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भारत का वस्तु व्यापार घाटा सितंबर में $30.21 अरब, निर्यात में 23% की छलांग

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भारत का वस्तु व्यापार घाटा सितंबर में $30.21 अरब, निर्यात में 23% की छलांग

सारांश

सितंबर 2026 में भारत का व्यापार घाटा $30.21 अरब डॉलर रहा — अगस्त से $3.35 अरब ज़्यादा। लेकिन असली सुर्खी यह है कि निर्यात 23% उछला, जो वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में रफ़्तार बढ़ने का संकेत है। घाटा चौड़ा है, पर दिशा उत्साहजनक है।

मुख्य बातें

भारत का वस्तु व्यापार घाटा सितंबर 2026 में $30.21 अरब डॉलर रहा, अगस्त के $26.86 अरब से $3.35 अरब अधिक।
वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 23.04% बढ़कर $44.4 अरब डॉलर पर पहुँचा।
आयात 8% बढ़कर $74.61 अरब डॉलर हो गया।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में निर्यात वृद्धि पहली तिमाही से अधिक रही।
अप्रैल-जून 2026 में चालू खाता घाटा (CAD) $4.2 अरब डॉलर , GDP का 0.5% रहा।
अगस्त 2026 में सोने का आयात घटकर $2.3 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले $5.4 अरब था।

भारत का वस्तु व्यापार घाटा सितंबर 2026 में मासिक आधार पर $3.35 अरब डॉलर बढ़कर $30.21 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जबकि अगस्त में यह $26.86 अरब डॉलर था। केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार, 15 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इस अवधि में देश का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 23.04 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि के साथ $44.4 अरब डॉलर पर पहुँचा।

निर्यात और आयात का ताज़ा परिदृश्य

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, सितंबर में देश का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 23.04 प्रतिशत बढ़कर $44.4 अरब डॉलर हो गया, जो अगस्त में $43.81 अरब डॉलर था। वहीं, आयात सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ $74.61 अरब डॉलर पर पहुँचा, जबकि अगस्त में यह $70.67 अरब डॉलर था।

निर्यात में मज़बूत वृद्धि के बावजूद आयात में भी इज़ाफे के कारण व्यापार घाटा चौड़ा हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में ऊर्जा और जिंस कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

वाणिज्य सचिव की प्रतिक्रिया

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत के निर्यात में वृद्धि का रुझान जारी है, जो बढ़ते व्यापार घाटे के बावजूद निर्यात में निरंतर गति का संकेत देता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में निर्यात की वृद्धि पहली तिमाही के मुकाबले अधिक रही है, जो सकारात्मक संकेत है।

मासिक और तिमाही तुलना

गौरतलब है कि इस साल जुलाई में व्यापार घाटा $32 अरब डॉलर के ऊँचे स्तर पर था, जो अगस्त में घटकर $26.86 अरब डॉलर रहा — एक साल पहले समान अवधि में यह $27.22 अरब डॉलर था। सितंबर का $30.21 अरब डॉलर का आँकड़ा जुलाई के शीर्ष से नीचे है, लेकिन अगस्त की तुलना में स्पष्ट रूप से ऊपर।

सोने के आयात मोर्चे पर, अगस्त 2026 में सोने का आयात गिरकर $2.3 अरब डॉलर रह गया, जो अगस्त 2025 के $5.4 अरब डॉलर के आँकड़े से आधे से भी कम था — यह घरेलू माँग में नरमी या ऊँची कीमतों के असर का संकेत हो सकता है।

चालू खाता घाटे की स्थिति

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) $4.2 अरब डॉलर रहा, जो GDP का 0.5 प्रतिशत है। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाज़ार में तेल, एलपीजी और फर्टिलाइज़र की कीमतें बढ़ने के बावजूद यह अनुपात नियंत्रण में रहा।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, निर्यात में दोहरे अंक की वृद्धि का जारी रहना उत्साहजनक है, लेकिन बढ़ता आयात बिल — खासकर ऊर्जा और पूँजीगत वस्तुओं की वजह से — व्यापार घाटे पर दबाव बनाए रख सकता है। अगली तिमाही में त्योहारी सीज़न के चलते सोने और उपभोक्ता वस्तुओं के आयात में फिर उछाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे निर्यात की 23% वृद्धि के संदर्भ में देखना ज़रूरी है — यह संकेत देता है कि घाटा माँग-कमज़ोरी से नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधि की तेज़ी से बढ़ रहा है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह निर्यात गति टिकाऊ है, या यह आधार-प्रभाव का एकमुश्त लाभ है। पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा आयात बिल का बोझ बढ़ने का जोखिम बना हुआ है, और त्योहारी सीज़न में सोने-उपभोक्ता वस्तुओं के आयात में उछाल घाटे को और चौड़ा कर सकता है। RBI और वित्त मंत्रालय के लिए असली चुनौती रुपये की स्थिरता और CAD को GDP के 1% से नीचे रखना होगी।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा कितना रहा?
सितंबर 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा $30.21 अरब डॉलर रहा, जो अगस्त के $26.86 अरब डॉलर से $3.35 अरब अधिक है। यह सरकार द्वारा 15 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक आँकड़ों पर आधारित है।
सितंबर 2026 में भारत का निर्यात कितना बढ़ा?
सितंबर 2026 में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 23.04 प्रतिशत बढ़कर $44.4 अरब डॉलर हो गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में बेहतर प्रदर्शन का संकेत बताया।
व्यापार घाटा बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
व्यापार घाटा मुख्यतः इसलिए बढ़ा क्योंकि आयात सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़कर $74.61 अरब डॉलर हो गया। पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल, एलपीजी और फर्टिलाइज़र की वैश्विक कीमतों में वृद्धि को इसका एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
भारत का चालू खाता घाटा (CAD) इस साल कैसा रहा?
RBI के आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा $4.2 अरब डॉलर रहा, जो GDP का 0.5 प्रतिशत है। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के बावजूद यह अनुपात नियंत्रण में रहा।
सोने के आयात में क्या बदलाव आया?
अगस्त 2026 में भारत का सोने का आयात घटकर $2.3 अरब डॉलर रह गया, जो अगस्त 2025 के $5.4 अरब डॉलर के मुकाबले आधे से भी कम है। यह कमी ऊँची वैश्विक कीमतों या घरेलू माँग में नरमी का संकेत हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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