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रितु बराला केस: जीरो एफआईआर की मांग पर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस का 24 घंटे से धरना जारी

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रितु बराला केस: जीरो एफआईआर की मांग पर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस का 24 घंटे से धरना जारी

सारांश

राहुल गांधी के निर्देश पर शुरू हुआ जयपुर का यह धरना अब 24 घंटे पार कर चुका है। एनएसयूआई सचिव रितु बराला के साथ कथित मारपीट मामले में जीरो एफआईआर दर्ज हो या नहीं — इस कानूनी सवाल पर कांग्रेस और राजस्थान पुलिस आमने-सामने हैं, और यह विवाद अब सीधे राजनीतिक टकराव में बदल गया है।

मुख्य बातें

एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ 13 अक्टूबर को दिल्ली में कथित मारपीट और दुर्व्यवहार की घटना सामने आई थी।
जीरो एफआईआर की माँग को लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस का धरना 24 घंटे से अधिक समय से जारी है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के फोन कॉल के बाद पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सोमवार शाम 6:15 बजे कमिश्नरेट पहुँचे।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय सिंह के अनुसार, दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में मामला पहले से दर्ज है और बराला की शिकायत उसमें शामिल कर ली गई है।
डोटासरा ने चुनौती दी कि पुलिस दिल्ली में दर्ज एफआईआर की प्रति दिखाए, तभी धरना समाप्त होगा।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई, पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया।

एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज कराने की माँग को लेकर जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस कमिश्नरेट के बाहर धरना मंगलवार, 20 अक्टूबर को भी जारी रहा। सोमवार शाम शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन 24 घंटे से अधिक समय पार कर चुका है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच नारेबाजी और झड़प की घटनाएँ भी सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।

मुख्य घटनाक्रम

यह विरोध प्रदर्शन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस फोन कॉल के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से कहा था कि वे जयपुर में एफआईआर दर्ज कराना सुनिश्चित करें। इसके बाद डोटासरा सोमवार शाम करीब 6:15 बजे पुलिस कमिश्नरेट पहुँचे। डोटासरा और अन्य कांग्रेस नेताओं ने सोमवार की रात कमिश्नरेट परिसर में फर्श पर सोकर बिताई और मंगलवार को विरोध स्थल पर ही चाय और नाश्ता किया।

पुलिस का पक्ष

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) अजय सिंह ने बताया कि 13 अक्टूबर की घटना के संबंध में दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में पहले से ही एक मामला दर्ज है और बराला की शिकायत उस चल रही जाँच में शामिल कर ली गई है। जयपुर पुलिस ने स्पष्ट किया कि उन्हीं तथ्यों के आधार पर जयपुर में अलग एफआईआर दर्ज करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। पुलिस ने बराला के इस दावे को भी गलत बताया कि वह इलाज में व्यस्त रहने के कारण दिल्ली में शिकायत दर्ज नहीं करा सकीं।

कांग्रेस नेताओं की दलील

पीसीसी अध्यक्ष डोटासरा ने पुलिस को चुनौती दी कि वे दिल्ली में दर्ज एफआईआर की एक प्रति सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा, 'पुलिस हमें दिखाए कि दिल्ली में कौन सी एफआईआर दर्ज की गई है। अगर वे इसे दिखा दें, तो हम तुरंत यहाँ से चले जाएँगे। असल में पुलिस ने दिल्ली में इन युवाओं के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की है।' उन्होंने यह भी कहा, 'जीरो एफआईआर दर्ज कराना हमारा कानूनी अधिकार है। केरल में एक जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी। हम आखिरी दम तक लड़ेंगे।'

विपक्षी नेताओं के आरोप

राजस्थान में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि दिल्ली और जयपुर दोनों जगह बराला द्वारा शिकायत दिए जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई। जूली ने आरोप लगाया, 'जो लोग महिलाओं की सुरक्षा, उनके सम्मान और 'बेटी बचाओ' अभियान की बात करते हैं, वे खुद ही एक बेटी के साथ अन्याय कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा, 'क्या ये भाजपा सदस्य खुद को कानून से ऊपर समझते हैं?' गौरतलब है कि इस दौरान एक कांग्रेस नेता ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि जयपुर पुलिस कमिश्नर 'भाजपा खेमे में' मिलेंगे।

आगे क्या होगा

डोटासरा ने कहा कि पुलिस के साथ बातचीत के लिए वे तैयार हैं, लेकिन जब तक जीरो एफआईआर दर्ज नहीं होती, धरना जारी रहेगा। यह विवाद राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच टकराव का नया मोर्चा बन चुका है। अब यह देखना होगा कि जयपुर पुलिस दिल्ली में दर्ज एफआईआर की प्रति सार्वजनिक करती है या नहीं, और क्या मध्यस्थता के जरिये यह गतिरोध समाप्त हो पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि कांग्रेस की माँग भी कानूनी रूप से निराधार नहीं — सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार स्पष्ट किया है कि जीरो एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है, चाहे घटना किसी भी क्षेत्राधिकार में हुई हो। राहुल गांधी के सीधे हस्तक्षेप से यह प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बन गया है, और इस पर राजस्थान सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रितु बराला कौन हैं और उनके साथ क्या हुआ?
रितु बराला एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव हैं। कथित तौर पर 13 अक्टूबर को दिल्ली में उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार की घटना हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
जीरो एफआईआर क्या होती है और कांग्रेस इसकी माँग क्यों कर रही है?
जीरो एफआईआर वह प्रक्रिया है जिसमें किसी भी पुलिस स्टेशन में, चाहे घटना उसके क्षेत्राधिकार में हुई हो या नहीं, शिकायत दर्ज की जा सकती है और फिर उसे संबंधित थाने को स्थानांतरित किया जाता है। कांग्रेस का तर्क है कि यह बराला का कानूनी अधिकार है और जयपुर पुलिस इसे दर्ज करने से अनुचित रूप से मना कर रही है।
जयपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से क्यों मना किया?
जयपुर पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर की घटना के संबंध में दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में पहले से ही मामला दर्ज है और दिल्ली पुलिस जाँच कर रही है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय सिंह ने कहा कि उन्हीं तथ्यों पर जयपुर में अलग से एफआईआर दर्ज करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।
इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी की क्या भूमिका है?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को फोन कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि जयपुर में एफआईआर दर्ज हो। इसके बाद ही डोटासरा सोमवार शाम पुलिस कमिश्नरेट पहुँचे और धरना शुरू हुआ।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
डोटासरा ने कहा है कि यदि पुलिस दिल्ली में दर्ज एफआईआर की प्रति दिखाती है, तो वे धरना समाप्त कर देंगे। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बरकरार है और धरना जारी है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जीरो एफआईआर पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों की रोशनी में इस मामले की न्यायिक समीक्षा भी संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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