इजरायल ने फिलिस्तीनियों के लिए घातक हमलों के दोषियों को फांसी की सजा देने वाला कानून मंजूर किया

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इजरायल ने फिलिस्तीनियों के लिए घातक हमलों के दोषियों को फांसी की सजा देने वाला कानून मंजूर किया

सारांश

तेल अवीव में इजरायल की संसद ने एक विवादास्पद कानून पारित किया है, जो फिलिस्तीनियों के लिए घातक हमलों के मामले में फांसी की सजा को अनिवार्य बनाता है। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना का विषय बन गया है।

Key Takeaways

  • नया कानून इजरायल की संसद द्वारा पारित किया गया है।
  • फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा अनिवार्य की गई है।
  • इस कानून की अंतरराष्ट्रीय आलोचना हो रही है।
  • कानून के तहत इजरायली नागरिकों को मृत्युदंड तभी मिलेगा जब उनका कृत्य इजरायल के अस्तित्व को समाप्त करने के इरादे से हो।
  • इस कानून को धुर दक्षिणपंथी नेताओं का समर्थन प्राप्त है।

तेल अवीव, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इजरायल की संसद ने एक विवादास्पद कानून को पारित किया है, जिसके अनुसार सैन्य अदालतों द्वारा घातक हमलों के दोषी ठहराए गए फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा अनिवार्य हो गई है। यह कानून प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों की एक प्रमुख मांग में शामिल था।

इस कानून की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना की जा रही है। विरोधियों ने इसे भेदभावपूर्ण और संविधान के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि यह कानून पहचान के आधार पर एक अलग कानूनी ढांचा तैयार करता है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

नए कानून के तहत, हत्या के दोषी पाए गए इजरायलियों को मृत्युदंड तभी दिया जाएगा, जब यह कृत्य "इजरायल के अस्तित्व को समाप्त करने" के इरादे से किया गया हो।

आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि यह सजा असमान रूप से फिलिस्तीनियों को निशाना बनाएगी, जबकि इसी तरह के अपराधों के आरोपी यहूदी इजरायलियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

कानून में यह भी अनिवार्य है कि फांसी की सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के भीतर दी जाए, जिसमें देरी के लिए केवल सीमित आधार दिए गए हैं और क्षमादान का कोई प्रावधान नहीं है।

अदालतों के पास आजीवन कारावास की सजा देने का विकल्प बरकरार है लेकिन केवल विशेष परिस्थितियों में ही मान्य होगा।

गौरतलब है कि इजरायल ने 1954 में हत्या के लिए मृत्युदंड समाप्त कर दिया था। नागरिक मुकदमे के बाद दी गई एकमात्र फांसी 1962 में एडॉल्फ आइचमैन की थी, जो होलोकॉस्ट में शामिल एक प्रमुख व्यक्ति था।

हालांकि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में सैन्य अदालतों के पास पहले से ही फिलिस्तीनी दोषियों को मृत्युदंड देने का अधिकार था लेकिन ऐसी सजा कभी लागू नहीं की गई थी।

इस विधेयक को धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर का जोरदार समर्थन प्राप्त था, जिन्होंने मतदान से पहले फांसी के फंदे के आकार के लैपल पिन पहनकर ध्यान आकर्षित किया।

विधेयक के पारित होने के बाद यायर लैपिड की येस एटिड, अरब-बहुसंख्यक हदाश-ताअल और वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी जैसी विभिन्न विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ कई मानवाधिकार संगठनों ने उच्च न्यायालय में इस कानून को चुनौती देने का मन बनाया है।

टाइम्स ऑफ इजरायल द्वारा नेसेट की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य और इस कानून के सबसे कड़े आलोचकों में से एक डेमोक्रेट सांसद गिलाद कारिव के हवाले से कहा गया है, "यह एक अनैतिक कानून है जो एक यहूदी और लोकतांत्रिक राज्य के रूप में इजरायल के मूलभूत मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून के उन प्रावधानों के विपरीत है, जिनका पालन करने का इजरायल ने वादा किया है।"

Point of View

यह कहना उचित होगा कि इस नए कानून ने इजरायल के न्याय प्रणाली में एक नई बहस को जन्म दिया है। यह कानून न केवल न्याय की परिभाषा को चुनौती देता है, बल्कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों को भी जन्म देता है।
NationPress
03/04/2026

Frequently Asked Questions

इजरायल ने यह नया कानून क्यों पारित किया?
इजरायल की संसद ने घातक हमलों के दोषी फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा को अनिवार्य करने के लिए यह कानून पारित किया।
इस कानून की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या रही है?
इस कानून की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है, इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया जा रहा है।
क्या इजरायल में पहले भी मृत्युदंड था?
इजरायल ने 1954 में हत्या के लिए मृत्युदंड समाप्त कर दिया था, लेकिन इस नए कानून के तहत यह फिर से लागू हो गया है।
इस कानून का उद्देश्य क्या है?
इस कानून का उद्देश्य इजरायल के खिलाफ घातक हमलों के लिए दंडित करना है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह भेदभावपूर्ण है।
क्या इस कानून के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है?
विभिन्न विपक्षी पार्टियों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का मन बनाया है।
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