कोलकाता एयरपोर्ट को बम धमकी का ईमेल, CISF की गहन तलाशी में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली
सारांश
मुख्य बातें
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, कोलकाता को 8 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें एयरपोर्ट परिसर में कई स्थानों पर बम रखे होने का दावा किया गया था। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने तत्काल व्यापक तलाशी अभियान चलाया, परंतु किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता नहीं चला।
धमकी का विवरण और तत्काल प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार दोपहर एयरपोर्ट अधिकारियों को एक ईमेल भेजा गया, जिसमें परिसर के भीतर विशेष स्थानों पर विस्फोटक सामग्री छिपाए जाने का दावा किया गया था। ईमेल मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन ने CISF को तत्काल अलर्ट कर दिया, जो इस हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था के प्रभारी हैं।
सुरक्षा बलों ने सतर्कता बरतते हुए पूरे एयरपोर्ट परिसर में गहन तलाशी अभियान शुरू किया। यद्यपि अधिकारियों को शुरू में इस सूचना के झूठे होने की आशंका थी, फिर भी उन्होंने किसी प्रकार का जोखिम न उठाते हुए मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया।
तलाशी अभियान का परिणाम
CISF जवानों द्वारा एयरपोर्ट परिसर के कोने-कोने की जाँच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि धमकी भरा ईमेल एक फर्जी सूचना थी। तलाशी में कोई भी संदिग्ध वस्तु, विस्फोटक सामग्री अथवा खतरनाक उपकरण नहीं मिला। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान्य परिचालन बहाल कर दिया गया।
साइबर विशेषज्ञों की मदद से जाँच जारी
सूत्रों के अनुसार, धमकी भरा ईमेल भेजने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान के लिए अधिकारी सक्रिय रूप से जाँच कर रहे हैं। ईमेल के स्रोत का पता लगाने और भेजने वाले की पहचान करने के लिए साइबर विशेषज्ञों की सेवाएँ ली गई हैं। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।
पिछली घटनाओं का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब इस प्रकार की झूठी धमकियाँ लगातार बढ़ती देखी जा रही हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष फरवरी में कोलकाता एयरपोर्ट पर एक ही दिन में बम धमकी के दो अलग-अलग मामले सामने आए थे — दोनों मामलों में उड़ानों के शौचालयों में धमकी भरे नोट मिले थे, जो बाद में झूठे साबित हुए। इसके अलावा, इसी वर्ष फरवरी में पश्चिम बंगाल के कई जिलों के डाकघरों और पासपोर्ट कार्यालयों को भी बम धमकी के ईमेल मिले थे, जिसके कारण इन परिसरों को खाली कराना पड़ा था।
यह Nवीं ऐसी घटना है जो दर्शाती है कि फर्जी बम धमकियाँ सुरक्षा एजेंसियों के संसाधनों पर भारी दबाव डालती हैं और सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक दहशत का माहौल बनाती हैं। आगे चलकर जाँच के नतीजों के आधार पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की संभावना है।