15 अक्टूबर 2026
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जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: ₹100 करोड़ से नई कंपनी गठित, मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

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जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: ₹100 करोड़ से नई कंपनी गठित, मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

सारांश

मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार ने जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए ₹100 करोड़ से एक नई राज्य-स्वामित्व कंपनी गठित की है। मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ निवेश और 3 लाख रोज़गार का लक्ष्य — यह महाकौशल क्षेत्र के औद्योगिक रूपांतरण का सबसे बड़ा दांव है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर 2026 को जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए नई राज्य-स्वामित्व कंपनी के गठन को मंजूरी मिली।
राज्य सरकार ने कंपनी के लिए ₹100 करोड़ की प्रारंभिक राशि आवंटित की है।
प्रथम चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ भूमि विकसित करने की योजना है।
मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 3 लाख रोज़गार (1 लाख प्रत्यक्ष + 2 लाख अप्रत्यक्ष) का अनुमान।
अगले तीन वर्षों में ₹3 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 6 लाख से अधिक रोज़गार सृजन की दीर्घकालिक संभावना।
गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर 2026 को हुई मंत्रि-परिषद बैठक में जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी के गठन को मंजूरी दी गई। इस कंपनी के लिए राज्य शासन ने ₹100 करोड़ की प्रारंभिक राशि आवंटित की है। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि यह कॉरिडोर महाकौशल क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश को नई औद्योगिक शक्ति प्रदान करेगा।

कॉरिडोर की भौगोलिक संरचना और दायरा

जबलपुर से शुरू होकर भोपाल के रास्ते प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर तक विस्तारित यह कॉरिडोर एक व्यापक आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, जबलपुर, नरसिंहपुर और रायसेन तक का क्षेत्र औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाओं से समृद्ध है। यहाँ पर्यटन, खनन, कृषि और भारी उद्योगों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पहले से विद्यमान हैं।

इस परियोजना के प्रथम चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ भूमि विकसित करने की योजना है। कंपनी एक इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में कार्य करेगी और पूर्णतः राज्य शासन के स्वामित्व में रहेगी।

शासन ढाँचा और त्वरित निर्णय का प्रावधान

नई कंपनी की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे, जिससे निर्णय-प्रक्रिया में तेज़ी आएगी और सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य कर सकेंगे। यादव ने यह भी कहा कि राज्य की अन्य कंपनियों के संचालन से प्राप्त अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ इस परियोजना को मिलेगा।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में निवेश को आकर्षित करने के लिए कई औद्योगिक नीतियाँ लागू की हैं। यह कॉरिडोर उसी रणनीति की अगली कड़ी है।

संभावित निवेश और रोज़गार के आँकड़े

मुख्यमंत्री यादव के अनुसार, मार्च 2028 तक इस कॉरिडोर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश का अनुमान है। इससे लगभग 1 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 2 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलने की संभावना है — यानी कुल मिलाकर 3 लाख रोज़गार अवसर सृजित होने का लक्ष्य है।

आगामी तीन वर्षों की दीर्घकालिक अवधि में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का निवेश और 6 लाख से अधिक लोगों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित करने की संभावना भी जताई गई है। ये आँकड़े सरकार के अनुमानों पर आधारित हैं।

बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी और विमानन सहित आवश्यक कनेक्टिविटी की सुविधाएँ पहले से उपलब्ध हैं, जो किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए बुनियादी आवश्यकताएँ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र को औद्योगिक एवं आर्थिक रूप से विकसित करने की एक व्यापक योजना है।

आगे क्या

नई कंपनी के गठन के साथ अब परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गई है। निवेशकों को आकर्षित करने और भूमि विकास की रूपरेखा तैयार करना अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। यह कॉरिडोर यदि अपने अनुमानित लक्ष्यों को पूरा करता है, तो मध्य प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर एक नया अध्याय जुड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वास्तविक परीक्षा निवेश आकर्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में होगी। ₹1 लाख करोड़ और ₹3 लाख करोड़ के निवेश अनुमान सरकारी दावों पर आधारित हैं; इन्हें स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश में अतीत में भी बड़े औद्योगिक दावे किए गए हैं, जिनका ज़मीनी असर सीमित रहा। महाकौशल क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता एक सकारात्मक संकेत है, परंतु कौशल विकास और श्रम नीति के बिना रोज़गार के लक्ष्य केवल काग़ज़ी आँकड़े बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक परियोजना है, जो जबलपुर से भोपाल होते हुए इंदौर तक विस्तारित होगी। इसका उद्देश्य महाकौशल क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोज़गार सृजन को नई गति देना है।
इस कॉरिडोर के लिए नई कंपनी का गठन क्यों किया गया?
परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन और विभागीय समन्वय के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई राज्य-स्वामित्व कंपनी बनाई गई है। इसकी गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं होंगे, जिससे निर्णय-प्रक्रिया में तेज़ी सुनिश्चित होगी।
इस कॉरिडोर से कितना निवेश और रोज़गार मिलेगा?
सरकारी अनुमान के अनुसार, मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश और 3 लाख रोज़गार (1 लाख प्रत्यक्ष व 2 लाख अप्रत्यक्ष) सृजित होंगे। अगले तीन वर्षों में ₹3 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 6 लाख से अधिक रोज़गार अवसरों की दीर्घकालिक संभावना भी जताई गई है।
कॉरिडोर के प्रथम चरण में क्या विकसित किया जाएगा?
प्रथम चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है। यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन, खनन, कृषि और भारी उद्योगों के लिए भी क्षेत्र को तैयार किया जाएगा।
इस कॉरिडोर में किन क्षेत्रों को शामिल किया गया है?
जबलपुर, नरसिंहपुर और रायसेन से लेकर भोपाल तथा इंदौर तक का क्षेत्र इस कॉरिडोर में शामिल है। मुख्यमंत्री यादव के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी और विमानन जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहले से उपलब्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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