विश्वेंद्र सिंह ने दिए कांग्रेस छोड़ने के संकेत, बोले — 'घुट-घुटकर मरने से सम्मान की मौत बेहतर'
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 2 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस से विदाई के स्पष्ट संकेत दिए, और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ चल रहे कटु विवाद को नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया। सिंह ने लिखा कि 'घुट-घुटकर मरने से सम्मान के साथ मरना बेहतर है' और यह स्पष्ट किया कि वे अब डोटासरा की नीतियों और कार्यशैली के साथ खुद को नहीं जोड़ सकते। हालाँकि, उन्होंने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह टकराव भरतपुर और डीग के शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद और गहरा गया। विश्वेंद्र सिंह ने इन परिणामों के लिए डोटासरा, भरतपुर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दिनेश सुपा और डीग जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजीव चौधरी को सीधे ज़िम्मेदार ठहराया।
30 सितंबर 2026 को सिंह ने डोटासरा के शिक्षा मंत्री कार्यकाल के दौरान रीट परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया — हालाँकि ये दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं — कि 2016 और 2018 की भर्ती परीक्षाओं में डोटासरा के कई रिश्तेदारों को आरएएस इंटरव्यू में एक समान अंक मिले। सिंह ने ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र से जुड़े कथित लाभों पर भी सवाल उठाए।
सिंह का रुख और सोशल मीडिया पोस्ट
सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनका सार्वजनिक जीवन एक 'खुली किताब' है और उन्होंने कभी अपने सम्मान पर दाग नहीं लगने दिया। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए अब 'विदाई लेना ही बेहतर' है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने अपने आराध्य गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज़ को अपने फैसलों का आधार बताया।
सिंह ने कार्यकर्ताओं की नाराज़गी का हवाला देते हुए कहा कि 'अगर झूठ और गलत काम का साथ न देना उनकी गलती है, तो वे यह गलती आगे भी करते रहेंगे।' उन्होंने यह भी लिखा — 'मैं जनता के लिए जीता हूँ और उनके लिए ही मरूँगा।' बाद में उन्होंने हिंदी फिल्म के गाने 'ठहरे हुए पानी में कंकड़ न मार...' से जुड़ी एक और पोस्ट साझा की, जिसे राजनीतिक इशारे के रूप में देखा जा रहा है।
डोटासरा की प्रतिक्रिया
गोविंद सिंह डोटासरा ने गुरुवार को कहा था कि वे 'केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कोई फैसला नहीं लेंगे' और जिलाध्यक्षों से चर्चा के बाद विश्वेंद्र सिंह की भावनाओं को समझने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अनुशासनहीनता की जाँच पहले पार्टी की अनुशासन समिति करेगी।
डोटासरा ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले करीब ढाई वर्षों से दोनों नेताओं के बीच संगठनात्मक मामलों पर कोई संवाद नहीं हुआ है, हालाँकि उन्होंने सिंह को पार्टी का 'वरिष्ठ नेता' बताया। 1 अक्टूबर 2026 को डोटासरा ने — सिंह का नाम लिए बिना — कहा कि 'कांग्रेस एकजुट है' और उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ की जा रही आलोचना को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कथित 'टूलकिट' से जोड़ा।
पार्टी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
राजस्थान कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी ने विश्वेंद्र सिंह पर BJP के लिए 'स्लीपर सेल' की तरह काम करने का आरोप लगाया। प्रदेश महासचिव देशराज मीणा ने भी आरोप लगाया कि सिंह भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि पार्टी की ओर से सिंह के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की खबरें थीं, लेकिन कोई औपचारिक नोटिस जारी होने से पहले ही सिंह ने पार्टी छोड़ने के संकेत दे दिए।
आगे की राह
विश्वेंद्र सिंह ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार से रीट-भर्ती मामले की जाँच कराने और डोटासरा के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। यह मामला राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक कलह को फिर से सतह पर ले आया है, और सिंह के अगले राजनीतिक कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।