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रितु बराला मामला: जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में कांग्रेस का धरना, एफआईआर की माँग पर अड़े डोटासरा

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रितु बराला मामला: जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में कांग्रेस का धरना, एफआईआर की माँग पर अड़े डोटासरा

सारांश

दिल्ली में एनएसयूआई नेत्री रितु बराला के साथ कथित पुलिस मारपीट के बाद जयपुर में सियासत उबाल पर है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा सहित वरिष्ठ नेता 18 घंटे से कमिश्नरेट में डटे हैं — एफआईआर नहीं, तो वापसी नहीं। सरकार की चुप्पी और पुलिस की 'दबाव में हैं' वाली दलील ने आग में घी का काम किया है।

मुख्य बातें

एनएसयूआई राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस मारपीट; उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और अन्य वरिष्ठ नेता सोमवार रात से जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में धरने पर बैठे हैं।
एफआईआर प्रभारी ने स्वीकार किया कि वे दबाव में हैं और बिना वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते।
18 घंटे से अधिक समय बाद भी पुलिस आयुक्त, डीजीपी और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब माँगा।
एनएसयूआई की माँग: जीरो एफआईआर, दोषी पुलिसकर्मियों का निलंबन और निष्पक्ष जाँच।

राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सोमवार रात से जयपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय के अंदर धरने पर बैठे हैं। यह प्रदर्शन एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में कथित पुलिस मारपीट के मामले में शून्य एफआईआर (जीरो एफआईआर) दर्ज कराने की माँग को लेकर है। 18 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी पुलिस आयुक्त, डीजीपी या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आने पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पीड़िता को न्याय देने की बजाय आरोपियों को संरक्षण दे रही है।

मूल घटनाक्रम: दिल्ली में क्या हुआ

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के अनुसार, संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया और एनएसयूआई की दो महिला कार्यकर्ताओं — जिनमें राष्ट्रीय सचिव रितु बराला शामिल हैं — को कथित तौर पर थाने ले जाकर ऐसी जगह पीटा गया जहाँ सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। बराला को कथित तौर पर अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा।

जयपुर में एफआईआर की राह में अड़चनें

डोटासरा ने बताया कि रितु बराला जयपुर लौटकर थाने में शिकायत दर्ज कराने गईं, तो उन्हें एक थाने से दूसरे थाने और फिर कमिश्नरेट कार्यालय भेजा गया। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने बताया कि एफआईआर प्रभारी ने स्वीकार किया कि वे दबाव में हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बिना एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते। गौरतलब है कि एडिशनल कमिश्नर से अनुरोध के बाद भी वे बैठक छोड़कर चले गए और वापस नहीं लौटे।

नेताओं के तीखे बयान

डोटासरा ने अपने बयान में कहा, 'यह करो या मरो की स्थिति है। हम अपना काम पूरा करके ही जाएंगे। लाठियाँ, पत्थर, जंग, गोलियाँ, तोपें — जो कुछ भी इस्तेमाल करना चाहते हैं, कर लीजिए। इंसान एक ही बार मरता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के सामने मनमानी नहीं चलेगी। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि इसका जवाब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को देना होगा और बिना बातचीत के कार्यालय पर दूसरों का कब्जा होने देना कर्तव्य की विफलता है।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026 तक पुलिस आयुक्त, डीजीपी या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। राजस्थान सरकार अथवा भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से भी इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज है।

आगे क्या होगा

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने माँग की है कि मामले में जीरो एफआईआर दर्ज हो, दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया है कि जब तक माँगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा। यह मामला आने वाले दिनों में न्यायिक या उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप की माँग तक भी पहुँच सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली मुद्दा यह है कि एक पीड़िता को एफआईआर दर्ज कराने के लिए एक राज्य के अध्यक्ष को रात भर धरने पर बैठना पड़ा। राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद से विपक्षी नेताओं की शिकायतों पर पुलिस के रवैये को लेकर यह कोई पहला विवाद नहीं है। सवाल यह है कि क्या न्यायिक हस्तक्षेप के बिना सामान्य नागरिकों को भी ऐसा ही न्याय मिल पाएगा।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रितु बराला मामला क्या है?
एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर महिला पुलिसकर्मियों ने मारपीट की, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। एनएसयूआई का आरोप है कि उन्हें थाने में सीसीटीवी-रहित जगह पर पीटा गया।
जयपुर में कांग्रेस का धरना क्यों हो रहा है?
रितु बराला जयपुर लौटकर एफआईआर दर्ज कराने गईं, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित वरिष्ठ नेता सोमवार रात से जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में धरने पर बैठे हैं।
पुलिस एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कर रही?
कांग्रेस विधायक रफीक खान के अनुसार, एफआईआर प्रभारी ने स्वयं स्वीकार किया कि वे दबाव में हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बिना एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते। पुलिस आयुक्त 18 घंटे से अधिक समय तक अनुपस्थित रहे।
कांग्रेस की मुख्य माँगें क्या हैं?
कांग्रेस और एनएसयूआई की माँग है कि रितु बराला मामले में जीरो एफआईआर दर्ज की जाए, दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जाए।
राजस्थान सरकार या मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
20 अक्टूबर 2026 तक मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने मुख्यमंत्री को सीधे जवाबदेह ठहराया है।
राष्ट्र प्रेस
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