सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: बरामद मोटरसाइकिल का मालिक फर्जी पते पर रजिस्टर्ड
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की हत्या की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने गुरुवार, 7 मई 2026 की दोपहर को वह मोटरसाइकिल बरामद कर ली, जिसका इस्तेमाल इस सुनियोजित हत्याकांड में किया गया था। हालांकि, जांच अधिकारी अब तक न तो मोटरसाइकिल के असली मालिक की पहचान कर पाए हैं और न ही उस चार-पहिया वाहन के, जिसने रथ की गाड़ी का रास्ता रोका था — दोनों वाहनों पर नकली नंबर प्लेटें लगी थीं।
हत्याकांड का घटनाक्रम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बुधवार रात करीब 10:30 बजे जब चंद्रनाथ रथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक कार्यक्रम से घर लौट रहे थे, तब एक हेलमेट पहने हत्यारे की मोटरसाइकिल उनका पीछा कर रही थी। जैसे ही रथ की गाड़ी उत्तरी 24 परगना जिले के मध्यमग्राम स्थित दोहरिया क्रॉसिंग पर पहुँची, एक चार-पहिया वाहन ने उनका रास्ता रोक दिया।
रथ की गाड़ी रुकते ही मोटरसाइकिल सवार हत्यारे ने बेहद करीब से कम से कम दस गोलियाँ चलाईं। चंद्रनाथ रथ की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि उनके वाहन के चालक बुद्धदेव बेरा गंभीर रूप से घायल हो गए। हत्यारा इसके बाद मौके से फरार हो गया।
वाहनों की बरामदगी और नकली पहचान
पुलिस महानिदेशक सिद्धार्थ नाथ गुप्ता ने बुधवार रात ही पुष्टि की कि दोनों वाहनों पर लगी नंबर प्लेटें नकली थीं। चार-पहिया वाहन हत्या के कुछ ही घंटों के भीतर बरामद कर लिया गया था, जबकि मोटरसाइकिल गुरुवार दोपहर को हत्यास्थल से करीब चार किलोमीटर दूर एक सुनसान स्थान पर मिली।
राज्य पुलिस के एक अंदरूनी सूत्र के अनुसार, मोटर वाहन विभाग के रिकॉर्ड में यह मोटरसाइकिल बिवास भट्टाचार्य के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जिसका पता पश्चिम बर्दवान जिले के बर्नपुर स्थित एक फैक्ट्री क्वार्टर दर्ज था। जब पुलिस उस पते पर पहुँची तो वहाँ धर्मवीर कुमार नाम का व्यक्ति रहता मिला — जिसके पास कभी कोई मोटरसाइकिल नहीं थी और वह बिवास भट्टाचार्य नाम के किसी व्यक्ति को नहीं जानता था।
इसी प्रकार, रास्ता रोकने वाली चार-पहिया गाड़ी की नंबर प्लेट वास्तव में दार्जिलिंग जिले के माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी क्षेत्र के एक स्थानीय चाय बागान के मैनेजर विलियम जोसेफ के वाहन को अलॉट की गई थी — और वह वाहन अभी भी उन्हीं के कब्जे में है।
सुनियोजित साजिश के संकेत
राज्य पुलिस के सूत्रों ने बताया कि हत्या की पूरी कार्यप्रणाली से स्पष्ट है कि इसकी योजना काफी पहले बना ली गई थी और चंद्रनाथ रथ की रोजमर्रा की दिनचर्या पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। सूत्र के अनुसार, हत्यारे का बेहद करीब से तेजी से गोलियाँ चलाकर फरार हो जाना यह साबित करता है कि वह एक अनुभवी और पेशेवर शार्प-शूटर था।
जांच की स्थिति और आगे की राह
SIT फिलहाल फर्जी पंजीकरण दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने और हत्यारे की असली पहचान उजागर करने में जुटी है। यह मामला पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच आया है और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेगी कि इस सुनियोजित हत्याकांड के पीछे कौन सी ताकतें थीं।