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आईआईटी गुवाहाटी शोध: कार्यस्थल संस्कृति और नेतृत्व शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को करते हैं सीधे प्रभावित

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आईआईटी गुवाहाटी शोध: कार्यस्थल संस्कृति और नेतृत्व शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को करते हैं सीधे प्रभावित

सारांश

आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि स्कूलों में पदानुक्रम आधारित संस्कृति शिक्षकों को अपनी वास्तविक पहचान दबाने पर मजबूर करती है — और यही उनके तनाव और असंतोष की जड़ है। 30 शिक्षकों पर आधारित यह शोध भारतीय शिक्षा नीति को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

मुख्य बातें

आईआईटी गुवाहाटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में हुए शोध में पाया गया कि स्कूल की कार्यस्थल संस्कृति शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करती है।
शोध में 30 शिक्षकों से बातचीत के आधार पर 'शिक्षक कार्यस्थल प्रमाणिकता प्रभाव मॉडल' तैयार किया गया।
शिक्षक कक्षा में सहज रहते हैं, लेकिन संस्थागत दबाव और वरिष्ठ सहकर्मियों की उपस्थिति में अपनी पहचान दबाते हैं।
अधिक आत्म-प्रमाणिकता वाले शिक्षक अधिक संतुष्ट, कम तनावग्रस्त और संस्थान से अधिक जुड़े पाए गए।
शोध दल अगले चरण में इस मॉडल को विभिन्न परिस्थितियों में परखेगा, जिससे भविष्य की शिक्षा नीतियों को दिशा मिल सकती है।

आईआईटी गुवाहाटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में हुए एक नए अध्ययन के अनुसार, स्कूलों की कार्यस्थल संस्कृति और नेतृत्व शैली सीधे शिक्षकों के भावनात्मक स्वास्थ्य और कार्य संतुष्टि को प्रभावित करती है। 1 मई 2026 को सामने आए इस शोध में पाया गया कि जब शिक्षक कार्यस्थल पर अपनी वास्तविक पहचान के साथ सहज नहीं रह पाते, तो उनमें तनाव और असंतोष बढ़ता है। यह अध्ययन भारतीय स्कूल शिक्षा प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करता है।

शोध की पृष्ठभूमि और पद्धति

यह शोध आईआईटी गुवाहाटी के सहायक प्रोफेसर डॉ. अब्राहम सिरिल इसाक और शोधार्थी एम.ए. जयशंकर ने मिलकर किया। शोधकर्ताओं ने 30 अलग-अलग शिक्षकों से विस्तृत बातचीत की और उनके जवाबों का गहन विश्लेषण किया। इसी आधार पर एक नया वैचारिक ढाँचा तैयार किया गया, जिसे 'शिक्षक कार्यस्थल प्रमाणिकता प्रभाव मॉडल' नाम दिया गया है।

मुख्य निष्कर्ष: कक्षा बनाम प्रशासन का द्वंद्व

शोध में एक अहम तथ्य उजागर हुआ — शिक्षक कक्षा में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान सहज और खुले महसूस करते हैं। लेकिन जब संस्थागत दबाव या वरिष्ठ सहकर्मियों की उपस्थिति होती है, तो वे अपनी वास्तविक पहचान को दबा लेते हैं। यही असंतुलन कार्य संतुष्टि में कमी और भावनात्मक तनाव में वृद्धि का प्रमुख कारण बनता है।

शोध 'कार्यस्थल प्रमाणिकता' की अवधारणा पर केंद्रित है, यानी शिक्षक अपने असली स्वभाव में कितना सहज महसूस करते हैं। अध्ययन के अनुसार, भारतीय स्कूलों में मौजूद पदानुक्रम आधारित संस्कृति इस प्रमाणिकता को सबसे अधिक प्रभावित करती है। गौरतलब है कि नए शिक्षकों को इस दबाव का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है।

आत्म-प्रमाणिकता से बेहतर होते हैं परिणाम

शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन शिक्षकों में आत्म-प्रमाणिकता अधिक थी, वे कार्य में अधिक संतुष्ट पाए गए। ऐसे शिक्षक आलोचना और कार्यभार को बेहतर तरीके से संभालते हैं और संस्थान से उनका जुड़ाव भी मज़बूत रहता है। इसके विपरीत, दबावपूर्ण संस्कृति शिक्षकों को कमज़ोर बनाती है और उनकी कार्यक्षमता घटाती है।

डॉ. इसाक के अनुसार,

संपादकीय दृष्टिकोण

वह सरकारी स्कूलों से लेकर निजी संस्थानों तक हर जगह मौजूद है, लेकिन नीति-निर्माण में इसे शायद ही कभी प्राथमिकता मिलती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षक प्रशिक्षण की बात है, पर कार्यस्थल संस्कृति सुधार का कोई ठोस ढाँचा नहीं है। जब तक स्कूल प्रशासन में जवाबदेही और सहयोगी नेतृत्व को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता, तब तक केवल पाठ्यक्रम सुधार से शिक्षा की गुणवत्ता नहीं बदलेगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी गुवाहाटी का यह शोध किस विषय पर है?
यह शोध स्कूली शिक्षकों की 'कार्यस्थल प्रमाणिकता' पर केंद्रित है, यानी शिक्षक अपने कार्यस्थल पर अपने असली स्वभाव में कितना सहज महसूस करते हैं। आईआईटी गुवाहाटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि कार्यस्थल संस्कृति और नेतृत्व शैली शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य संतुष्टि को सीधे प्रभावित करती है।
शोध में शिक्षकों के तनाव का मुख्य कारण क्या बताया गया?
शोध के अनुसार, शिक्षक कक्षा में छात्रों के साथ सहज रहते हैं, लेकिन संस्थागत दबाव या वरिष्ठ सहकर्मियों की उपस्थिति में वे अपनी वास्तविक पहचान दबा लेते हैं। यही असंतुलन उनके तनाव और कार्य असंतोष का प्रमुख कारण है।
'शिक्षक कार्यस्थल प्रमाणिकता प्रभाव मॉडल' क्या है?
यह आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं द्वारा 30 शिक्षकों के साथ गहन बातचीत के आधार पर तैयार किया गया एक नया वैचारिक ढाँचा है। यह मॉडल बताता है कि कार्यस्थल पर प्रमाणिकता की कमी किस प्रकार शिक्षकों की कार्य संतुष्टि और भावनात्मक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
इस शोध से शिक्षा नीति पर क्या असर पड़ सकता है?
शोधकर्ताओं के अनुसार, बेहतर नेतृत्व, सहयोगी माहौल, कार्य संतुलन और उत्पीड़न-विरोधी नीतियाँ शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों के अनुभव को भी बेहतर बना सकती हैं। अगले चरण में इस मॉडल को विभिन्न परिस्थितियों में परखा जाएगा, जिससे भविष्य की शिक्षा नीतियों को नई दिशा मिल सकती है।
क्या नए शिक्षकों पर यह दबाव अधिक होता है?
हाँ, शोध के अनुसार स्कूलों में नए शिक्षकों को संस्थागत दबाव और पदानुक्रम का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है। उनमें आत्म-प्रमाणिकता की कमी अधिक देखी गई, जिससे वे जल्दी तनावग्रस्त और असंतुष्ट हो जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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