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क्या आईआईटी मद्रास ने एंटीबायोटिक प्रतिरोध का तेजी से परीक्षण करने के लिए नया उपकरण बनाया है?

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क्या आईआईटी मद्रास ने एंटीबायोटिक प्रतिरोध का तेजी से परीक्षण करने के लिए नया उपकरण बनाया है?

सारांश

आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक नया और सस्ता उपकरण विकसित किया है, जो मात्र 3 घंटे में यह पता लगा सकता है कि बैक्टीरिया दवाओं के प्रति संवेदनशील है या नहीं। यह उपकरण न केवल रोगियों के जीवन को बचा सकता है, बल्कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को भी कम कर सकता है।

मुख्य बातें

आईआईटी मद्रास का नया उपकरण बैक्टीरिया के एंटीबायोटिक प्रतिरोध का परीक्षण मात्र 3 घंटे में कर सकता है।
यह उपकरण किफायती है और छोटे अस्पतालों में भी उपयोग किया जा सकता है।
यह उपकरण डॉक्टरों को सही उपचार में मदद करेगा।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को कम करने में यह उपकरण सहायक हो सकता है।
यह उपकरण गंभीर संक्रमण वाले मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

नई दिल्ली, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक अभिनव और किफायती उपकरण विकसित किया है, जो मात्र 3 घंटों में यह निर्धारित कर सकता है कि कोई बैक्टीरिया (जीवाणु) दवाओं के प्रति संवेदनशील है या नहीं।

इस उपकरण को "लैब-ऑन-चिप" नाम दिया गया है, जिसमें विशेष प्रकार के छोटे इलेक्ट्रोड लगे होते हैं, जो बैक्टीरिया की प्रतिक्रिया को पहचानने में सक्षम हैं।

यह उपकरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक परीक्षण विधियों में 48 से 72 घंटे का समय लगता है। इतनी लंबी अवधि के कारण, डॉक्टर अक्सर रोगियों को तुरंत ठीक करने के लिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक दवाएं दे देते हैं। यह कई बार गलत साबित होती हैं और बैक्टीरिया में और अधिक प्रतिरोध उत्पन्न कर देती हैं। इसीलिए, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (एएमआर) एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुका है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, एएमआर दुनिया की 10 सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। 2019 में, लगभग 49.5 लाख लोग बैक्टीरिया के एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण जान गंवा चुके थे।

आईआईटी मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एस. पुष्पवनम ने कहा, "यह उपकरण उन मरीजों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है जो गंभीर संक्रमण का सामना कर रहे हैं। इससे डॉक्टरों को सही उपचार में सहायता मिलेगी और यह जीवन रक्षक साबित हो सकता है।"

वैज्ञानिकों ने इस उपकरण का परीक्षण दो विभिन्न बैक्टीरिया, ई. कोलाई और बी. सबटिलिस पर किया। उन्होंने एम्पीसिलीन और टेट्रासाइक्लिन नामक दो दवाओं का उपयोग किया। परिणामस्वरूप, यह उपकरण तीन घंटे में यह बता देता है कि कौन सा बैक्टीरिया किस दवा के प्रति संवेदनशील है।

यह उपकरण मरीज के मूत्र के नमूनों पर भी उपयोग किया गया, जहां इसने सही ढंग से पहचान की कि बैक्टीरिया टेट्रासाइक्लिन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं दिखा रहा है।

इस उपकरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महंगा नहीं है और इसके लिए बड़े लैब या विशेष तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता नहीं है। इसे छोटे अस्पतालों और ग्रामीण क्लीनिकों में भी लागू किया जा सकता है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए यह अत्यधिक लाभकारी हो सकता है, क्योंकि डॉक्टर तुरंत सही दवा निर्धारित कर सकेंगे।

आईआईटी मद्रास का यह अविष्कार न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए एक नई आशा लेकर आया है। यह उपकरण समय और जीवन दोनों को बचाने में सक्षम है और दवाओं के अनुचित उपयोग को भी रोक सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक स्तर पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी चुनौती का सामना करने में भी सहायक होगी। आईआईटी मद्रास का यह उपकरण छोटे अस्पतालों और ग्रामीण क्लीनिकों में भी उपयोग किया जा सकेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह उपकरण कैसे कार्य करता है?
यह उपकरण बैक्टीरिया की प्रतिक्रिया को पहचानने के लिए विशेष इलेक्ट्रोड का उपयोग करता है, जिससे यह निर्धारित किया जा सकता है कि बैक्टीरिया दवाओं के प्रति संवेदनशील है या नहीं।
क्या यह उपकरण महंगा है?
नहीं, यह उपकरण किफायती है और इसके लिए बड़े लैब या तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता नहीं है।
इस उपकरण का उपयोग कहाँ किया जा सकता है?
इस उपकरण का उपयोग छोटे अस्पतालों और ग्रामीण क्लीनिकों में किया जा सकता है।
यह उपकरण मरीजों के लिए कैसे फायदेमंद है?
यह उपकरण डॉक्टरों को सही दवा निर्धारित करने में मदद करता है, जिससे मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है।
क्या यह उपकरण एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को हल कर सकता है?
यह उपकरण दवाओं के गलत उपयोग को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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