15 अक्टूबर 2026
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भारत का कुल निर्यात सितंबर में $80.75 अरब, वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में 13.84% की छलांग

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भारत का कुल निर्यात सितंबर में $80.75 अरब, वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में 13.84% की छलांग

सारांश

भारत का कुल निर्यात सितंबर में $80.75 अरब को पार कर गया और वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में 13.84% की वृद्धि दर्ज हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स (70.44%), सिंगापुर (169%) और तंजानिया (122%) जैसे उभरते गंतव्य संकेत देते हैं कि भारत की निर्यात टोकरी और उसके बाज़ार — दोनों तेज़ी से बदल रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत का कुल निर्यात सितंबर 2026 में $80.75 अरब डॉलर रहा, सालाना 10.99% की वृद्धि।
अप्रैल–सितंबर 2026-27 में कुल निर्यात $476.20 अरब , पिछले वर्ष के $418.31 अरब से 13.84% अधिक।
वस्तु निर्यात छमाही में $259.89 अरब रहा, 18.51% की वृद्धि; इलेक्ट्रॉनिक सामान सबसे तेज़ — 70.44% उछाल।
सेवाओं का व्यापार अधिशेष छमाही में $102.71 अरब , पिछले वर्ष के $98.77 अरब से अधिक।
सितंबर में शीर्ष निर्यात वृद्धि गंतव्य: सिंगापुर (169.16%) , मलेशिया (119.69%) , मिस्र (90.09%) ।
सितंबर में कुल आयात $94.05 अरब , सालाना 8.19% की वृद्धि।

भारत का कुल निर्यात (वस्तुएं और सेवाएं मिलाकर) सितंबर 2026 में $80.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो सितंबर 2025 की तुलना में 10.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा 15 अक्टूबर 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल–सितंबर 2026-27 की पूरी छमाही में कुल निर्यात अनुमानित $476.20 अरब डॉलर रहा — पिछले वर्ष की समान अवधि के $418.31 अरब की तुलना में 13.84 प्रतिशत की बढ़त।

वस्तु निर्यात में मज़बूत उछाल

वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में वस्तुओं के निर्यात का कुल मूल्य $259.89 अरब डॉलर रहा, जबकि अप्रैल–सितंबर 2025-26 में यह $219.30 अरब था — यानी सालाना आधार पर 18.51 प्रतिशत की वृद्धि। इलेक्ट्रॉनिक सामान इस उछाल का सबसे बड़ा चालक रहा, जिसने अकेले सितंबर में पिछले साल की तुलना में 70.44 प्रतिशत की छलांग लगाई।

अन्य उच्च-वृद्धि श्रेणियों में अन्य अनाज (49.88%), हस्तशिल्प (43.19%), मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद (35.18%), पेट्रोलियम उत्पाद (31.9%), प्लास्टिक और लिनोलियम (24.81%), कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन (24.21%), इंजीनियरिंग सामान (20.91%) और रत्न व आभूषण (18.95%) शामिल रहे।

सेवा निर्यात और व्यापार अधिशेष

सेवाओं के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी मिली-जुली रही। सितंबर 2026 में सेवा निर्यात का अनुमानित मूल्य $36.35 अरब डॉलर रहा, जो सितंबर 2025 के $36.67 अरब की तुलना में मामूली कम है। हालांकि, समग्र छमाही में सेवाओं का निर्यात $216.31 अरब रहा — पिछले वर्ष के $199.02 अरब से अधिक।

सेवाओं का व्यापार अधिशेष अप्रैल–सितंबर 2026-27 में $102.71 अरब डॉलर रहा, जो अप्रैल–सितंबर 2025-26 के $98.77 अरब से बेहतर है। यह आंकड़ा भारत की सेवा अर्थव्यवस्था की स्थिरता को रेखांकित करता है।

शीर्ष निर्यात गंतव्य

आधिकारिक बयान के अनुसार, सितंबर 2026 में निर्यात मूल्य में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज करने वाले पाँच देशों में सिंगापुर (169.16%), मलेशिया (119.69%), मिस्र (90.09%), अमेरिका (47.99%) और चीन (24.05%) शामिल रहे।

समग्र छमाही (अप्रैल–सितंबर 2026-27) के शीर्ष पाँच वृद्धि गंतव्यों में तंजानिया (122.51%), सिंगापुर (103.05%), चीन (36.07%), मलेशिया (82.85%) और अमेरिका (11.11%) शामिल रहे। गौरतलब है कि पारंपरिक रूप से सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार अमेरिका की तुलना में आसियान देशों — विशेष रूप से सिंगापुर और मलेशिया — की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ी है।

आयात परिदृश्य और व्यापार संतुलन

सितंबर 2026 में कुल आयात (वस्तुएं और सेवाएं) $94.05 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो सितंबर 2025 की तुलना में 8.19 प्रतिशत अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की सुस्ती के बीच भारत के व्यापार के आंकड़े लचीलेपन का संकेत देते हैं।

आगे की राह

वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही के ये आंकड़े भारत सरकार के वार्षिक निर्यात लक्ष्यों के सापेक्ष सकारात्मक संकेत देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान में निरंतर वृद्धि, 'चीन+1' रणनीति अपनाने वाली वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की बढ़ती भागीदारी को प्रतिबिंबित करती है। दूसरी छमाही में वैश्विक मांग की गति और रुपये की स्थिरता इन लाभों को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विवरण अधिक बारीक तस्वीर पेश करता है। सेवा निर्यात में सितंबर में मामूली गिरावट — जो IT और BPO क्षेत्र का गढ़ है — वैश्विक तकनीकी खर्च में सुस्ती का प्रारंभिक संकेत हो सकती है। सिंगापुर और तंजानिया जैसे गैर-पारंपरिक गंतव्यों की असाधारण वृद्धि 'चीन+1' पुनर्गठन का लाभ उठाने की क्षमता दिखाती है, लेकिन यह भी पूछना ज़रूरी है कि क्या ये लाभ टिकाऊ हैं या महज़ एकमुश्त आदेशों का नतीजा। कुल मिलाकर, वस्तु निर्यात की 18.51% बढ़त 'मेक इन इंडिया' के लिए सही दिशा है — पर असली परीक्षा तब होगी जब दूसरी छमाही में वैश्विक मांग और डॉलर-रुपया समीकरण इस गति को चुनौती देंगे।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 में भारत का कुल निर्यात कितना रहा?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत का कुल निर्यात (वस्तुएं और सेवाएं) $80.75 अरब डॉलर रहा, जो सितंबर 2025 की तुलना में 10.99 प्रतिशत अधिक है।
वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में भारत के निर्यात में कितनी वृद्धि हुई?
अप्रैल–सितंबर 2026-27 की पहली छमाही में भारत का कुल निर्यात अनुमानित $476.20 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के $418.31 अरब की तुलना में 13.84 प्रतिशत अधिक है। इसमें वस्तु निर्यात में 18.51% की विशेष रूप से मज़बूत वृद्धि दर्ज हुई।
सितंबर 2026 में किन क्षेत्रों के निर्यात में सबसे अधिक वृद्धि हुई?
इलेक्ट्रॉनिक सामान (70.44%), अन्य अनाज (49.88%), हस्तशिल्प (43.19%), मांस-डेयरी-पोल्ट्री उत्पाद (35.18%) और पेट्रोलियम उत्पाद (31.9%) सितंबर में सबसे तेज़ वृद्धि वाले क्षेत्र रहे।
सितंबर 2026 में भारत का सेवा निर्यात कैसा रहा?
सितंबर 2026 में सेवा निर्यात का अनुमानित मूल्य $36.35 अरब डॉलर रहा, जो सितंबर 2025 के $36.67 अरब से मामूली कम है। हालांकि, समग्र छमाही में सेवाओं का निर्यात $216.31 अरब रहा और सेवाओं का व्यापार अधिशेष $102.71 अरब पर पहुंच गया।
भारत का निर्यात किन देशों में सबसे तेज़ी से बढ़ा?
सितंबर 2026 में सिंगापुर (169.16%), मलेशिया (119.69%), मिस्र (90.09%), अमेरिका (47.99%) और चीन (24.05%) में भारत का निर्यात सबसे तेज़ी से बढ़ा। छमाही आधार पर तंजानिया (122.51%) और सिंगापुर (103.05%) शीर्ष पर रहे।
राष्ट्र प्रेस
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