क्या आईएनएएस 335 के कमीशन से नौसेना को समुद्र में मिली निर्णायक बढ़त?

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क्या आईएनएएस 335 के कमीशन से नौसेना को समुद्र में मिली निर्णायक बढ़त?

सारांश

भारतीय नौसेना ने गोवा के आईएनएस हंसा में आईएनएएस 335 हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन की कमीशनिंग की। यह कदम देश की समुद्री मजबूती को बढ़ावा देने में सहायक है, जिससे भारतीय नौसेना को समुद्र में एक निर्णायक बढ़त प्राप्त होगी।

मुख्य बातें

आईएनएएस 335 की कमीशनिंग ने भारतीय नौसेना की हवाई क्षमता को बढ़ाया।
यह स्क्वाड्रन समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके हेलीकॉप्टर में स्वदेशी हथियार जोड़े जा रहे हैं।
कमीशनिंग का उद्देश्य भारत को एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करना है।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

नई दिल्ली, 17 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना ने बुधवार को गोवा स्थित आईएनएस हंसा में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की उपस्थिति में अपने दूसरे एमएच-60आर हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन, आईएनएएस 335 (ऑस्प्रे) को कमीशन किया।

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें आज इंडियन नेवल एविएशन के होम बेस, आईएनएस हंसा में आईएनएएस 335 ‘ऑस्प्रेज’ की कमीशनिंग के लिए आकर बहुत खुशी हो रही है। पश्चिमी समुद्री तट पर बहुउद्देश्यीय, मल्टी-रोल एमएच-60आर हेलीकॉप्टर का पहले ऑपरेशनल स्क्वाड्रन के रूप में शामिल होना भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि आज की कमीशनिंग एक बहुत महत्वपूर्ण समय पर हो रही है। वर्ष 2025 में भारत सरकार द्वारा फ्लीट एयर आर्म के गठन को मंजूरी दिए जाने के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह एक ऐसा निर्णय था जिसने नौसेना उड्डयन को नई दिशा दी और हमारी नौसेना को एक शक्तिशाली, बहुआयामी बल में बदल दिया, जिससे हमें समुद्र में निर्णायक बढ़त मिली।

नौसेना प्रमुख ने कहा कि ठीक 64 वर्ष पहले, 17-18 दिसंबर 1961 की रात को ऑपरेशन विजय शुरू हुआ था, जिसमें भारतीय नौसेना के जहाज गोवा पहुंचे थे ताकि उसे पुर्तगालियों से मुक्त कराया जा सके। उस समय भी नौसेना उड्डयन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तत्कालीन आईएनएस विक्रांत और उसका एयर विंग क्षितिज के पार तैनात था और गोवा तक पहुंचने वाले मार्गों को सुरक्षित कर रहा था।

उन्होंने कहा कि आज हमारे चारों ओर का समुद्री वातावरण पहले से कहीं अधिक जटिल और प्रतिस्पर्धी हो गया है। बदलती भू-राजनीति, तेजी से बदलती तकनीक और खतरों का बढ़ता दायरा, ग्रे-जोन गतिविधियों से लेकर समुद्र में आपूर्ति शृंखला में बाधा तक, इस नई वास्तविकता को आकार दे रहे हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में अपनी समुद्री यात्रा कर रहा है, इसलिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, समुद्री संचार मार्गों की रक्षा करना और बढ़ते राष्ट्रीय समुद्री हितों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

नौसेना प्रमुख ने आगे कहा कि इस अस्थिर वैश्विक माहौल में हमारे प्रधानमंत्री ने 29 अक्टूबर 2025 को इंडिया मैरीटाइम वीक के दौरान मैरीटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव में सही कहा था, और मैं उद्धृत करता हूं, “जब वैश्विक समुद्र अशांत होते हैं, तो दुनिया एक स्थिर प्रकाशस्तंभ की तलाश करती है। भारत ताकत और स्थिरता के साथ उस भूमिका को निभाने के लिए अच्छी स्थिति में है।”

उन्होंने बताया कि 2022 में इसी एयरबेस पर दूसरा पी-8आई एयर स्क्वाड्रन कमीशन किया गया था, जिससे सभी क्षेत्रों में संचालन के लिए हमारी तट-आधारित फिक्स्ड-विंग क्षमता बढ़ी। पी-8आई के पूरक के रूप में, भारतीय नौसेना 15 एमक्यू-9बी सी गार्जियन आरपीए के अधिग्रहण की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, जिससे समुद्री निगरानी और समुद्री क्षेत्र की जानकारी बनाए रखने की हमारी क्षमता में बड़ा सुधार होगा।

उन्होंने कहा कि आज हम पश्चिमी समुद्री तट पर नौसेना की हवाई क्षमता को और मजबूत कर रहे हैं, जिससे हमारे अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों को अधिक शक्ति मिलेगी। एमएच-60आर अपने आधुनिक सेंसर, उन्नत एवियोनिक्स और शक्तिशाली हथियार प्रणाली के साथ समुद्री क्षेत्र की निगरानी को बढ़ाएगा और पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री हमले तथा खोज और बचाव अभियानों में त्वरित प्रतिक्रिया संभव बनाएगा।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्क्वाड्रन पूरी तरह से ऑपरेशनल है और पहले दिन से ही फ्लीट के साथ तैनाती के लिए तैयार है। यह हमारी तेजी से क्षमता शामिल करने और प्रभावी एकीकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत, उद्योग के सहयोग से इस हेलीकॉप्टर में स्वदेशी हथियारों और सेंसर को भी जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि इस प्लेटफॉर्म पर कई महत्वपूर्ण उपकरण, जैसे सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो, डेटा लिंक और डेप्थ चार्ज जैसे हथियार पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ हैं, और निकट भविष्य में इसमें स्वदेशी मिसाइलें भी शामिल की जाएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समुद्री क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को भी बढ़ाएगी। यह कदम वैश्विक समुद्री राजनीतिक परिदृश्य में भारत को एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएएस 335 क्या है?
आईएनएएस 335 भारतीय नौसेना का दूसरा एमएच-60आर हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन है, जो समुद्री निगरानी और सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है।
इस स्क्वाड्रन की कमीशनिंग का महत्व क्या है?
यह कमीशनिंग भारतीय नौसेना की हवाई शक्ति को बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।
आईएनएएस 335 को कब कमीशन किया गया?
आईएनएएस 335 को 17 दिसंबर 2023 को कमीशन किया गया।
आईएनएएस 335 की विशेषताएँ क्या हैं?
आईएनएएस 335 में आधुनिक सेंसर, उन्नत एवियोनिक्स और शक्तिशाली हथियार प्रणाली शामिल हैं।
भारत समुद्री सुरक्षा में क्यों आगे बढ़ रहा है?
बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और समुद्र में बढ़ते खतरों के कारण भारत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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