अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा में भूकंप से हिली भारत की धरती, 4 देशों में महसूस हुए झटके
सारांश
Key Takeaways
- भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा था।
- 5.9 की तीव्रता के साथ भूकंप आया।
- झटके भारत सहित चार देशों में महसूस किए गए।
- अभी तक कोई जनहानि नहीं हुई।
- भूकंप के कारण प्लेट टेक्टॉनिक्स हैं।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शुक्रवार रात को देश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर में भी इन झटकों का अनुभव किया गया है। इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में था। इसके झटके भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में महसूस किए गए। अफगानिस्तान का हिंदुकुश इस भूकंप का केंद्र था।
जम्मू-कश्मीर, नई दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी भूकंप के झटके आए।
सूत्रों के अनुसार, अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में शुक्रवार को 5.9 की तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके जम्मू-कश्मीर समेत उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में महसूस किए गए।
जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 71.01 डिग्री पूर्वी देशांतर और 36.52 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर था, जबकि इसकी गहराई 175 किलोमीटर मापी गई।
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में थोड़ी अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, अब तक किसी प्रकार के नुकसान या जनहानि की खबर नहीं आई है। प्रशासन स्थिति पर ध्यान दे रहा है।
इससे पहले, तिब्बत में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। शाम 8 बजकर 12 मिनट पर तिब्बत में भी धरती हिली थी, जिसकी तीव्रता 3.2 मापी गई थी।
भूकंप पृथ्वी की सतह का अचानक हिलना या कांपना है, जो मुख्यतः प्लेट टेक्टॉनिक्स के सिद्धांत से संबंधित है। इसके मुख्य कारण टेक्टोनिक प्लेटों की गति हैं, जो पृथ्वी की बाहरी परत (स्थलमंडल या लिथोस्फीयर) में बंटी हुई हैं। ये प्लेटें लगातार धीमी गति से (साल में कुछ सेंटीमीटर) घूमती या खिसकती रहती हैं।
जब प्लेटों के किनारे घर्षण के कारण अटक जाते हैं, तो तनाव बढ़ता है। जब यह तनाव इतना बढ़ जाता है कि चट्टानें सहन नहीं कर पातीं, तो वे अचानक टूटती या खिसकती हैं। इस ऊर्जा की अचानक मुक्ति से भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो पृथ्वी की सतह पर कंपन पैदा करती हैं, यही भूकंप है।