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बांग्लादेश: मयमनसिंह में हिंदू ज्वेलर निरंजन चंद्र का शव ड्रम में मिला, सिर-छाती पर धारदार हथियार के निशान

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बांग्लादेश: मयमनसिंह में हिंदू ज्वेलर निरंजन चंद्र का शव ड्रम में मिला, सिर-छाती पर धारदार हथियार के निशान

सारांश

बांग्लादेश के मयमनसिंह में हिंदू ज्वेलर निरंजन चंद्र सूत्रधार का शव ड्रम में बंद मिला — सिर और छाती पर धारदार हथियार के निशान। शुक्रवार तक कोई गिरफ्तारी नहीं। यह घटना BNP सरकार के तहत हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की चिंताजनक श्रृंखला की ताज़ा कड़ी है।

मुख्य बातें

मयमनसिंह जिले के बेगुनबाड़ी इलाके में 50 वर्षीय हिंदू ज्वेलर निरंजन चंद्र सूत्रधार का शव ड्रम में बंद नहर में तैरता मिला।
मृतक के सिर और छाती पर धारदार हथियार से चोट के निशान; पुलिस का मानना है पहले हत्या की गई, फिर शव ड्रम में डाला गया।
शव की पहचान मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड के टोकन और परिवार के ज़रिए हुई।
शुक्रवार तक न हत्यारे की पहचान, न कोई गिरफ्तारी — जाँच जारी।
अवामी लीग ने BNP सरकार पर हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में विफलता का आरोप लगाया।
इससे पहले रंगपुर में रिटायर्ड हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके परिवार की हत्या की घटना भी सामने आ चुकी है।

बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के बेगुनबाड़ी इलाके में 50 वर्षीय हिंदू ज्वेलर निरंजन चंद्र सूत्रधार का शव एक बंद ड्रम के भीतर नहर में तैरता हुआ मिला। बुधवार सुबह स्थानीय निवासियों ने नहर के पास पानी में ड्रम तैरते देखा और अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस ने शव बरामद किया। यह घटना बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आई है।

शव की पहचान और मामले का विवरण

कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी मुहम्मद शिबिरुल इस्लाम के अनुसार, मृतक के सिर और छाती पर धारदार हथियार से चोट के गहरे निशान पाए गए। पुलिस का मानना है कि निरंजन चंद्र सूत्रधार की पहले हत्या की गई, उसके बाद शव को ड्रम में बंद करके पानी में फेंक दिया गया।

ड्रम से बरामद शव की पैंट की जेब में मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड का एक टोकन मिला। इस टोकन की मदद से उक्त संस्था से संपर्क किया गया और मृतक की पहचान निरंजन चंद्र के रूप में हुई। बाद में उनकी पत्नी सुमिता रानी सूत्रधार और बेटे जॉय सूत्रधार ने शव की आधिकारिक पहचान की।

कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर रूहुल अमीन ने बताया, 'टोकन मिलने के बाद मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड से संपर्क किया गया। संस्था के लोगों ने टोकन देखकर निरंजन की पहचान करने में मदद की। बाद में परिवार से संपर्क करके उनकी पहचान की पुष्टि की गई।'

जाँच की स्थिति

बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली अखबार 'द डेली इत्तेफाक' की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस शुक्रवार तक यह पता नहीं लगा सकी कि हत्या किसने की और इसके पीछे क्या मकसद था। इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। निरंजन चंद्र मयमनसिंह के अठारबारी बिल्डिंग इलाके में एक साझेदारी की ज्वेलरी शॉप चलाते थे।

अल्पसंख्यकों पर हमलों का व्यापक संदर्भ

यह घटना बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर जारी हिंसा की एक और कड़ी के रूप में देखी जा रही है। यह सिलसिला मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के दौरान शुरू हुआ था और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रशासन के तहत भी जारी है।

गौरतलब है कि इससे पहले रंगपुर शहर में रिटायर्ड हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या की घटना ने भी व्यापक ध्यान खींचा था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

अवामी लीग ने इस पर कई सवाल उठाए हैं। पार्टी ने 2001 से 2006 के BNP-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन शासन का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान अल्पसंख्यकों पर जो अत्याचार हुए, वे आज 2026 में फिर से देखे जा रहे हैं। पार्टी ने कहा, 'मंदिरों पर हमले, घरों में आग लगाना, जमीन पर कब्जा करना, महिलाओं के साथ बर्बर यौन हिंसा और अनगिनत हिंदुओं को बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर करना — यह सब आज 2026 में फिर से हमारी आँखों के सामने आ रहा है।'

आलोचकों का कहना है कि सत्ताधारी BNP सरकार की इन घटनाओं पर निष्क्रियता धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के उस बड़े पैटर्न को दर्शाती है, जो पिछली अंतरिम सरकार के समय से ही जारी है।

आगे क्या होगा

पुलिस ने मामले की जाँच जारी रखने की बात कही है, लेकिन अब तक हत्या के मकसद और संदिग्धों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं की नज़र इस जाँच के अगले कदमों पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

गिरफ्तारियाँ नहीं होतीं। BNP सरकार की निष्क्रियता और यूनुस-काल से चली आ रही यह निरंतरता बताती है कि यह किसी एक सरकार की नाकामी नहीं, बल्कि संस्थागत उदासीनता है। भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक संवेदनशीलता तो है, लेकिन द्विपक्षीय स्तर पर जवाबदेही के लिए ठोस दबाव अब भी नदारद है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मयमनसिंह में ड्रम में शव किसका मिला और घटना कब हुई?
शव मयमनसिंह के अठारबारी बिल्डिंग इलाके के निवासी और ज्वेलरी शॉप संचालक 50 वर्षीय निरंजन चंद्र सूत्रधार का था। बुधवार सुबह बेगुनबाड़ी इलाके में स्थानीय लोगों ने नहर में ड्रम तैरते देखा और पुलिस को सूचित किया।
पुलिस ने शव की पहचान कैसे की?
ड्रम से मिले शव की पैंट की जेब में मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड का एक टोकन मिला। उस टोकन के आधार पर संस्था से संपर्क किया गया, जिसके बाद मृतक की पत्नी सुमिता रानी सूत्रधार और बेटे जॉय सूत्रधार ने शव की पहचान की पुष्टि की।
इस मामले में अब तक क्या जाँच हुई है?
कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी मुहम्मद शिबिरुल इस्लाम के अनुसार, शुक्रवार तक न हत्यारे की पहचान हुई, न कोई गिरफ्तारी हुई। पुलिस का मानना है कि पहले हत्या की गई और फिर शव को ड्रम में बंद करके पानी में फेंका गया।
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों का यह ताज़ा सिलसिला क्या दर्शाता है?
आलोचकों का कहना है कि यह सिलसिला मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार से शुरू हुआ और मौजूदा BNP प्रशासन के तहत भी जारी है। रंगपुर में रिटायर्ड हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या जैसी घटनाएँ इस पैटर्न की गंभीरता को रेखांकित करती हैं।
अवामी लीग ने BNP सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
अवामी लीग ने 2001-2006 के BNP-जमात-ए-इस्लामी शासनकाल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान अल्पसंख्यकों पर जो अत्याचार हुए, वे 2026 में फिर दोहराए जा रहे हैं। पार्टी ने मंदिरों पर हमले, जमीन पर कब्जे और यौन हिंसा का उल्लेख करते हुए सरकार की निष्क्रियता की आलोचना की है।
राष्ट्र प्रेस
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