क्या इंदौर में 'डिजिटल हाउस अरेस्ट' के नाम पर महिला से 28.30 लाख रुपए की ठगी हुई?

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क्या इंदौर में 'डिजिटल हाउस अरेस्ट' के नाम पर महिला से 28.30 लाख रुपए की ठगी हुई?

सारांश

इंदौर में एक महिला के साथ हुई ऑनलाइन ठगी से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक आरोपी ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर महिला को ठग लिया। यह मामला डिजिटल ठगी की गंभीरता को उजागर करता है। जानें पूरी कहानी और ठगी से बचने के उपाय।

मुख्य बातें

संदिग्ध कॉल पर सतर्क रहें।
अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें।
पुलिस से तुरंत संपर्क करें यदि आपको ठगी का संदेह हो।
साइबर ठगी के मामलों की जांच चल रही है।
डिजिटल सुरक्षा के उपायों को अपनाएं।

इंदौर, 12 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक महिला के साथ अमेरिका से लौटने के बाद 28 लाख 30 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी का मामला प्रकाश में आया है।

पीड़िता ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि हाल ही में वह अपने बच्चों से मिलने के लिए अमेरिका गई थी और लौटने के कुछ दिनों बाद एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को जम्मू-कश्मीर पुलिस का एसपी बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में कुछ आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से महिला का नंबर मिला है, जिससे अब उनसे पूछताछ की जाएगी।

यह सुनकर महिला भयभीत हो गई। कॉलर ने उसे मानसिक दबाव में डालते हुए कहा कि मामला बहुत गंभीर है और सुरक्षा कारणों से उसे तत्काल डिजिटल वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद आरोपी ने महिला को घंटों तक "डिजिटल हाउस अरेस्ट" में रखा। इस दौरान आरोपी ने महिला से उसके बैंक खातों की जानकारी हासिल की और धीरे-धीरे उसके खातों से 28 लाख 30 हजार रुपए निकाल लिए।

पीड़िता ने बताया कि जब मैंने देखा कि मेरे बैंक खाते से बार-बार बड़ी रकम ट्रांसफर हो रही है, तो मुझे इस ठगी का अहसास हुआ। मैंने तुरंत अपने परिजनों से संपर्क किया, जो विदेश में रहते थे, और उन्होंने मुझे पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी। इसके बाद मैंने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।

इंदौर के अतिरिक्त डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि प्रारंभिक जांच में महिला के पैसे जिन खातों में ट्रांसफर किए गए थे, उन्हें चिन्हित कर फ्रीज कर दिया गया है। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त टीम अब कॉल करने वाले ठगों की लोकेशन, इस्तेमाल किए गए नंबर और ई-वॉलेट की गहन जांच कर रही है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गैंग का काम है, जो सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराता है। पूरे मामले की जांच चल रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल पर सतर्क रहें और अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल हाउस अरेस्ट क्या है?
डिजिटल हाउस अरेस्ट एक धोखाधड़ी प्रक्रिया है, जिसमें ठग व्यक्ति को मानसिक दबाव में डालकर उसके बैंक खातों की जानकारी हासिल करते हैं।
क्या मुझे संदिग्ध कॉल पर जानकारी साझा करनी चाहिए?
नहीं, आपको किसी भी संदिग्ध कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
पुलिस ने ठगों की लोकेशन और खातों की जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
क्या मैं ऐसे मामलों में पुलिस से कैसे संपर्क कर सकता हूँ?
आप तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन या साइबर सेल से संपर्क कर सकते हैं।
इस तरह की ठगी से कैसे बचें?
संदिग्ध कॉल से सतर्क रहें, अपनी जानकारी साझा न करें और हमेशा आवश्यक सतर्कता बरतें।
राष्ट्र प्रेस
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