भागीरथपुरा में 36 मौतें: हटाए गए अधिकारी रोहित सिसोनिया को रायसेन कलेक्टर बनाने पर जीतू पटवारी का हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 14 अक्टूबर 2026 को मोहन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 36 लोगों की मौत के बाद हटाए गए अधिकारी रोहित सिसोनिया को रायसेन का कलेक्टर क्यों बनाया गया। उनका यह बयान उस समय आया जब मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार देर रात 23 आईएएस अधिकारियों के व्यापक तबादले किए, जिनमें 11 कलेक्टर भी शामिल हैं।
प्रशासनिक फेरबदल का विवरण
राज्य सरकार द्वारा की गई इस बड़ी प्रशासनिक सर्जरी में मुख्यमंत्री सचिवालय में भी नई तैनातियाँ की गई हैं। रश्मि अरुण शमी को एसीएस स्वास्थ्य, सुखबीर सिंह को मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव और भारत यादव को जनसंपर्क विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। इस पैमाने का तबादला राज्य के प्रशासनिक इतिहास में एक उल्लेखनीय बदलाव माना जा रहा है।
भागीरथपुरा त्रासदी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इंदौर देश की पहली वाटर प्लस सिटी का दर्जा पाने वाला शहर है, फिर भी भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति के कारण 36 लोगों की जान चली गई थी। इस त्रासदी के बाद संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को हटाया गया था और एक जाँच आयोग भी गठित किया गया था। अब उसी अधिकारी को नई प्रशासनिक ज़िम्मेदारी देने पर विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस की माँगें और आरोप
पटवारी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में तबादलों की पारदर्शिता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उनके शब्दों में, 'ट्रांसफर उद्योग अब ट्रांसफर फैक्ट्री बन चुका है।' उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण पदस्थापनाओं में जवाबदेही के बजाय जुगाड़ को प्राथमिकता दी जा रही है और भ्रष्टाचार तथा कमीशन के आरोप भी सबूत के रूप में सामने आते जा रहे हैं।
पटवारी ने यह भी कहा कि भागीरथपुरा के पीड़ित परिवार आज भी न्याय और दोषियों पर कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से तीन माँगें रखीं — पीड़ितों को न्याय दिया जाए, जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और ज़िम्मेदारी तय की जाए।
सरकार की स्थिति
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से पटवारी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जाँच आयोग की रिपोर्ट पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। इस मामले में सरकार का चुप रहना विपक्ष को और अधिक आक्रामक बनाता जा रहा है।
आगे क्या होगा
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर उठाएगी। पीड़ित परिवारों के संगठनों ने भी न्यायिक जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग दोहराई है। इस पूरे विवाद ने मध्य प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही और नौकरशाही तबादलों में पारदर्शिता के सवाल को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।