रितु बराला केस: कांग्रेस अदालत जाएगी, डोटासरा बोले — राजस्थान में जीरो FIR क्यों नहीं?
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने 21 अक्टूबर 2026 को जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर अपना तीन दिवसीय धरना समाप्त करते हुए एलान किया कि एनएसयूआई नेता रितु बराला पर कथित पुलिस मारपीट के मामले में न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस अब अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी का आरोप है कि बार बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिशों के बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मामले की पृष्ठभूमि
इस महीने की शुरुआत में छात्र नेता रितु बराला के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट का आरोप सामने आया था। कांग्रेस नेता इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुँचे। डोटासरा के अनुसार, जब वे शिकायत दर्ज कराने गए तो स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) ने कहा कि यह फैसला पुलिस कमिश्नर करेंगे, और बाद में कमिश्नर ने उन्हें प्रतीक्षा करने को कहा।
जीरो FIR पर विवाद
डोटासरा ने बताया कि पुलिस ने लिखित रूप में यह जवाब दिया कि देश में कहीं भी किसी शिकायत के आधार पर 'जीरो एफआईआर' दर्ज नहीं की जा सकती। उन्होंने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसी कानून के तहत केरल में एक जीरो एफआईआर दर्ज हो चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर केरल में जीरो एफआईआर दर्ज हो सकती है, तो राजस्थान में क्यों नहीं?"
डोटासरा ने आरोप लगाया कि पुलिस दिल्ली के दबाव में काम कर रही है और कानून की जानबूझकर गलत व्याख्या कर रही है। अब पार्टी अदालत से यह तय करवाना चाहती है कि जो प्रावधान केरल में लागू है, वह राजस्थान में क्यों लागू नहीं किया जा रहा।
कांग्रेस की कानूनी रणनीति
कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने स्पष्ट किया कि पार्टी केवल कथित मारपीट और दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर ही नहीं, बल्कि राजस्थान पुलिस के उन अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेगी जिन्होंने उचित कदम नहीं उठाए। जूली ने पुलिस अधिकारियों पर भाजपा के एजेंट की तरह काम करने और कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया — हालाँकि भाजपा या पुलिस की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
धरने के दौरान डोटासरा घायल
विरोध प्रदर्शन के दौरान गोविंद सिंह डोटासरा सीढ़ियों पर फिसलकर गिर गए, जिससे उनके पैर में चोट आ गई। इसके बाद जाँच के लिए डॉक्टरों की एक टीम बुलाई गई। जूली ने इस घटना को कमिश्नरेट परिसर में बुनियादी सुविधाओं की लापरवाही का प्रमाण बताया और परिसर में वॉशरूम पर ताला लगाए जाने को लेकर भी आपत्ति जताई।
आगे क्या होगा
तीन दिवसीय धरना समाप्त होने के बाद कांग्रेस का रुख स्पष्ट है — अदालत के जरिए एफआईआर दर्ज कराना और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना। जूली ने चल रहे पंचायत चुनावों में भी भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी चुनावी हेरफेर की कोशिश कर रही है — जैसा कि कथित तौर पर नगर निकाय चुनावों में हुआ था। आने वाले दिनों में कांग्रेस द्वारा अदालत में याचिका दायर होने की संभावना है, जो इस मामले की अगली निर्णायक कड़ी होगी।