कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त, कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी ठहराए गए

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कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त, कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी ठहराए गए

सारांश

कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता को कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी ठहराए जाने के बाद समाप्त कर दिया गया है। यह निर्णय विधानसभा सचिवालय द्वारा आधिकारिक रूप से जारी किया गया। जानिए इस विवादास्पद मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई।
  • उन्हें कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी ठहराया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दिल्ली में स्थानांतरित की।
  • राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई गई।
  • राजनीतिक दबाव के आरोप लगाए गए।

भोपाल, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती को कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। इस मामले में विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार की रात को आधिकारिक आदेश जारी किया।

विधानसभा सचिवालय के राजपत्र में दतिया विधानसभा को रिक्त घोषित किया गया है। राजेंद्र भारती को फर्जीवाड़े के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई गई है, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया है।

राजपत्र में उल्लेख किया गया है, "मध्यप्रदेश की सोलहवीं विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 22-दतिया से निर्वाचित सदस्य राजेंद्र भारती के खिलाफ दिल्ली की अदालत ने निर्णय पारित किया है। उन पर तीन साल के कारावास और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी गई है। उनके दंडित होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (10 जुलाई 2013) के पालन में संविधान के अनुच्छेद 191 (1) (सी) के अनुसार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत राजेंद्र भारती 2 अप्रैल 2026 से विधानसभा की सदस्यता से निरर्हित हो गए हैं। इस प्रकार, मध्यप्रदेश विधानसभा में एक स्थान रिक्त हो गया है।"

इससे पहले, दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में दतिया (मध्य प्रदेश) से कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने उनके सह आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी इतनी ही सजा दी।

बुधवार को कोर्ट ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश रचने और धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित अपराधों का दोषी पाया गया।

यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और इसकी सुनवाई को लेकर विवाद भी हुआ था। राजेंद्र भारती ने अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा व उनके परिवार के सदस्य इस मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

राजेंद्र भारती का यह भी कहना था कि अभियोजन पक्ष के अधिकारी भी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल रही है। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने मामले की सुनवाई ग्वालियर के बजाय किसी अन्य स्थान पर कराने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था।

Point of View

यह दर्शाता है कि राजनीतिक मामलों में न्याय का क्या प्रभाव पड़ सकता है। यह मामला न केवल कांग्रेस बल्कि भाजपा के लिए भी चुनौती बन सकता है।
NationPress
06/04/2026

Frequently Asked Questions

राजेंद्र भारती क्यों दोषी ठहराए गए?
राजेंद्र भारती को कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के मामलों में दोषी पाया गया।
उनकी सजा क्या है?
उन्हें तीन साल की कारावास और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
क्या उनकी विधानसभा सदस्यता वापस मिल सकती है?
नहीं, उनकी सदस्यता संविधान के अनुच्छेद 191 के अनुसार समाप्त कर दी गई है, जो 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी है।
क्या इस मामले में और कोई आरोपी हैं?
हाँ, उनके सह आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी समान सजा सुनाई गई है।
राजेंद्र भारती ने किस अदालत में अपील की थी?
राजेंद्र भारती ने अपने मामले को ग्वालियर से दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
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