क्या जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से उड़ते हैं पक्षी या जहाज? जानिए रहस्य
सारांश
Key Takeaways
- जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से पक्षी या जहाज नहीं उड़ते हैं।
- यह एक धार्मिक आस्था का मामला है।
- वैज्ञानिक कारणों के अनुसार हवा का जटिल प्रवाह भी एक कारण है।
- नीलचक्र की चमक पक्षियों को आकर्षित नहीं करती।
- पुरी कोई प्रमुख हवाई मार्ग पर नहीं है।
पुरी, 21 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह रहस्यों और अद्भुत घटनाओं का संगम है। यहाँ का एक रहस्य है कि मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी या जहाज नहीं गुजरता। यह सुनने में चमत्कार जैसा लगता है, जो आज भी भक्तों और वैज्ञानिकों के लिए एक दिलचस्प रहस्य बना हुआ है।
भक्तों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं जगत के नाथ हैं और उनके वाहन गरुड़ देव, जो पक्षियों के राजा माने जाते हैं, हमेशा मंदिर की रक्षा करते हैं। कहा जाता है कि जब गरुड़ देव पहरे पर होते हैं, तो कोई अन्य पक्षी मंदिर के ऊपर उड़ने की हिम्मत नहीं करता। लोग इसे भगवान की दिव्य शक्ति और मंदिर की पवित्रता का प्रमाण मानते हैं, जहाँ प्रकृति खुद भगवान की मर्यादा का पालन करती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि पुरी समुद्र के बिल्कुल नजदीक है, जहाँ तेज और उलटे-सीधे झोंकों वाली हवाएं हमेशा चलती रहती हैं। मंदिर की ऊँचाई लगभग 214 फीट है और इसकी संरचना ऊँची, सीधी और शंक्वाकार है। इस तरह की आकृति पर हवा टकराकर एक जटिल प्रवाह बनाती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'वोर्टेक्स' कहा जाता है। इस तेज और अनिश्चित हवा में पक्षियों के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता है, इसलिए वे मंदिर के ऊपर कम जाते हैं और आसपास ही उड़कर निकल जाते हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर के ऊपर स्थित नीलचक्र की वजह से भी पक्षी नजदीक नहीं आते। यह चक्र आठ धातुओं से बना है और दूर से चमकता हुआ दिखाई देता है। इसके कारण भी पक्षी शायद ऊँचाई पर जाने से बचते हों। हालाँकि, यह केवल एक अनुमान है, क्योंकि इस पर कोई पक्का वैज्ञानिक शोध नहीं है।
जहाँ तक बात हवाई जहाजों की है, तो पुरी किसी भी मुख्य हवाई मार्ग पर नहीं आता है। हवाई जहाजों को यहाँ से गुजरने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके लिए कोई सरकारी 'नो-फ्लाई जोन' जारी नहीं किया गया है। विमान मंदिर के ऊपर नहीं दिखते, क्योंकि उनका मार्ग ही यहाँ से नहीं गुजरता।