2 अक्टूबर 2026
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भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड: जांच आयोग ने माना — 22 मौतें प्रदूषित पानी से, उमंग सिंघार ने उठाए सवाल

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भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड: जांच आयोग ने माना — 22 मौतें प्रदूषित पानी से, उमंग सिंघार ने उठाए सवाल

सारांश

इंदौर का स्वच्छतम शहर का तमगा अब सवालों के घेरे में है। न्यायिक जांच आयोग ने माना कि भागीरथपुरा में 22 मौतें दूषित पानी से हुईं — और सीवेज का पाइपलाइन में घुसना इसका कारण था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रिपोर्ट के हवाले से प्रशासनिक विफलता और जवाबदेही पर तीखे सवाल उठाए।

मुख्य बातें

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने अगस्त 2026 में रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें इंदौर के भागीरथपुरा में पेयजल के दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त होने की पुष्टि की गई।
आयोग ने 36 मौतों की जांच की, जिनमें से 22 मौतों को दूषित पेयजल से संबंधित माना गया।
सीवेज का पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश प्रदूषण का प्रमुख कारण पाया गया।
रिपोर्ट में प्रशासनिक देरी और तकनीकी अभिलेख उपलब्ध न कराए जाने को गंभीर खामी बताया गया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 2 अक्टूबर 2026 को इंदौर स्थित रेसीडेंसी में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी पर गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि इंदौर में प्रदूषित पानी पीने से मौतें हुई थीं। आयोग ने कुल 36 मौतों की जांच की, जिनमें से 22 मौतों को दूषित पेयजल से सीधे संबंधित पाया गया।

आयोग की रिपोर्ट में क्या सामने आया

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में भागीरथपुरा क्षेत्र में आपूर्ति किए जा रहे पेयजल को दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया। जांच में सीवेज के पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया।

रिपोर्ट में जल एवं सीवरेज व्यवस्था की योजना, रखरखाव, निगरानी और पर्यवेक्षण में व्यवस्थागत कमियों की ओर संकेत किया गया है। इसके अतिरिक्त, जांच में पाया गया कि प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण तकनीकी अभिलेख आयोग को उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसे रिपोर्ट में एक गंभीर खामी के रूप में दर्ज किया गया है। हाईकोर्ट ने बाद में आयोग की रिपोर्ट को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए।

नेता प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया

सिंघार ने कहा कि यह घटना उस शहर में हुई जो स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखता है। उन्होंने तर्क दिया कि इंदौर जैसे बड़े शहरी एवं आर्थिक केंद्र में, पर्याप्त प्रशासनिक संसाधनों के बावजूद ऐसी त्रासदी होना प्रशासनिक जवाबदेही और नगर व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का भी हवाला दिया और कहा कि जीवन के अधिकार में सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल की मूलभूत आवश्यकता सम्मिलित है। उनके अनुसार, रिपोर्ट में सामने आए तथ्य यह दर्शाते हैं कि नागरिकों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता हुआ।

प्रशासनिक विफलताएँ और जिम्मेदारी

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्रशासनिक देरी भी इस त्रासदी में एक महत्वपूर्ण कारक रही। जल एवं सीवरेज बुनियादी ढाँचे के रखरखाव में कमियाँ, समय पर निगरानी का अभाव और तकनीकी दस्तावेज़ीकरण की खामियाँ रिपोर्ट में रेखांकित की गई हैं। गौरतलब है कि इंदौर लगातार कई वर्षों से राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान पर रहा है, जिससे यह घटना और भी विरोधाभासी प्रतीत होती है।

आम जनता पर असर

भागीरथपुरा के प्रभावित परिवारों के लिए यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जो उनके आरोपों की पुष्टि करती है। 22 मौतें और सैकड़ों बीमार हुए नागरिक इस त्रासदी की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ शहरी जल प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे में दीर्घकालिक निवेश की जरूरत को उजागर करती हैं।

क्या होगा आगे

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई और पेयजल सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग की है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद यह मामला राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस निगरानी तंत्र पर सवाल है जो सतह की सफाई तो माप सकता है, पर पाइपलाइन के भीतर की सड़न को नहीं। आयोग द्वारा तकनीकी अभिलेख न मिलने की शिकायत दर्शाती है कि पारदर्शिता की कमी संस्थागत है। असली परीक्षा यह है कि क्या रिपोर्ट के निष्कर्ष किसी अधिकारी की जवाबदेही तय करेंगे या महज़ फाइलों में दब जाएँगे — जैसा ऐसे मामलों में अक्सर होता है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड क्या है?
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल के दूषित होने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े और मौतें हुईं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक न्यायिक जांच आयोग गठित किया, जिसने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
जांच आयोग ने कितनी मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना?
आयोग ने कुल 36 मौतों की जांच की, जिनमें से 22 मौतों को दूषित पेयजल से सीधे संबंधित पाया गया। सीवेज का पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया।
उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 2 अक्टूबर 2026 को कहा कि आयोग की रिपोर्ट ने पेयजल के दूषित होने की पुष्टि की है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार का हनन हुआ है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की।
आयोग की रिपोर्ट में प्रशासन पर क्या आरोप हैं?
रिपोर्ट में प्रशासनिक देरी, जल एवं सीवरेज व्यवस्था में व्यवस्थागत कमियाँ और महत्वपूर्ण तकनीकी अभिलेख आयोग को उपलब्ध न कराए जाने को गंभीर खामी बताया गया है। रखरखाव, निगरानी और पर्यवेक्षण में भी चूक पाई गई।
आगे इस मामले में क्या होने की संभावना है?
हाईकोर्ट के निर्देश पर रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद यह मामला राज्य की राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विधानसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से और दबाव बनाए जाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग तेज होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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