा,