निलंबित IAS रोहित सिसोदिया रायसेन कलेक्टर नियुक्त, भागीरथपुरा त्रासदी पर कांग्रेस का सवाल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार देर रात एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रोहित सिसोदिया को रायसेन का कलेक्टर नियुक्त कर दिया — यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई जब इंदौर की भागीरथपुरा जल प्रदूषण त्रासदी में 36 लोगों की मौत के मामले में कथित प्रशासनिक चूक के आरोप में उनके निलंबन को अभी कुछ ही महीने बीते हैं। इस फैसले ने राज्य में तीखे राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य सरकार के इस फेरबदल में 23 से अधिक IAS अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इसमें जबलपुर, नर्मदापुरम, भिंड, पन्ना, शाजापुर, बुरहानपुर, हरदा, बालाघाट और सिंगरौली के कलेक्टरों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं, और राज्य सचिवालय में भी वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यभार में बदलाव किए गए हैं।
गौरतलब है कि सिसोदिया भागीरथपुरा त्रासदी के समय इंदौर नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात थे। दूषित पेयजल आपूर्ति से जुड़ी इस घटना में 36 लोगों की जान गई थी, जिसने नगरीय प्रशासन और पेयजल सुरक्षा के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
निलंबन और पुनर्नियुक्ति का विरोधाभास
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जनवरी को सिसोदिया के निलंबन की घोषणा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की 'कड़ी कार्रवाई' बताया था। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया था कि मध्य प्रदेश में यह पहली बार है जब किसी IAS अधिकारी को इस तरह निलंबित किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब त्रासदी से प्रभावित परिवार अभी भी न्याय और जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं। राज्य सरकार की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच आयोग की रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकले और सिसोदिया को पुनर्नियुक्त करने के पीछे क्या आधार है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को इस नियुक्ति पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा त्रासदी से पीड़ित परिवार अब तक न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पटवारी ने सवाल किया कि जांच आयोग की रिपोर्ट पर क्या कदम उठाए गए हैं और किन आधारों पर सिसोदिया को इतनी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक नियुक्तियों में जवाबदेही के स्थान पर राजनीतिक संबंध और भाई-भतीजावाद को प्राथमिकता दी जा रही है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री यादव से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की माँग करते हुए पूछा, 'क्या अब तबादलों का उद्योग तबादलों की फैक्ट्री बन गया है?'
भागीरथपुरा त्रासदी की पृष्ठभूमि
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के चलते 36 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने पूरे राज्य में नगरीय जल प्रबंधन को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी और सरकार पर जवाबदेही तय करने का राजनीतिक दबाव बढ़ा था। सिसोदिया के निलंबन को उस दबाव की प्रतिक्रिया के रूप में देखा गया था।
आगे क्या होगा
विपक्ष ने माँग की है कि जांच आयोग की रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए। राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार का रुख स्पष्ट होना बाकी है। इस नियुक्ति से मध्य प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर बहस और तेज होने की संभावना है।